Kanhaiya Lal Video: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें एक शख्स समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के सामने दंड-बैठक यानी पुश-अप्स लगाता नजर आ रहा है. वीडियो में यह शख्स अखिलेश यादव को सपा संरक्षक स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव की एक भारी-भरकम पीतल की प्रतिमा भी भेंट कर रहा है. इस वीडियो को लेकर इंटरनेट पर बहस छिड़ गई है. एक ओर विपक्षी और कुछ सोशल मीडिया यूजर्स इसे टिकट पाने के लिए अंधभक्ति का नाम देकर सपा प्रमुख को घेर रहे हैं. वहीं सपा समर्थक इसे कार्यकर्ता के अपने नेता के प्रति समर्पण और अखिलेश यादव की संवेदनशीलता की मिसाल बता रहे हैं. आइए जानते हैं क्या है इस वायरल वीडियो का पूरा सच और कौन है यह शख्स.
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झांसी के सीताराम यादव उर्फ कन्हैया हैं चर्चा में
सोशल मीडिया पर कौतूहल का विषय बने इस शख्स का नाम सीताराम यादव है जिन्हें इलाके में लोग कन्हैया लाल के नाम से भी जानते हैं. सीताराम यादव उत्तर प्रदेश के झांसी के रहने वाले हैं और पेशे से एक किसान हैं. साल 2023 में अपनी मां से प्रेरणा लेकर उन्होंने राजनीति में कदम रखा था. वे समाजवादी विचारधारा के प्रबल समर्थक हैं और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के विचारों से प्रभावित होकर ही उन्होंने सपा का दामन थामा था. पिछले लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने इंडिया गठबंधन के उम्मीदवारों के लिए जमकर प्रचार किया था.
टिकट की चाह या पहलवान नेताजी को सम्मान?
इस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर दावों का दौर जारी है. 'साहब' नाम के एक पेज ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा 'सिर्फ टिकट के लिए क्या-क्या करना पड़ता है. समाजवादी पार्टी में पार्टी मुखिया खुद को हंटर मास्टर और सामने वाले को जोकर समझता है.'
इसके उलट अखिलेश यादव के समर्थकों और प्रत्यक्षदर्शियों ने इस दावे को सिरे से खारिज किया है. समर्थकों का कहना है कि यह वाकया कोई राजनीतिक गुलामी नहीं बल्कि एक किसान का अपने प्रिय नेता के प्रति आदर भाव था. समर्थकों के मुताबिक, जब सीताराम यादव ने अखिलेश यादव को बताया कि वे किसान हैं और 100 पुश-अप्स लगा सकते हैं, तो अखिलेश यादव ने उनकी खेल भावना का सम्मान करते हुए उन्हें आजमाने की बात कही. लेकिन जैसे ही उन्होंने 5 पुश-अप्स लगाए, अखिलेश यादव ने तुरंत उन्हें सम्मानपूर्वक हाथ पकड़कर उठा लिया और कहा 'हो गया, हो गया.' समर्थकों का कहना है कि यह अखिलेश यादव की दरियादिली और सौम्य स्वभाव को दर्शाता है.
जनवरी 2026 का है वीडियो
इस वीडियो की टाइमिंग को लेकर भी सोशल मीडिया पर भ्रम फैलाया जा रहा था कि यह हाल ही का वीडियो है. लेकिन खुद सीताराम यादव उर्फ कन्हैया ने बातचीत में इसका पूरा सच उजागर किया है. सीताराम यादव ने बताया कि वायरल हो रहा दंड-बैठक वाला वीडियो दरअसल जनवरी 2026 का है, जब वे लखनऊ स्थित सपा दफ्तर में अपनी बेटी की शादी का कार्ड देने अखिलेश यादव के पास पहुंचे थे.
सीताराम यादव ने बताया कि 'उस समय मैं बेटी की शादी का कार्ड देने गया था और साथ में श्रद्धेय मुलायम सिंह यादव जी की करीब ढाई फीट ऊंची और 38 किलो वजनी पीतल की प्रतिमा लेकर गया था। नेताजी धरतीपुत्र होने के साथ-साथ एक बेहतरीन पहलवान भी थे. मैंने अखिलेश जी से कहा कि अगर नेताजी आज जीवित होते तो मैं उन्हें दंडवत प्रणाम करता. चूंकि वे पहलवान थे, इसलिए मैं उनके सम्मान में पुश-अप लगाकर प्रणाम करना चाहता हूं. अखिलेश जी ने मुस्कुराते हुए कहा कि लगाओ-लगाओ. मैंने जैसे ही 4-5 पुश-अप लगाए, उन्होंने बड़े प्यार से मेरा हाथ पकड़कर मुझे उठा लिया.'
सीताराम यादव ने यह भी बताया कि अखिलेश यादव को उनका यह सरल और मेहनती स्वभाव इतना पसंद आया कि उन्होंने शादी में आने का वादा किया और फरवरी 2026 में हुई उनकी बेटी की शादी में शिरकत भी की थी.
1 जुलाई को दोबारा पहुंचे थे लखनऊ
सीताराम यादव ने स्पष्ट किया कि दंड-बैठक वाला वीडियो पुराना है. लेकिन वे हाल ही में 1 जुलाई 2026 को अखिलेश यादव के जन्मदिन के मौके पर भी लखनऊ गए थे. उस समय उन्होंने अलीगढ़ से विशेष रूप से तैयार करवाई गई अखिलेश यादव की तीन फीट की एक साइकिल वाली मूर्ति उन्हें भेंट की थी. कन्हैया के मुताबिक, लाखों की भीड़ में भी अखिलेश यादव ने उन्हें पहचान लिया और पास बुलाकर उनका उपहार स्वीकार किया.
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