जियाउल हक मर्डर केस: CBI कोर्ट से राजा भैया को क्लीन चिट, 2 मार्च 2013 को बलीपुर गांव में क्या हुआ था?

कुमार अभिषेक

• 11:00 AM • 21 Sep 2026

कुंडा के चर्चित सीओ जियाउल हक हत्याकांड में सीबीआई कोर्ट ने राजा भैया के खिलाफ फाइनल रिपोर्ट स्वीकार कर ली है. जानिए 2 मार्च 2013 को बलीपुर में क्या हुआ था.

Zia Ul Haq Murder Case Update

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उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के कुंडा में साल 2013 में हुए बहुचर्चित सीओ जियाउल हक हत्याकांड का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है. मामले में तत्कालीन कुंडा विधायक और पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की भूमिका को लेकर लंबे समय तक जांच और कानूनी प्रक्रिया चली. अब सीबीआई (CBI) कोर्ट ने इस मामले में दाखिल फाइनल रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए आगे की कार्रवाई की मांग को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. इस फैसले के साथ ही राजा भैया के खिलाफ चल रही कानूनी प्रक्रिया पर फिलहाल विराम लग गया है.

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई थी दोबारा जांच

सीओ जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर (FIR) में राजा भैया समेत कुछ अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था. सीबीआई की शुरुआती जांच के बाद राजा भैया और अन्य के खिलाफ फाइनल रिपोर्ट दाखिल की गई थी. इसके बाद परवीन आजाद ने इस रिपोर्ट पर आपत्ति जताई, जिसके बाद मामला देश की शीर्ष अदालत (सुप्रीम कोर्ट) पहुंचा. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राजा भैया की भूमिका की दोबारा जांच की गई. साल 2023 में दोबारा जांच पूरी करने के बाद सीबीआई ने फिर से फाइनल रिपोर्ट अदालत में दाखिल की थी, जिसे अब स्वीकार कर लिया गया है.

2 मार्च 2013: जानिए बलीपुर गांव में उस दिन क्या हुआ था?

यह पूरा मामला 2 मार्च 2013 का है, जब कुंडा के बलीपुर गांव में तत्कालीन ग्राम प्रधान नन्हे यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस घटना के बाद गांव में भारी तनाव फैल गया और नन्हे यादव के समर्थक बड़ी संख्या में मौके पर जमा हो गए. सूचना मिलने पर पुलिस टीम हालात को काबू करने पहुंची. इसी दौरान नन्हे यादव के भाई सुरेश यादव की भी हत्या कर दी गई, जिससे भीड़ उग्र हो गई और उसने पुलिस टीम पर हमला बोल दिया.

इसी घटनाक्रम के दौरान कुंडा के तत्कालीन सीओ जियाउल हक भीड़ के बीच फंस गए. बाद में उनका शव गांव में बरामद हुआ. एक पुलिस अधिकारी की हत्या के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर गूंजा था और तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार पर गंभीर सवाल उठे थे.

राजा भैया को देना पड़ा था इस्तीफा, 10 आरोपियों को हो चुकी है उम्रकैद

हत्याकांड के बाद बने भारी राजनीतिक दबाव के चलते राजा भैया को अपने मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था, जिसके बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी.

इस मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने अक्टूबर 2024 में 10 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी. सजा पाने वालों में फूलचंद यादव, पवन यादव, मंजीत यादव, घनश्याम सरोज, राम लखन गौतम, छोटेलाल यादव, राम आसरे, पन्नालाल पटेल, शिवराम पासी और जगत बहादुर पटेल उर्फ बुल्ले पटेल शामिल थे.

वहीं, राजा भैया को सीबीआई जांच में पहले ही क्लीन चिट मिल चुकी थी. अब अदालत द्वारा दोबारा जांच की फाइनल रिपोर्ट स्वीकार किए जाने से उनके खिलाफ इस मामले में आगे की कार्रवाई की मांग भी खारिज हो गई है.