संभल जिले के असमोली थाना क्षेत्र के मुबारकपुर बंद गांव में एक अनोखा मामला सामने आया है. यहां राजस्व रिकॉर्ड में खेल के मैदान और खाद के गड्ढे के लिए दर्ज 3 बीघा सरकारी जमीन पर अवैध रूप से मस्जिद, मदरसा और पांच दुकानों का निर्माण कर लिया गया था. प्रशासन द्वारा पैमाइश के बाद जब यह जमीन सरकारी घोषित हुई, तो मस्जिद कमेटी ने कानून का सम्मान करते हुए खुद ही इस अवैध निर्माण को हटाने का जिम्मा उठा लिया.
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प्रशासन की पैमाइश और 8 दिन का अल्टीमेटम
कुछ दिन पहले राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जमीन की पैमाइश की थी, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि निर्माण पूरी तरह अवैध है. इसके बाद प्रशासन ने मस्जिद कमेटी को 8 दिन के भीतर अतिक्रमण हटाने का अल्टीमेटम दिया था. नोटिस मिलते ही कमेटी के लोगों ने मजदूरों के जरिए दीवारों की ईंटें निकालनी शुरू कर दीं, ताकि तय समय सीमा के भीतर सरकारी जमीन खाली की जा सके.
समय कम पड़ा तो किराए पर मंगाई जेसीबी
मजदूरों से काम धीमा होता देख और समय सीमा नजदीक आने पर, मस्जिद कमेटी ने 4 अप्रैल को तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह से संपर्क किया. कमेटी ने काम में तेजी लाने के लिए जेसीबी मशीन की मांग की. ग्राम प्रधान पति हाजी मुनववर के अनुसार, प्रशासन की अनुमति के बाद ₹1000 प्रति घंटे के किराए पर जेसीबी मंगाई गई. 5 अप्रैल से मशीन के जरिए तेजी से मस्जिद, मदरसे और दुकानों को हटाने का काम शुरू कर दिया गया, जिसमें करीब 20 घंटे का समय लगने का अनुमान है.
तहसीलदार बोले- ग्रामीणों ने खुद पेश की मिसाल
मौके पर पहुंचे तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि जैसे ही ग्रामीणों को संज्ञान हुआ कि यह ग्राम समाज की भूमि है, उन्होंने खुद ही स्ट्रक्चर हटाना शुरू कर दिया. तहसीलदार ने स्पष्ट किया कि यहाँ केवल धार्मिक ढांचा और दुकानें थीं, किसी अवैध मकान की जानकारी फिलहाल नहीं है. ग्रामीणों के इस कदम की सराहना की जा रही है, क्योंकि उन्होंने टकराव के बजाय कानून का पालन करते हुए खुद ही अतिक्रमण हटाकर प्रशासन का सहयोग किया है.
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