घोषी उपचुनाव में कौन होगा उम्मीदवार, क्या सपा देगी सुधाकर सिंह के बेटे सुजीत को चांस?

उत्तर प्रदेश की मऊ जिले की घोसी सीट से समाजवादी पार्टी विधायक सुधाकर सिंह के निधन के बाद विधानसभा ने इस सीट को रिक्त घोषित कर दिया है. ऐसे में इस बात की भी चर्चा होने लगी है कि अगर घोषी में उपचुनाव हुए तो दावेदार कौन कौन हो सकता है? फिलहाल जिन नामों की चर्चा है उनमें सपा से सुधाकर सिंह के बेटे अजीत सिंह, बीजेपी से विजय राजभर, सुभासपा से अरविंद राजभर का नाम शामिल है.

Akhilesh yadav and sujeet singh

रजत सिंह

29 Nov 2025 (अपडेटेड: 29 Nov 2025, 09:30 AM)

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उत्तर प्रदेश की मऊ जिले की घोसी सीट से समाजवादी पार्टी विधायक सुधाकर सिंह के निधन के बाद विधानसभा ने इस सीट को रिक्त घोषित कर दिया है. अब घोसी में अगले 6 महीने के बीच उपचुनाव की संभावना है. लेकिन चुनाव आयोग यह तय करेगा कि घोसी में उपचुनाव कब होगा. ऐसे में इस बात की भी चर्चा होने लगी है कि अगर घोषी में उपचुनाव हुए तो दावेदार कौन कौन हो सकता है? फिलहाल जिन नामों की चर्चा है उनमें सपा से सुधाकर सिंह के बेटे अजीत सिंह, बीजेपी से विजय राजभर, सुभासपा से अरविंद राजभर का नाम शामिल है.

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सुधाकर सिंह की मौत के बाद क्या सपा लगाएगी उनके बेटे सुजीत पर दाव

सुधाकर सिंह जो समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता और विधायक थे. उनके निधन के बाद घोषी की विधानसभा सीट अब खाली हो गई है. ऐसे में अब चर्चा है कि सपा की ओर से सुधाकर सिंह के बेटे सुजीत अपनी दावेदारी पेश कर सकते हैं.सुजीत सिंह पहले ब्लॉक प्रमुख रहे हैं.सुधाकर सिंह की मौत पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव अजीत सिंह को गले लगाकर सांत्वना देते हुए नजर आए थे. वहीं कुछ जानकारो का ये भी कहना है कि सुधाकर सिंह की मौत के बाद सुजीत सिंह को सहानुभूति में टिकट मिल सकता है. 

वहीं बात करें बीजेपी की घोसी सीट पर बीजेपी की दावेदारी मजबूत रही है. लेकिन इस सीट पर बीजेपी विजय राजभर को मौका दे सकती है. ऐसे इसलिए क्योंकि साल 2019 में जब इस सीट पर उपचुनाव हुआ था तब विजय राजभर ने ही सुधाकर सिंह को हराया था.  पिछली बार दारा सिंह चौहान के चुनाव लड़ने से वह दावेदारी से चूक गए थे. इस बार उनकी टिकट की चर्चा जोरों पर है. लेकिन बीजेपी की सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और मंत्री ओम प्रकाश राजभर इस सीट से अपने बेटे अरविंद राजभर को मैदान में उतारने के लिए बेताब हैं.वह वर्तमान में सुभासपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और महासचिव हैं. घोसी को राजभर का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है जहां से अरविंद राजभर लोकसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं. हालांकि वह हार गए थे.  ओपी राजभर ने पहले भी उन्हें सदन में पहुंचाने की कोशिश की है. चाहे वह सेवापुरी (विधानसभा) की सीट हो या घोसी (लोकसभा) की सीट.  ओम प्रकाश राजभर की गोटी सेट करने की क्षमता के चलते माना जा रहा है कि यह सीट गठबंधन के खाते में जा सकती है. 

पूर्व सांसद अतुल कुमार राय बसपा से घोसी सांसद रहे हैं. जेल से बाहर आने के बाद से अतुल कुमार राय इलाके में सक्रिय हो गए हैं. उनकी बढ़ती सक्रियता ने कयासों को जन्म दिया है. हालांकि बसपा आमतौर पर उपचुनाव नहीं लड़ती है. लेकिन मायावती के फैसले पर संशय बरकरार है. अगर बसपा उन्हें टिकट नहीं देती है तो अतुल कुमार राय निर्दलीय या पाला बदलकर किसी अन्य पार्टी से चुनाव लड़ सकते हैं.

यह सीट पहले सपा के पास थी. विधायक सुधाकर सिंह की सदस्यता जाने के बाद सपा इस सीट पर अपनी विरासत बचाने के लिए पूरा जोर लगाएगी. विपक्षी इंडिया गठबंधन से कांग्रेस भी जोर आजमाइश कर सकती है. लेकिन चूंकि यह सीट सपा ने जीती थी. इसलिए प्रबल संभावना है कि समाजवादी पार्टी ही इस सीट से उम्मीदवार उतारेगी.

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