योगी सरकार ने किसानों-पशुपालकों को बजट में दिया बड़ा तोहफा, अब होगी मोटी कमाई और बीज भी मिलेंगे सस्ते!

आयशा शेख़

• 03:38 PM • 04 Aug 2026

उत्तर प्रदेश सरकार ने 2026-27 के अनुपूरक बजट में किसानों और पशुपालकों के लिए कई अहम योजनाओं के लिए अतिरिक्त धनराशि का प्रस्ताव रखा है. सबसे ज्यादा फोकस ₹150 करोड़ के नंद बाबा दुग्ध मिशन पर है, जिसका उद्देश्य डेयरी नेटवर्क और दूध खरीद व्यवस्था को मजबूत करना है.

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UP Budget 2026: उत्तर प्रदेश सरकार ने अनुपूरक बजट में किसानों और पशुपालकों के लिए कई योजनाओं के लिए भारी-भरकम राशि की पेशकश की है.  सबसे ज्यादा चर्चा नंद बाबा दुग्ध मिशन की है.

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दरअसल, इस बजट का फोकस सिर्फ खेती नहीं, बल्कि खेती के साथ पशुपालन से होने वाली कमाई बढ़ाने पर भी दिख रहा है. अगर सरकार की योजनाएं जमीन पर ठीक से लागू होती हैं तो किसानों की लागत कम हो सकती है और दूध बेचने वालों की आमदनी बढ़ने की उम्मीद भी है.

सबसे पहले समझिए नंद बाबा दुग्ध मिशन है क्या?

उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में किसान खेती के साथ-साथ गाय और भैंस भी पालते हैं, लेकिन कई बार उन्हें दूध का सही दाम नहीं मिल पाता या दूध खरीदने की व्यवस्था मजबूत नहीं होती.

नंद बाबा दुग्ध मिशन का मकसद यही है कि गांवों में दूध संग्रह की व्यवस्था मजबूत हो, डेयरी नेटवर्क बढ़े और ज्यादा किसानों को सहकारी दुग्ध समितियों से जोड़ा जाए. बजट में इस मिशन के लिए 150 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया है.

इसका फायदा क्या होगा?

अगर योजना ठीक से लागू होती है तो गांव में दूध बेचने के ज्यादा केंद्र खुल सकते हैं. किसानों को दूध बेचने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा. डेयरी नेटवर्क मजबूत होने से दूध की खरीद आसान हो सकती है. पशुपालन करने वाले किसानों की अतिरिक्त कमाई बढ़ने की संभावना है. यानी सरकार का मकसद खेती के साथ डेयरी को भी आय का मजबूत जरिया बनाना है.

पुराने दुग्ध संघों को मजबूत क्यों किया जा रहा?

कई जिलों में दुग्ध संघ वर्षों से काम कर रहे हैं, लेकिन कई जगह उनकी स्थिति कमजोर हो गई है. सरकार ने इन्हें दोबारा मजबूत करने के लिए भी पैसा रखने का प्रस्ताव किया है. अगर ये संस्थाएं बेहतर काम करेंगी तो किसानों से दूध खरीदने की क्षमता भी बढ़ सकती है.

प्रमाणित बीज और किसान कल्याण योजना को भी बढ़ावा

बजट में प्रमाणित बीजों पर अनुदान योजना के लिए 20 करोड़ रुपये और मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के लिए 2 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि का प्रस्ताव रखा गया है. इसके अलावा प्रयोगात्मक प्रक्षेत्र प्रदर्शन और बीज संवर्धन योजना के लिए 10 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आवश्यकता भी बताई गई है.

किसानों को खाद पर कैसे मिलेगी राहत?

आज खेती में सबसे बड़ी चिंता बढ़ती लागत है. इसी को देखते हुए सरकार ने वर्मी कम्पोस्ट, कम्पोस्ट और जैव उर्वरक रियायती दर पर उपलब्ध कराने के लिए 50 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट का प्रस्ताव रखा है.

इसका मतलब क्या है?

किसानों को कम कीमत पर जैविक खाद मिल सकती है.
रासायनिक खाद पर निर्भरता कुछ हद तक कम हो सकती है.
खेती की लागत घटाने में मदद मिल सकती है.

बीज पर भी मिलेगी मदद

सरकार ने प्रमाणित बीजों पर अनुदान के लिए भी अतिरिक्त राशि का प्रस्ताव रखा है. इसका मतलब है कि किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाले बीज कम कीमत पर उपलब्ध कराने की कोशिश की जाएगी, जिससे फसल बेहतर होने की संभावना बढ़ सकती है.

इस अनुपूरक बजट में सरकार ने खेती और डेयरी, दोनों को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाने का संकेत दिया है. एक तरफ किसानों को बीज और जैव उर्वरक जैसी जरूरी चीजों में मदद देने की बात है, तो दूसरी ओर दूध उत्पादन और डेयरी नेटवर्क को मजबूत करने के लिए नंद बाबा दुग्ध मिशन पर सबसे ज्यादा फोकस दिख रहा है.