2027 चुनाव पर टिकी बीजेपी की नजर: राज्यसभा से सभी पुराने चेहरों की छुट्टी, विधानसभा में क्या होगा?

यूपी तक

• 01:26 PM • 06 Oct 2026

बीजेपी ने अपने सभी पुराने राज्यसभा सांसदों के टिकट काट दिए हैं. नए उम्मीदवारों की सूची जारी हुई है. 2027 विधानसभा चुनाव के लिए यह रणनीति महत्वपूर्ण मानी जा रही है. कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन विवादों में है. आगामी चुनावों में ये राजनीतिक हलचलें निर्णायक साबित होंगी

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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी रणनीति में बड़ा फेरबदल करना शुरू कर दिया है. इसी कड़ी में पार्टी ने हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में अपने सभी पुराने सांसदों के टिकट काटते हुए पूरी तरह से नए चेहरों पर दांव खेला है. बीजेपी के इस कड़े कदम को पार्टी के भीतर एंटी-इन्कंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) को बेअसर करने और जातीय व क्षेत्रीय समीकरण साधने की 'सर्जिकल स्ट्राइक' के रूप में देखा जा रहा है. वहीं दूसरी ओर विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन में समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच सीटों तथा असंतुष्ट नेताओं की आवाजाही को लेकर खींचतान तेज हो गई है.

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बीजेपी का 'क्लीन स्वीप' प्रयोग: आठ नए चेहरे राज्यसभा की रेस में

बीजेपी ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपने सभी पुराने सांसदों को किनारे कर आठ नए प्रत्याशियों की सूची जारी की है. इसमें धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडे, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप चौहान और श्रुति गंगवार के नाम शामिल हैं. इन सभी नामों को जातीय संतुलन, सांगठनिक योगदान और राजनीतिक प्रभाव को ध्यान में रखकर चुना गया है. इस फैसले से साफ संदेश गया है कि पार्टी अब निष्ठावान और जमीनी कार्यकर्ताओं को तरजीह देकर 2027 की जमीन तैयार कर रही है.

विधायकों में बढ़ा संशय, 2027 में भी टिकट कटने की आशंका

राज्यसभा टिकटों में हुए इस अचानक और कड़े बदलाव से बीजेपी के वर्तमान विधायकों और टिकट के दावेदारों के बीच भारी बैचैनी देखी जा रही है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी बड़े पैमाने पर मौजूदा विधायकों के टिकट काट सकती है. स्थानीय स्तर पर विधायकों के खिलाफ पनप रहे जन-आक्रोश को खत्म करने और नए व असरदार चेहरों को मौका देने के लिए बीजेपी इस रणनीति को दोहरा सकती है.

'इंडिया' गठबंधन में अंदरूनी रार: सपा और कांग्रेस में खींचतान

एक तरफ जहां बीजेपी संगठन को चुस्त-दुरुस्त कर रही है. वहीं दूसरी तरफ विपक्षी खेमे में तालमेल की कमी दिख रही है.

सीटों पर विवाद: कांग्रेस छोटे दलों और अपने सहयोगियों को साथ लेकर अधिक सीटों पर दावेदारी की रणनीति बना रही है जिससे समाजवादी पार्टी असहज महसूस कर रही है.

सपा नेताओं की कांग्रेस से नजदीकी: समाजवादी पार्टी के भीतर भी मतभेद गहरा रहे हैं.स्वामी प्रसाद मौर्य जैसे दिग्गज नेताओं और सपा के कई असंतुष्ट चेहरों की कांग्रेस से बढ़ती नजदीकियां दोनों दलों के बीच दरार को और चौड़ा कर रही हैं. इससे कांग्रेस अपनी स्थिति मजबूत करने में लगी है, तो सपा की चिंताएं बढ़ गई हैं.

2027 के लिए बिछने लगी बिसात

सत्ता पक्ष और विपक्ष की यह वर्तमान राजनीतिक हलचल दर्शाती है कि 2027 के महासमर को लेकर दोनों खेमों ने अपनी-अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है.बीजेपी जहां कड़े फैसले लेकर और नए समीकरण साधकर सत्ता बरकरार रखने में जुटी है. वहीं विपक्ष के भीतर का असंतोष और गठबंधन की तल्खी आने वाले चुनावों में बड़ी भूमिका निभा सकती है.