Ghaziabad News: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है जिसने पुलिस प्रशासन से लेकर आम लोगों तक को हैरान कर दिया है. जिस व्यक्ति को मृत मानकर अंतिम संस्कार तक कर दिया गया था, वह करीब 39 दिन बाद अचानक अपने घर लौट आया. इस घटना ने न सिर्फ एक मौत की पुष्टि पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि पुलिस की जांच प्रक्रिया और पहचान प्रणाली पर भी गंभीर प्रश्न उठाए हैं.
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कैसे शुरू हुआ पूरा मामला
यह घटना गाजियाबाद के वैशाली इलाके के कल्पना अपार्टमेंट में रहने वाले 38 वर्षीय गिरधर सिंह बिष्ट से जुड़ी है. जानकारी के अनुसार 16 मई को गिरधर का स्थानीय दुकानों से किसी बात को लेकर विवाद हो गया था. इसके बाद कौशांबी पुलिस ने उन्हें धारा 151 (शांतिभंग) के तहत गिरफ्तार कर डासना जेल भेज दिया. 21 मई को जेल से रिहा होने के बाद गिरधर घर नहीं पहुंचे, जिसके बाद परिवार उनकी तलाश में जुट गया.
अज्ञात शव की बरामदगी और पहचान में गलती
13 जून को गाजियाबाद के मसूरी क्षेत्र में पुलिस को एक अज्ञात शव मिला. पुलिस ने शिनाख्त के लिए गिरधर के परिजनों को बुलाया. परिजनों ने उस शव की पहचान गिरधर सिंह बिष्ट के रूप में कर दी.
इसके बाद पुलिस पर लापरवाही के आरोप लगे और कौशांबी थाने में हंगामा भी हुआ. पोस्टमार्टम के बाद शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया और परिवार ने शोक सभा व 13वीं की रस्में भी पूरी कर लीं. इसी आधार पर मसूरी थाने में हत्या का मामला दर्ज किया गया और कुछ लोगों को संदेह के घेरे में लेकर पूछताछ भी शुरू कर दी गई.
39 दिन बाद जिंदा लौटने से मचा हड़कंप
मामला उस समय पूरी तरह पलट गया जब 39 दिन बाद गिरधर सिंह बिष्ट अचानक अपने घर वापस लौट आए. उन्हें सामने देखकर परिवार, पड़ोसी और स्थानीय लोग स्तब्ध रह गए. जो लोग कुछ समय पहले उनकी शोक सभा में शामिल हुए थे, वही अब उन्हें जीवित देखकर हैरान रह गए.
गिरधर का बयान और 39 दिनों का रहस्य
गिरधर ने बताया कि जेल से छूटने के बाद वह परिवार से नाराज होकर पंजाब चला गया था. उनका दावा है कि वह व्यास नदी के पास एक राधा स्वामी सत्संग में समय बिता रहे थे.
पुलिस के अनुसार, मामले की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो शव परिजनों को दिखाया गया और जिसका अंतिम संस्कार हुआ, वह आखिर किसका था? पुलिस अब उस अज्ञात शव की असली पहचान और पूरी प्रक्रिया की जांच में जुटी है. साथ ही यह भी जांच हो रही है कि पहचान प्रक्रिया में कोई चूक या जल्दबाजी तो नहीं हुई.
हत्या का मामला और कानूनी स्थिति
इस केस में पहले दर्ज हत्या के मुकदमे की स्थिति भी अब बदल गई है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों की गहन जांच के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी.
परिवार और स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
इस घटना के बाद उन लोगों के परिजन भी सवाल उठा रहे हैं जिन पर हत्या के शक में जांच की जा रही थी. उनका कहना है कि गलत पहचान के कारण उन्हें अनावश्यक बदनामी और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा.
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