राम मंदिर चढ़ावा विवाद में बाबरी मस्जिद की एंट्री! बृजेश पाठक ने SP से मांगा मस्जिद के चंदे का हिसाब

Ram Temple Donation Case: राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर सियासत तेज हो गई है. डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए बाबरी मस्जिद चंदे का हिसाब मांगा है, जबकि योगी सरकार ने मामले की जांच के लिए 3 सदस्यीय SIT गठित कर दी है.

यूपी तक

14 Jun 2026 (अपडेटेड: 14 Jun 2026, 04:13 PM)

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Ram Mandir Donation Case: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में बने राम मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित गबन को लेकर राजनीति तेज हो गई है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को सोशल मीडिया के जरिए उठाया था. अब यह मुद्दा लगातार सियासी गलियारों में तूल पकड़ता जा रहा है. बाराबंकी में एक कार्यक्रम के दौरान यूपी के उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा विपक्ष को बाबरी मस्जिद के चंदे का भी हिसाब देना चाहिए. फिलहाल योगी सरकार ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की मांग पर चढ़ावे की राशि में हुए गबन की निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी (SIT) का गठन कर दिया है. जांच के दौरान अब तक इस मामले में कई गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं.

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यूपी के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक का तीखा पलटवार

इस पूरे मामले में समाजवादी पार्टी के नेता लगातार राज्य सरकार और मंदिर ट्रस्ट को घेरने की कोशिश कर रहे हैं. सपा नेता अवधेश प्रसाद ने राम मंदिर में हुई कथित चोरी की जांच एसआईटी के बजाय किसी व्यापक स्तर की बड़ी जांच एजेंसी से कराने की मांग की है. इस मांग पर बाराबंकी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान यूपी के उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कड़ा पलटवार किया. पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए डिप्टी सीएम ने सपा नेताओं पर सीधा निशाना साधा और कहा कि, 'आप उनसे पूछो बाबरी मस्जिद का जो चंदा इकट्ठा हुआ था, उसके बारे में एक बार बात करके देखें.'

योगी सरकार का एक्शन, 24 घंटे में बनाई 3 सदस्यीय एसआईटी

राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मामले की जांच की मांग किए जाने के बाद राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई की है. सरकार ने चंदे में हुए गबन की जांच के लिए 24 घंटे के भीतर एक उच्च स्तरीय 3 सदस्यीय एसआईटी (SIT) का गठन किया है. इस टीम में कई वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है, जिसमें एक मंडलायुक्त (डिवीजनल कमिश्नर), एक आईजी (जिन्हें सीबीआई में काम करने का लंबा अनुभव है) और तीसरे वित्त विभाग के एक विशेषज्ञ अधिकारी शामिल हैं.

7 दिन में प्रारंभिक और 15 दिन में सौंपनी होगी अंतिम रिपोर्ट

जांच प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाने के लिए राज्य सरकार ने एसआईटी की जांच के लिए एक सख्त समय सीमा तय की है. जांच टीम को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट 7 दिन के अंदर और अंतिम जांच रिपोर्ट 15 दिन के भीतर सौंपने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है. ट्रस्ट से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि एसआईटी की जांच में जो भी कमियां, तथ्य या वित्तीय अनियमितताएं सामने आएंगी, उसके आधार पर मंदिर ट्रस्ट के भीतर आगे की चर्चा की जाएगी और रिपोर्ट की सिफारिशों के अनुरूप सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.