Ganga Expressway: यूपी के उन्नाव में मानसून की पहली बारिश ने ही उत्तर प्रदेश सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट गंगा एक्सप्रेसवे की तैयारियों और निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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कानपुर-लखनऊ नेशनल हाईवे को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाली लिंक रोड का एक बड़ा हिस्सा पहली ही बारिश में भरभराकर ढह गया. घटना के बाद से ही इलाके में हड़कंप मचा हुआ है. उन्नाव के सोनिक इलाके में बशीरगंज के पास लिंक रोड का करीब 7 मीटर का हिस्सा धंस गया, क्योंकि सड़क के नीचे की मिट्टी पूरी तरह बह गई थी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी साल 29 अप्रैल को 594 किलोमीटर लंबे इस विशाल एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया था, लेकिन पहली ही बरसात में इसके ढहने की खबर ने सबको चौंका दिया है. इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात सिर्फ सड़क का टूटना नहीं थी, बल्कि इसके बाद जो कुछ ग्राउंड जीरो पर हुआ, उसने प्रशासन की नीयत पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.
'हमने तो पहले ही चेताया था'
सड़क धंसने के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा. ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि सड़क बनाते समय मानकों का ध्यान नहीं रखा गया. ढलान को सुरक्षित रखने और मिट्टी को रोकने के लिए जो इंतजाम होने चाहिए थे, वे सिर्फ कागजों पर दिखे.
स्थानीय निवासियों का कहना है,
"हमने तो कंस्ट्रक्शन के समय ही इसके कमजोर होने की बात उठाई थी, लेकिन हमारी बात को अनसुना कर दिया गया. अब नतीजा सबके सामने है."
पत्रकारों को रोकने की कोशिश
स्थानीय लोगों ने बताया कि जब शुक्रवार शाम को इस बदहाली की तस्वीरें लेने कुछ पत्रकार मौके पर पहुंचे तो वहां मौजूद निर्माण एजेंसी के कर्मचारियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की. कर्मियों ने अजीब दलील दी कि एक्सप्रेसवे पर फोटोग्राफी करने की इजाजत नहीं है. सवाल यह उठता है कि अगर कुछ छिपाने को नहीं था तो कैमरे से इतनी नफरत क्यों?
UPEIDA और प्रशासन का रवैया
सदर एसडीएम क्षितिज द्विवेदी ने इस मामले से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि पूरा प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (UPEIDA) के दायरे में आता है, इसलिए कोई भी जांच या कार्रवाई वही करेंगे. दूसरी तरफ, UPEIDA ने मामले को छोटा दिखाने की कोशिश करते हुए एक बयान जारी किया. UPEIDA के मुताबिक,
"3 जुलाई को रूटीन पेट्रोलिंग के दौरान गंगा एक्सप्रेसवे के इंटरचेंज लूप 3 के बाएं किनारे पर करीब 10 मीटर की एक मामूली दरार देखी गई थी, जिसे तुरंत उसी दिन ठीक कर दिया गया."
सिर्फ लिंक रोड नहीं, मेन हाईवे भी निशाने पर
भले ही अधिकारी इसे मामूली दरार कह रहे हों, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि एक्सप्रेसवे शुरू होने से पहले भी सोनिक सर्विस लेन और मुख्य हाईवे पर सड़क धंसने, मिट्टी बहने और रेलिंग टूटने जैसी समस्याएं आ चुकी हैं. मेरठ से प्रयागराज को जोड़ने वाले इस फ्लैगशिप प्रोजेक्ट का पहली ही बारिश में यह हाल होना वाकई चिंताजनक है.
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