राम मंदिर के दान पर किसकी गढ़ी नजर? 40 दान पेटियां, 50 कर्मचारी और CCTV कैमरों के बावजूद गड़बड़ी का दावा

Ram Mandir Donation Case: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित गड़बड़ी के आरोपों के बाद सरकार ने 3 सदस्यीय SIT का गठन किया है. मंदिर परिसर में 40 दान पेटियां रखी गई थीं, जिनमें आए चढ़ावे को गिनने के लिए 50 कर्मचारी लगाए गए थे.

यूपी तक

• 08:20 PM • 15 Jun 2026

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Ram Mandir Donation Case: सदियों के लंबे इंतजार के बाद अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ था, जिसके बाद से वहां श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है. मंदिर परिसर में आम श्रद्धालुओं के दर्शन शुरू होने के बाद से रोज लाखों रुपये का दान आ रहा है, लेकिन अब इसी नगद चढ़ावे में बड़ी गड़बड़ी की आशंका जताई गई है. राम मंदिर ट्रस्ट की मांग पर उत्तर प्रदेश सरकार ने इस कथित गड़बड़ी की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय 3 सदस्यीय एसआईटी (SIT) का गठन कर दिया है.

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3 सदस्यीय एसआईटी करेगी जांच

राम मंदिर में नगद चढ़ावे की कथित गड़बड़ी की जांच के लिए बनी एसआईटी में तीन बड़े अधिकारी शामिल हैं. इस जांच टीम में लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, लखनऊ रेंज के आईजी किरण एस और वित्त विभाग (Finance Department) के अधिकारी नील रतन मौजूद हैं. ट्रस्ट की तरफ से यह बताया गया है कि, 'जो चढ़ावे की रकम है उसका ऑडिट हो रहा है और उस ऑडिट के दौरान कुछ ऐसी खबरें आई हैं.' इन्हीं बातों के आधार पर एसआईटी इस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है.

50 कर्मचारी करते थे गिनती

मंदिर में कुल 40 दान पेटियां रखी गई थीं, जिनमें आए नगद पैसों को गिनने के लिए 50 कर्मचारी लगाए गए थे. वाराणसी की एक निजी कंपनी के 24 कर्मचारी अलग-अलग नोटों की गड्डियां बनाते थे, जिन पर निगरानी रखने के लिए 12 ट्रस्ट कर्मचारी तैनात थे. इसके अलावा एसबीआई (SBI) और टीसीएस (TCS) कंपनी के 14 कर्मचारी भी इस पूरी प्रक्रिया और सीसीटीवी मैनेजमेंट का हिस्सा थे. इतनी भारी निगरानी और कैमरों की नजर के बावजूद चढ़ावे में चोरी की बात सामने आना व्यवस्था पर एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा करता है.

अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं

सूत्रों के अनुसार, गड़बड़ी की आशंका के चलते कुछ कर्मचारियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, लेकिन आधिकारिक तौर पर अभी तक किसी की कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे मामले में अभी तक कोई एफआईआर (FIR) भी दर्ज नहीं की गई है. अब एसआईटी अपनी जांच में यह पता लगा रही है कि इतनी कड़ी सुरक्षा के बीच यह चोरी कैसे हुई है. एसआईटी की विस्तृत जांच रिपोर्ट और तथ्यों के आधार पर ही इस मामले में आगे की कानूनी दिशा तय होगी.