यूपी के बाहुबली विधायक राजा भैया की पत्नी की जमीन क्यों हुई जब्त? नैनीताल DM ने बता दी असल वजह

रघुराज प्रताप सिंह की पत्नी भानवी सिंह के नाम सुल्तान गांव में खरीदी गई जमीन पर नियमों के उल्लंघन के आरोप में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है.

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राजा भैया और उनकी पत्नी भानवी सिंह

लीला सिंह बिष्ट

• 04:06 PM • 05 Jun 2026

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Pratapgarh News: उत्तराखंड में लागू कड़े भू-कानून का असर अब देश के बड़े राजनीतिक चेहरों पर भी दिखने लगा है. नैनीताल जिला प्रशासन ने उत्तर प्रदेश के चर्चित और बाहुबली विधायक राजा भैया (Raghuraj Pratap Singh) की पत्नी भानवी सिंह के नाम खरीदी गई जमीन पर कार्रवाई की है. नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर प्रशासन ने इस जमीन को उत्तराखंड सरकार के नाम दर्ज करने का फैसला लिया है.

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क्या है पूरा मामला?

यह मामला नैनीताल जिले की कैंचीधाम तहसील के अंतर्गत आने वाले सुल्तान गांव का है. यहां राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह के नाम पर 20 नाली से ज्यादा जमीन खरीदी गई थी.

यह जमीन कागजों में बागवानी करने के उद्देश्य से ली गई थी. प्रशासनिक जांच में सामने आया कि जिस मकसद से जमीन खरीदी गई थी, वहां वैसी कोई बागवानी गतिविधि या काम नहीं हो रहा था.

डीएम नैनीताल का बड़ा आदेश

नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने जांच रिपोर्ट के आधार पर सख्त एक्शन लेते हुए इस जमीन को राज्य सरकार के खाते में दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए हैं.

उत्तराखंड का नियम क्या कहता है?

प्रशासन के मुताबिक, उत्तराखंड में राज्य से बाहर के लोगों द्वारा खरीदी गई जमीन का इस्तेमाल उसी काम के लिए होना जरूरी है, जिसके लिए सरकार से अनुमति (Permission) ली गई थी. अगर तय शर्तों और नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो सरकार को वह जमीन वापस अपने कब्जे में लेने का पूरा कानूनी अधिकार है.

क्यों चर्चा में है यह कार्रवाई?

उत्तराखंड सरकार पिछले कुछ समय से प्रदेश के भू-कानून को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाए हुए है. खासकर पहाड़ी इलाकों में कृषि, बागवानी और पर्यटन के नाम पर बाहरी लोगों द्वारा खरीदी गई जमीनों की लगातार जांच की जा रही है. राजा भैया जैसे रसूखदार और प्रभावशाली राजनीतिक परिवार पर हुई इस कार्रवाई को सरकार की 'नो टॉलरेंस' नीति के एक बड़े उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है.

जांच में यह साफ हो गया कि संबंधित भूमि पर कोई बागवानी कार्य नहीं किया जा रहा था. नियमों का उल्लंघन होने के कारण वैधानिक (कानूनी) कार्रवाई करते हुए इस भूमि को राज्य सरकार के नाम दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी की गई है.