यूपी में सीट शेयरिंग को लेकर सपा-कांग्रेस में खींचतान, धर्मेंद्र यादव बोले- 'कांग्रेस बीजेपी से लड़े, सपा से नहीं'

यूपी तक

• 06:26 PM • 03 Oct 2026

SP Congress Alliance: यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सपा और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग को लेकर खींचतान बढ़ती दिख रही है. सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कांग्रेस को सपा के बजाय बीजेपी से लड़ने की नसीहत दी है.

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SP Congress Alliance: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच गठबंधन तो कायम है, लेकिन सीट शेयरिंग को लेकर सियासी खींचतान लगातार बढ़ती जा रही है. कांग्रेस राज्य में ज्यादा से ज्यादा सीटों पर दावा ठोकना चाहती है, जबकि सपा का साफ कहना है कि सिर्फ सीटें मांगना काफी नहीं है, बल्कि उस सीट पर उम्मीदवार की जीतने की क्षमता भी देखी जाएगी. इसी खींचतान के बीच सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कांग्रेस को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि कांग्रेस बीजेपी से लड़े, सपा से नहीं. उनके इस बयान ने यूपी की सियासत और गठबंधन को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है.

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धर्मेंद्र यादव का कांग्रेस को कड़ा संदेश

सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कांग्रेस को आईना दिखाते हुए कहा कि सहयोगी दलों को आपस में या सपा से टकराने की बजाय अपना पूरा फोकस बीजेपी को हराने पर लगाना चाहिए. उन्होंने कांग्रेस को नसीहत दी कि वह सपा से लड़ने के बजाय बीजेपी से लड़ें. धर्मेंद्र यादव ने इशारों-इशारों में कांग्रेस को याद दिलाया कि यूपी में सबसे ज्यादा जनाधार और लोकप्रियता सपा और उनके नेता की ही है. उनका यह बयान उन चर्चाओं के बीच आया है जब कांग्रेस के कई बड़े नेता लगातार सीटों की मांग कर रहे हैं.

'50 सीटें देना भी बहुत बड़ी बात होगी'

सीट शेयरिंग को लेकर कांग्रेस के दबाव का जवाब अब सपा के नेता भी खुलकर देने लगे हैं. प्रतापगढ़ से सपा सांसद शिवपाल सिंह पटेल ने कांग्रेस के 150 सीटों के दावे को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी हैसियत और विधायकों-सांसदों की संख्या देखकर ही सीटें मांगनी चाहिए. शिवपाल सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस को 50 सीटें देना भी बहुत बड़ी बात होगी. उन्होंने याद दिलाया कि अगर सपा के साथ गठबंधन नहीं होता, तो कांग्रेस लोकसभा में अपनी छह सीटें भी नहीं जीत पाती.

जिताऊ उम्मीदवारों पर ही लगेगी मुहर

सीट शेयरिंग की इस पूरी बहस के बीच सपा प्रमुख अखिलेश यादव पहले ही अपना रुख साफ कर चुके हैं. वह लगातार कह रहे हैं कि गठबंधन कायम रहेगा, लेकिन सीटें सिर्फ उसी आधार पर दी जाएंगी, जहां उम्मीदवार के जीतने की संभावना होगी. अखिलेश ने रायबरेली जैसे कांग्रेस के गढ़ में भी मंच से खुले तौर पर यही बात कही थी कि "जो जीत सके, ले जाए." सपा की रणनीति साफ है कि वह कांग्रेस के सिर्फ सीटें मांगने के दबाव में नहीं आएगी. वह केवल जिताऊ चेहरों पर ही मुहर लगाएगी.