Lucknow-Kanpur Expressway: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे एक बार फिर चर्चा में है. उद्घाटन के एक महीने के भीतर ही सड़क की सतह को दोबारा नुकसान पहुंचने का मामला सामने आया है. इसके बाद नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने जांच के आदेश दे दिए हैं.
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इतना ही नहीं, शुरुआती कार्रवाई करते हुए तीन इंजीनियरों को जांच पूरी होने तक डिबार कर दिया गया है. अब डिबार का मतलब क्या है? डिबार का अर्थ है- किसी व्यक्ति को आधिकारिक रूप से कोई काम करने, किसी जगह प्रवेश करने से रोकना या प्रतिबंधित करना.
उद्घाटन के एक महीने बाद फिर सामने आई समस्या
करीब 4,200 करोड़ रुपये की लागत से बने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में किया था. इसके अगले दिन से इस एक्सप्रेसवे पर वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई थी.
शुरू होने के एक महीने के भीतर ही सड़क की सतह पर फिर से नुकसान दिखाई देने के बाद NHAI ने मामले को गंभीरता से लिया है.
कहां आई दिक्कत?
NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर नकुल प्रकाश वर्मा ने बताया कि ताजा तकनीकी समस्या उन्नाव जिले के कोरारी इलाके में एक पुल के एप्रोच एंबैंकमेंट पर सामने आई है. उन्होंने साफ किया कि दिक्कत पुल की संरचना में नहीं, बल्कि उसके एप्रोच हिस्से में है.
उनके मुताबिक, पहले जिस 20 मीटर हिस्से की मरम्मत की गई थी, उसके पास ही दोबारा नुकसान दिखाई दिया. इसी वजह से अब पूरे 220 मीटर लंबे एप्रोच सेक्शन की मरम्मत कराई जा रही है.
ट्रैफिक डायवर्ट, दो दिन में पूरा होगा काम
मरम्मत के चलते कोरारी टोल प्लाजा के पास ट्रैफिक को डायवर्ट कर दिया गया है. NHAI का कहना है कि मरम्मत का काम दो दिनों में पूरा होने की उम्मीद है. इसके बाद इस हिस्से में सामान्य यातायात फिर से शुरू कर दिया जाएगा.
क्या पांच बार धंसी सड़क?
हाल के दिनों में एक्सप्रेसवे पर सड़क धंसने की कई खबरें सामने आई थीं. हालांकि, NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर नकुल प्रकाश वर्मा का कहना है कि इन्हें पांच अलग-अलग घटनाएं कहना सही नहीं होगा. उनके मुताबिक, ज्यादातर नुकसान उसी एप्रोच हिस्से तक सीमित रहा है, जहां पहले भी मरम्मत की गई थी.
जांच समिति करेगी पूरी पड़ताल
NHAI ने पूरे मामले की जांच के लिए एक जांच समिति बनाई है. समिति की रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल शुरुआती कदम के तौर पर दो स्वतंत्र इंजीनियर और निर्माण एजेंसी के एक मेंटेनेंस इंजीनियर को जांच पूरी होने तक डिबार कर दिया गया है.
निर्माण में आधुनिक तकनीक का हुआ था इस्तेमाल
NHAI के अनुसार, एक्सप्रेसवे के निर्माण में ऑटोमेटेड इंटेलिजेंस मशीन-गाइडेड कंस्ट्रक्शन (AIMGC) जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया था, ताकि सड़क की गुणवत्ता और मिट्टी के उचित संपीड़न को सुनिश्चित किया जा सके.
हालांकि, प्राधिकरण का कहना है कि तकनीक निर्माण की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए होती है, लेकिन भविष्य में सड़क को होने वाले हर तरह के नुकसान की पहले से भविष्यवाणी नहीं कर सकती.
अब सभी की नजर जांच समिति की रिपोर्ट पर है. यह रिपोर्ट तय करेगी कि सड़क पर बार-बार सामने आ रही तकनीकी समस्या की असली वजह क्या है और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है.
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