यूपी में चुनाव से पहले सपा-कांग्रेस में तकरार तेज! अखिलेश बोले- 'बात सीट की नहीं, जीत की है'

यूपी तक

• 04:03 PM • 04 Oct 2026

SP Congress Alliance: यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सपा और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर खींचतान बढ़ रही है. इस बीच अखिलेश यादव ने कहा कि गठबंधन में सीटों की संख्या से ज्यादा जरूरी चुनाव में जीत है.

Google CTA

SP Congress Alliance: यूपी चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर टकराव बढ़ता जा रहा है. इसी बीच सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सीट बंटवारे पर एक बड़ा बयान दिया है. अखिलेश ने कहा है कि अहम मुद्दा यह नहीं है कि किसे कितनी सीटें मिलेंगी, बल्कि सबसे जरूरी यह है कि हमारा गठबंधन चुनाव जीते. वहीं, दूसरी तरफ इस खींचतान पर बीजेपी भी तंज कसते हुए गठबंधन को 'लठबंधन' बता रही है.

यह भी देखें...

सपा और कांग्रेस के बीच खींचतान

चुनाव से पहले दोनों पार्टियों के नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. कांग्रेस के नेता जहां 150 सीटों की मांग कर रहे हैं. सपा नेता उन्हें उनकी जमीनी स्थिति याद दिला रहे हैं. सपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस को 50 सीटें देना भी बहुत बड़ी बात है, क्योंकि उनके पास सिर्फ दो विधायक हैं. उनका यह भी कहना है कि अगर सपा के साथ गठबंधन नहीं होता, तो कांग्रेस पिछले चुनाव में छह सांसद भी नहीं जीत पाती. सपा नेताओं ने सलाह दी है कि कांग्रेस को सपा से लड़ने के बजाय बीजेपी से लड़ना चाहिए.

अखिलेश यादव ने दिया बड़ा संदेश

नेताओं की इस बयानबाजी के बीच अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखी है. उन्होंने कहा है कि जब मकसद साफ हो, तो सफर आसान हो जाता है. उनके मुताबिक, यह मायने नहीं रखता कि गठबंधन में किसे कितनी सीटें मिल रही हैं. सबसे जरूरी यह है कि गठबंधन को जीत मिले ताकि लोकतंत्र, संविधान और आरक्षण को बचाया जा सके. अखिलेश ने साफ किया कि बात सीट की नहीं, बल्कि जीत की है. जो भी जीतने की पक्की गारंटी देगा, उसे ही वह सीट मिलेगी.

बीजेपी ने गठबंधन पर कसा तंज

सपा और कांग्रेस के बीच चल रही इस अनबन पर बीजेपी लगातार निशाना साध रही है. बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने इस गठबंधन को 'लठबंधन' का नाम दिया है. उनका कहना है कि अखिलेश यादव एक-एक कदम उठाकर कांग्रेस को उसकी असली हैसियत दिखा रहे हैं. बीजेपी का आरोप है कि यह गठबंधन सिर्फ अहंकार और स्वार्थ पर टिका है और इन दोनों पार्टियों के बीच कोई वैचारिक तालमेल नहीं है. अब यह देखना अहम होगा कि दोनों पार्टियां सीट बंटवारे पर कब तक सहमत होती हैं और इस बयानबाजी को शीर्ष नेतृत्व कैसे रोकता है.