BSP प्रदेश अध्यक्ष 'विश्वनाथ पाल' का स्टिंग वीडियो वायरल! टिकट के बदले कैश की मांग... मायावती ने दी सफाई

Vishwanath Pal Sting Video: बसपा के यूपी प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल का कथित स्टिंग वीडियो वायरल होने के बाद सियासत तेज हो गई है. वीडियो में टिकट और मायावती से मुलाकात के बदले पैसे मांगने के आरोप लगाए गए हैं. हालांकि मायावती ने सारे आरोपों का खंडन करते हुए प्रदेश अध्यक्ष का बचाव किया है.

यूपी तक

• 12:38 PM • 20 Jun 2026

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Vishwanath Pal Sting Video: बहुजन समाज पार्टी (BSP) के यूपी प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल एक बड़े विवाद में घिर गए हैं. मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, एक बड़े मीडिया हाउस का 'स्टिंग वीडियो' सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस वीडियो में विश्वनाथ पाल पर आरोप लगा है कि वे चुनाव में टिकट दिलाने और बसपा सुप्रीमो मायावती से मुलाकात करवाने के एवज में लाखों रुपये की मांग कर रहे हैं. इस स्टिंग ने यूपी की सियासत में हलचल मचा दी है. हालांकि, विवाद बढ़ता देख खुद मायावती ने आगे आकर अपने प्रदेश अध्यक्ष का बचाव किया है.

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मायावती ने दी लंबी सफाई

वायरल वीडियो पर सफाई देते हुए मायावती ने सोशल मीडिया पर लिखा,' बीएसपी बाबा साहेब के बताए रास्ते पर चलने वाली ईमानदार पार्टी है. बीएसपी पूंजीपतियों के सहारे नहीं, बल्कि अपने लोगों के तन-मन-धन से चलती है.' उन्होंने स्पष्ट किया कि टिकट चाहने वालों से पार्टी के प्रति वफादारी और आर्थिक हैसियत आंकने के लिए 'कोर्ट की जिरह' की तरह कड़े सवाल-जवाब किए जाते हैं. मायावती ने इसे विरोधियों की साजिश करार देते हुए कहा कि पार्टी की जांच-परख प्रक्रिया को गलत तरीके से पेश करना मीडिया को शोभा नहीं देता है.

कौन हैं विश्वनाथ पाल?

अयोध्या के अनंतपुर गांव में एक गरीब किसान परिवार में जन्मे विश्वनाथ पाल ने वकालत (LLB) की पढ़ाई की है. 90 के दशक में कांशीराम के मूवमेंट से जुड़ने के बाद उन्होंने महज एक छोटे कार्यकर्ता के रूप में पार्टी में शुरुआत की थी. इसके बाद वे सेक्टर अध्यक्ष, जिला उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष और भाईचारा कमेटी की जिम्मेदारी निभाते हुए प्रदेश अध्यक्ष के शीर्ष पद तक पहुंचे. दिलचस्प बात यह है कि मायावती ने उन्हें 'प्रदेश अध्यक्ष' का पद उनके जन्मदिन के खास तोहफे के रूप में दिया था.

बिना चुनाव जीते बने अध्यक्ष

विश्वनाथ पाल की राजनीतिक यात्रा की सबसे खास बात यह है कि उन्होंने आज तक कोई बड़ा चुनाव नहीं जीता है. उन्होंने अपने राजनीतिक करियर में सिर्फ एक बार अयोध्या के मसौदा ब्लॉक से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. हालांकि, चुनाव हारने के बावजूद वह बसपा के कैडर सिस्टम में लगातार आगे बढ़ते रहे हैं. विश्वनाथ पाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर मायावती ने यूपी में 'पाल वोट बैंक' को साधने की रणनीति बनाई थी. इससे पहले कांशीराम ने भी भगवत पाल और 1997 में दयाराम पाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था.