75 जिलों में खुलेंगे 150 'मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालय', उत्तर प्रदेश सरकार बच्चों के भविष्य के लिए ₹4,500 करोड़ कर रही निवेश

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05 Jul 2026 (अपडेटेड: 05 Jul 2026, 02:19 PM)

UP Education: उत्तर प्रदेश सरकार राज्य की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और विश्वस्तरीय बनाने के लिए 4,500 करोड़ रुपये की लागत से राज्य के 75 जिलों में नए और अत्याधुनिक 'मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय' स्थापित कर रही है.

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UP Education: उत्तर प्रदेश सरकार राज्य की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और विश्वस्तरीय बनाने के लिए तेजी से काम कर रही है. सरकार लगभग 4,500 करोड़ रुपये की लागत से राज्य के 75 जिलों में नए और अत्याधुनिक मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय स्थापित कर रही है. यह स्कूल राज्य में छात्रों के लिए गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा के उद्देश्य से खोले जा रहे हैं. यह जानकारी शनिवार को उत्तर प्रदेश सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से साझा की है. सरकार का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को एक शानदार पढ़ाई का माहौल देना है. इसके साथ ही उत्तर प्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर पहुंचाना भी है.

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₹4,500 करोड़ से शिक्षा का विकास

उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत और आधुनिक बनाने के लिए लगभग 4,500 करोड़ रुपये की लागत से नए स्कूल खोल रही है. इस बड़ी धनराशि से पूरे प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र का बड़े पैमाने पर विस्तार किया जा रहा है. इस कदम के जरिए सरकार राज्य की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत और नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना चाहती है.

बनेंगे 150 मॉडल कंपोजिट विद्यालय

राज्य के सभी 75 जिलों में कुल 150 'मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय' बनाए जा रहे हैं. इन स्कूलों में छोटे बच्चों की प्री-प्राइमरी कक्षा से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई की पूरी व्यवस्था की जा रही है. यह स्कूल तकनीकी सुविधा से लैस होंगे, जिससे छात्रों को गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा मिल सके.

हर जिले में एक अभ्युदय विद्यालय

मॉडल स्कूलों के साथ ही, प्रदेश के सभी 75 जिलों में एक-एक 'मुख्यमंत्री अभ्युदय कंपोजिट विद्यालय' भी खोला जा रहा है. इन विद्यालयों में बच्चों को प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा 8 तक की बेहतरीन शिक्षा दी जाएगी.

छात्रों को मिलेंगी विश्वस्तरीय सुविधाएं

ये सभी नए स्कूल अत्याधुनिक और विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस होंगे. बच्चों को तकनीक के जरिए पढ़ाने के लिए इनमें स्मार्ट क्लासरूम और डिजिटल लैब बनाई जाएंगी. इसके साथ ही, स्कूलों में एक आधुनिक पुस्तकालय (Library) और विज्ञान व गणित की प्रयोगशालाएं (Lab) भी होंगी. इससे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी.

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