Jhansi Sadar Assembly: उत्तर प्रदेश की राजनीति में कुछ सीटें ऐसी हैं जो लंबे समय तक एक ही पार्टी के गढ़ के रूप में पहचानी जाती हैं. ऐसी ही एक विधानसभा सीट है झांसी सदर विधानसभा, जहां 2002 के बाद से समाजवादी पार्टी (सपा) कभी जीत दर्ज नहीं कर पाई है. पिछले तीन चुनावों से लगातार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) इस सीट पर कब्जा जमाए हुए है और इससे पहले बसपा और कांग्रेस भी यहां अपनी बारी से जीत दर्ज कर चुकी हैं. लेकिन 2009 के बाद से इस सीट पर बीजेपी का दबदबा लगातार मजबूत होता गया है.
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2002 से 2012 तक बदलता राजनीतिक समीकरण
इस सीट का राजनीतिक इतिहास काफी दिलचस्प रहा है. 2002 में बसपा के रमेश कुमार शर्मा विधायक बने थे. इसके बाद 2004 के उपचुनाव में कांग्रेस के प्रदीप जैन आदित्य ने जीत दर्ज की. 2007 में भी कांग्रेस ने यह सीट अपने नाम की.
लेकिन 2009 के उपचुनाव में बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब बसपा के कैलाश साहू ने मात्र 9 वोटों के बेहद करीबी अंतर से जीत हासिल की. यह मुकाबला इस सीट के इतिहास के सबसे करीबी चुनावों में से एक माना जाता है.
बीजेपी का उदय और लगातार जीत का सिलसिला
इसके बाद राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल गई. 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी के रवि शर्मा ने लगातार जीत हासिल की और इस सीट को बीजेपी का मजबूत गढ़ बना दिया.
रवि शर्मा का कहना है कि उनकी जीत का आधार “विकास, सुरक्षा और जनता का विश्वास” है. उनके अनुसार उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था में सुधार और विकास कार्यों के कारण जनता बीजेपी के साथ खड़ी है.
विपक्ष का दावा और सपा की रणनीति
वहीं दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी (सपा) का दावा है कि बीजेपी “साम-दाम-दंड-भेद” की राजनीति से चुनाव जीतती है. पिछली बार सपा उम्मीदवार सीमा कुशवाहा रनर-अप रही थीं. पार्टी का कहना है कि अब वे पूरी तरह 2027 के चुनाव की तैयारी में जुट गए हैं.
सपा जिला अध्यक्ष का कहना है कि पार्टी की सबसे बड़ी कमजोरी जनता तक अपनी विचारधारा को सही तरीके से न पहुंचा पाना रहा है. अब पार्टी “पीडीए रणनीति” के तहत नए सिरे से मजबूत वापसी की तैयारी कर रही है.
जातीय समीकरण और वोट बैंक की राजनीति
इस सीट पर करीब 4 लाख मतदाता हैं. राजनीतिक विश्लेषण के अनुसार यहां जातीय समीकरण काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
दलित (अहीरवार/कोरी): लगभग 1,30,000
ब्राह्मण: लगभग 1,10,000
कुशवाहा: लगभग 60,000
मुस्लिम: लगभग 50,000
वैश्य: लगभग 45,000
यादव: लगभग 20,000
विशेषज्ञों का मानना है कि ब्राह्मण, वैश्य और ओबीसी वोटों का संतुलन बीजेपी के पक्ष में मजबूत रहता है, जिससे उसे लगातार बढ़त मिलती रही है.
स्थानीय पत्रकारों की राय
स्थानीय पत्रकारों के अनुसार बीजेपी की पकड़ इस सीट पर काफी मजबूत है. उनका कहना है कि भले ही विपक्ष कभी-कभी वोट प्रतिशत बढ़ाने में सफल रहा हो, लेकिन वह बीजेपी को चुनौती देने की स्थिति में नहीं आ पाया है.
हालांकि कुछ पत्रकारों का मानना है कि अगर विपक्ष मजबूत उम्मीदवार और प्रभावी मुद्दों के साथ मैदान में उतरता है, तो मुकाबला थोड़ा दिलचस्प हो सकता है. साथ ही एंटी-इनकंबेंसी फैक्टर भी भविष्य में असर डाल सकता है.
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