'नदी की धारा को रोकोगे तो रास्ता खुद बनाएगी,' BJP से टिकट कटने पर डॉ. संजयन त्रिपाठी का छलका दर्द

यूपी तक

• 01:29 PM • 02 Oct 2026

डॉ संजय त्रिपाठी ने भाजपा से टिकट न मिलने पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है. उन्होंने कहा कि यह बगावत नहीं, लोकतंत्र का हिस्सा है.

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गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का टिकट न मिलने से आहत वरिष्ठ नेता डॉ. संजयन त्रिपाठी ने चुनाव लड़ने का पूरा मन बना लिया है. पिछले 26 वर्षों से राजनीति और 19 सालों से इस क्षेत्र में सक्रिय डॉ. त्रिपाठी ने पार्टी नेतृत्व पर निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी और बाहरी व्यक्ति को तरजीह देने का गंभीर आरोप लगाया है. समर्थकों की भारी भीड़ के बीच उन्होंने स्पष्ट किया कि इसे बगावत कहने के बजाय उनका लोकतांत्रिक अधिकार समझा जाए. उन्होंने ऐलान किया है कि नामांकन (पर्चा) दाखिल करते ही वे बीजेपी की प्राथमिक सदस्यता से आधिकारिक इस्तीफा दे देंगे.

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'6 साल पसीना बहाया, पर वफादारी का सम्मान नहीं मिला'

डॉ. संजयन त्रिपाठी ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि वे पिछले 6 वर्षों से शिक्षक एमएलसी चुनाव की कठिन तैयारी कर रहे थे और पार्टी के हर निर्देश व कार्यक्रम का पूरी निष्ठा से पालन किया. 2010 और 2017 में भी वे बेहद कम वोटों के अंतर से चुनाव हारे थे और 2023 में आश्वासन के बावजूद उन्हें मौका नहीं मिला. इस बार उम्मीद थी कि पार्टी उनके समर्पण का सम्मान करेगी. लेकिन टिकट एक ऐसे व्यक्ति को दे दिया गया जो बीजेपी का प्राथमिक सदस्य तक नहीं है.

'नदी की धारा को रोकने के गलत परिणाम होते हैं'

चुनावी मैदान में उतरने के फैसले पर बोलते हुए डॉ. त्रिपाठी ने कहा, "यह बगावत नहीं बल्कि मेरी 26 सालों की राजनीतिक पूंजी है जो इन समर्थकों के रूप में मेरे साथ खड़ी है. नदी की अविरल धारा को अगर अवरोध बनाकर रोकने की कोशिश की जाएगी तो वह दाएं-बाएं से अपना रास्ता खुद बनाएगी. किसी बहती धारा को रोकना गलत है और इसके दूरगामी परिणाम होते हैं."

पार्टी आलाकमान की बेरुखी पर जताया अफसोस

टिकट कटने के बाद पार्टी संगठन के रवैये पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि परसों दोपहर 12 बजे टिकट की घोषणा हुई थी, लेकिन तब से लेकर अब तक बीजेपी के किसी भी छोटे या बड़े पदाधिकारी ने उनसे संपर्क नहीं किया. सहानुभूति के दो शब्द बोलना तो दूर, हाल-चाल तक नहीं पूछा गया. हालांकि पार्टी के भीतर व्यक्तिगत संबंध रखने वाले साथी और कार्यकर्ता लगातार फोन कर उनका हौसला बढ़ा रहे हैं और चुनाव लड़ने का दबाव बना रहे हैं.

'जब तक पर्चा नहीं भरता, तब तक भाजपा का हूं'

गाड़ी पर लगे बीजेपी के झंडे और पार्टी से जुड़ाव के सवाल पर डॉ. संजयन त्रिपाठी ने स्थिति साफ की. उन्होंने कहा कि जब तक वे अपना पर्चा दाखिल नहीं कर देते, तब तक वे नैतिक रूप से बीजेपी के साथ हैं. जिस क्षण वे नामांकन पत्र दाखिल करेंगे, उसी समय पार्टी से अपना इस्तीफा सौंप देंगे और आजाद उम्मीदवार के तौर पर चुनावी समर में उतरेंगे.

गोरखपुर-पूर्वांचल के इस घटनाक्रम के बाद बीजेपी के अंदरूनी कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष साफ देखा जा रहा है जो आगामी चुनाव में पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है.