अपने ही SHO को गिरफ्तार करवाने वाले IPS विनय तिवारी कौन हैं? इन वजहों से होती है इनकी चर्चा

यूपी तक

22 Aug 2026 (अपडेटेड: 22 Aug 2026, 11:41 AM)

बिहार के गोपालगंज में जादूपुर थाने में अवैध हिरासत और वसूली के मामले का खुलासा हुआ है. एसपी विनय तिवारी की कार्रवाई में तत्कालीन थानाध्यक्ष समेत चार आरोपी गिरफ्तार हुए. जांच में पुलिसकर्मियों और बिचौलिए के बीच सांठगांठ सामने आई.

IPS Vinay Tiwari

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बिहार के गोपालगंज जिले स्थित जादूपुर थाने में बिना किसी एफआईआर, आधिकारिक रिकॉर्ड के लोगों को घंटों अवैध हिरासत में रखने और उनसे पैसे ऐंठने के एक बड़े मामले का भंडाफोड़ हुआ है. मामले की गंभीरता को देखते हुए गोपालगंज के पुलिस अधीक्षक (SP) विनय तिवारी ने त्वरित कार्रवाई की जिसके बाद तत्कालीन थानाध्यक्ष सहित चार लोगों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. बता दें कि विनय तिवारी यूपी के रहने वाले हैं. उनकी गिनती बिहार के तेज-तर्रार अधिकारियों में होता है.

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अवैध हिरासत और वसूली का खेल

14 अगस्त को पुलिस अधीक्षक कार्यालय को गुप्त सूचना मिली कि जादूपुर पुलिस ने गांजा जब्ती की एक कार्रवाई के दौरान पास में ही मौजूद निर्दोष लोगों को पकड़ लिया था. गाय खरीदने-बेचने आए लोगों और एक महिला व उनकी नाबालिग बेटी को बिना किसी लिखापढ़ी के 36 घंटे तक थाने में बिठाकर रखा गया.

राहत देने और केस से नाम हटाने के एवज में बिचौलिए राजू यादव के जरिए पैसे मांगे गए. एक पीड़ित ने रिहाई के लिए 10% ब्याज पर बाजार से पैसे उठाकर दिए जबकि महिला से ₹75000 ऐंठे गए.

जांच में खुली पोल

डीएसपी मुख्यालय के नेतृत्व में हुई जांच में पाया गया कि थानेदार और दलाल के बीच लगातार फोन पर बातचीत हो रही थी जो एक संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करता है.

थानाध्यक्ष समेत 4 गिरफ्तार

डीएसपी की जांच रिपोर्ट आते ही 18 अगस्त को जादूपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष अनिल राम, बिचौलिए राजू यादव और दो चौकीदारों (राकेश कुमार व महंत कुमार यादव) के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. तीनों पुलिसकर्मियों को तुरंत प्रभाव से निलंबित भी कर दिया गया है. एसपी विनय तिवारी ने साफ किया कि जिले में भ्रष्टाचार और अधिकारों के दुरुपयोग पर जीरो टॉलरेंस की नीति लागू रहेगी.

कौन हैं IPS विनय तिवारी?

2015 बैच के आईपीएस अधिकारी विनय तिवारी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं. विनय तिवारी ने आईआईटी बीएचयू से इंजीनियरिंग की है. बिहार कैडर के इस अधिकारी की पहचान एक सख्त और पारदर्शी पुलिस अफसर के रूप में होती है.

पटना के सिटी एसपी रहते हुए वे तब राष्ट्रीय सुर्खियों में आए थे जब सुशांत सिंह राजपूत मामले की जांच के लिए मुंबई जाने पर उन्हें बीएमसी द्वारा क्वारंटाइन कर दिया गया था. बाहुबली नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई, अश्लीलता व डीपफेक रोकने के लिए आर्थिक अपराध इकाई (EOU) में विशेष फॉर्म व्यवस्था की शुरुआत और मनचलों के खिलाफ 'अभया ब्रिगेड' (अब 'पुलिस दीदी') मुहिम चलाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है.

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