महाकुंभ के दौरान वायरल हुई मोनालिसा भोसले की शादी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कानूनी रूप से बेहद गंभीर मोड़ ले चुका है. जिस विवाह को मोनालिसा ने अपनी मर्जी और बालिग होने का दावा करते हुए सही ठहराया था उसे राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की जांच ने अवैध और नाबालिग विवाह करार दिया है.
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जांच में हुआ उम्र का बड़ा खुलासा
आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य के नेतृत्व में गठित टीम ने मध्य प्रदेश के महेश्वर जाकर पड़ताल की. महेश्वर ब्लॉक के मेडिकल ऑफिसर अतुल गौर ने आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर पुष्टि की है कि मोनालिसा की जन्म तिथि 30 दिसंबर 2009 है, जो सरकारी प्रसव पंजीयन रजिस्टर (2009) में दर्ज है. इस आधार पर 11 मार्च 2026 को हुए विवाह के समय मोनालिसा की उम्र मात्र 16 साल 2 महीने थी. आयोग को अस्पताल के रिकॉर्ड से यह पुख्ता जानकारी मिली है, जिससे मोनालिसा के बालिग होने के दावों की पोल खुल गई है.
साजिश और 'लव जिहाद' के आरोप
इस मामले में कानूनी पैरवी करने वाले वकील प्रथम द्विवेदी ने इसे लव जिहाद की साजिश बताते हुए आयोग से जांच की मांग की थी. आयोग के सलाहकार और पूर्व न्यायाधीश प्रकाश उईके के मार्गदर्शन में हुई जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए: मोनालिसा और बागपत के फरमान खान का विवाह केरल में रचा गया था. आरोप है कि इस विवाह में केरल के कुछ राजनीतिक दलों के बड़े नेता और राज्यसभा सांसद मौजूद थे, साथ ही इसे पुलिस प्रोटेक्शन भी दिया गया था. शिकायतकर्ता का कहना है कि यह पारदी जनजाति समुदाय की बेटी की संस्कृति और पहचान पर सीधा प्रहार है.
फिल्म डायरेक्टर सनोज मिश्रा की प्रतिक्रिया
डायरेक्टर सनोज मिश्रा पर मोनालिसा ने पहले गंभीर आरोप लगाए थे. अब उन्होंने इस खुलासे को अपनी जीत बताया है. उन्होंने कहा, "मुझ पर फिल्म की पब्लिसिटी और अन्य गंदे आरोप लगाए गए, लेकिन मैं अपनी साख और मेहनत की लड़ाई लड़ रहा था. वह मेरे लिए बेटी की तरह थी जो भटक गई थी." मिश्रा ने स्पष्ट किया कि वे फिलहाल कोई फिल्म रिलीज नहीं कर रहे हैं और उनका उद्देश्य केवल सच को सामने लाना था.
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