1,2,3,4,5 नहीं पूरे 10 पॉइंट्स… राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद के बीच ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरी ने लिखा लेटर और कर दी बड़ी मांग

संतोष शर्मा

• 06:42 PM • 05 Jul 2026

Govind Dev Giri Maharaj Letter: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देवगिरी महाराज का बड़ा बयान सामने आया है. खुली चिट्ठी में उन्होंने चोरी को महापाप बताया, जांच पर भरोसा जताया और भविष्य में पारदर्शी व अभेद्य व्यवस्था बनाने की मांग की.

Govind Dev Giri Maharaj

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Govind Dev Giri Maharaj Letter: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड ने देश भर के रामभक्तों को झकझोर कर रख दिया है. अब इस मामले में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देवगिरी महाराज का दो पन्नों का आधिकारिक पत्र सामने आया है. रामभक्तों के नाम जारी इस खुली चिट्ठी में उन्होंने मंदिर में हुए इस घपले को अविश्वसनीय अर्थ अपहार और महापाप करार दिया है. गोविंद देवगिरी ने साफ शब्दों में कहा है कि चढ़ावा चोरी का यह खेल पिछले काफी समय से चल रहा था जो कि अत्यंत दुखदायक है. अपने पत्र में उन्होंने खुद पर उठने वाले सवालों का जवाब देने के साथ-साथ चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया और ट्रस्ट के मैनेजमेंट को लेकर कई ऐसी बातें कही हैं जिससे आने वाले दिनों में हलचल और बढ़ सकती है.

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कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देवगिरी महाराज के पत्र की 10 बड़ी बातें

1. पद के लिए कभी नहीं किया प्रयास

कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देवगिरी महाराज ने स्पष्ट किया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र न्यास के न्यासी (Trustee) या कोषाध्यक्ष पद के लिए उन्होंने न तो कभी किसी से निवेदन किया और न ही कोई प्रयास किया. प्रभु श्रीराम की सेवा करना ही उनके लिए परम आनंद की बात है.

2. ट्रस्ट से नहीं लिया यात्रा का एक भी रुपया

गोविंद देवगिरी ने बताया कि वे हर महीने-डेढ़ महीने में न्यास के काम से अयोध्या आते रहते हैं. लेकिन अपने विमान या अन्य किसी भी प्रकार के प्रवास के लिए उन्होंने आज तक ट्रस्ट के कोष से एक भी रुपया व्यय के रूप में स्वीकार नहीं किया है.

3. ऑडिटेड है बैंक का पूरा हिसाब-किताब

कोषाध्यक्ष के दायित्व को लेकर उन्होंने दावा किया कि कोष में जमा की गई राशि का शुरुआत से लेकर अब तक का पूरा ऑडिटेड (लेखा परीक्षित) हिसाब-किताब सुरक्षित है. कोई भी अधिकृत व्यक्ति इसकी कभी भी जांच कर सकता है.

4. पुणे के चार्टर्ड अकाउंटेंट करते हैं जांच

उन्होंने बताया कि वे खुद निरंतर यात्रा पर रहते हैं. इसलिए उनके पुणे कार्यालय के सहयोगी चार्टर्ड अकाउंटेंट हर महीने के अंतिम 4-5 दिन अयोध्या आकर पूरे आय-व्यय की बारीकी से जांच करते हैं और अयोध्या कार्यालय के साथियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हैं.

5. चेक के अलावा कभी नहीं लिया कैश या कोई भेंट

गोविंद देवगिरी ने लिखा कि न्यासी बनने से लेकर अब तक उन्होंने किसी से भी मंदिर के नाम पर कोई कैश या वस्तुरूप भेंट स्वीकार नहीं की. इसके केवल दो अपवाद रहे- पहला उनकी दिवंगत बड़ी बहन द्वारा दिए गए 11000 रुपये और दूसरा श्रीमती नीलम गोरे द्वारा पुणे में दी गई 1 किलो चांदी की ईंट जिनकी रसीदें तुरंत भेज दी गई थीं. इसके अलावा उन्होंने कभी किसी से चेक के सिवाय कुछ ग्रहण नहीं किया.

6. बैंक ट्रांसफर से होते हैं पेमेंट, नहीं है चेकबुक

पत्र में एक बड़ा खुलासा करते हुए उन्होंने बताया कि राम मंदिर की ओर से किए जाने वाले सभी खर्च सीधे बैंक के जरिए ऑनलाइन होते हैं. वे खुद इसके 'अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता' (Authorized Signatory) नहीं हैं. इसलिए वहां उनके हस्ताक्षर नहीं चलते और न ही उनके पास कोई चेकबुक है. पेमेंट कभी भी कैश में नहीं बल्कि डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर से होते हैं.

7. 'चढ़ावा गिनने के क्षेत्र से मेरा कभी कोई संबंध नहीं रहा'

चढ़ावे की चोरी को लेकर उन्होंने सबसे बड़ा बयान देते हुए खुद को इससे अलग बताया. उन्होंने लिखा 'रामभक्तों द्वारा दानपात्र में समर्पित चढ़ावा जहां गिना जाता है उस क्षेत्र से मेरा शुरू से ही कोई संबंध नहीं रहा. मेरा निवास पुणे में है और मैं कथाओं के सिलसिले में प्रवास पर रहता हूं. चढ़ावा गिनना दैनिक कार्य है जिसे शुरुआत से ही स्थानीय न्यासी बंधु (लोकल ट्रस्टी) देखते आ रहे हैं. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ मिलकर बनाई गई इसकी गणना प्रक्रिया मुझे पिछले महीने पहली बार दिखाई गई.'

8. जांच एजेंसी और SIT पर पूरा भरोसा

उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण चोरी कितनी हुई, कब हुई और कैसे हुई, यह पूरी तरह गहन जांच का विषय है. इस महापाप की निष्पक्ष और गहरी जांच होनी चाहिए. उन्हें पुलिस, न्यायालय और एसआईटी पर पूरा भरोसा है कि दोषी बचेंगे नहीं.

9. अपराधी चाहे कितना भी बड़ा हो, पद न देखा जाए

सत्य और मर्यादा का हवाला देते हुए कोषाध्यक्ष ने मांग की है कि जांच एजेंसियां असली दोषियों को जल्द से जल्द पकड़ें. अपराधी चाहे जितना भी बड़ा और रसूखदार क्यों न हो, उसके नाम और पद का विचार किए बिना उसे न्यायालय से सख्त से सख्त सजा दिलवाई जानी चाहिए.

10. भविष्य के लिए 'अभेद्य व्यवस्था' बनाने की मांग

उन्होंने ट्रस्ट के सम्मानित सदस्यों से हाथ जोड़कर प्रार्थना की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए विशेषज्ञों की राय लेकर एक 'अभेद्य प्रबंधन प्रणाली' (Full-proof Management System) तैयार की जाए. दानपात्र में आने वाली राशि की गिनती में पूर्ण पारदर्शिता हो ताकि भक्तों द्वारा दी गई पाई-पाई का हिसाब सुरक्षित रहे.

प्रभु राम की कृपा से छटेंगे संशय के बादल

पत्र के अंत में स्वामी गोविंद देवगिरी ने अटूट विश्वास जताते हुए कहा है कि भगवान श्रीराम की कृपा से बहुत जल्द संशय के बादल छटेंगे और अपराध का अंधकार दूर होगा. सनातन धर्म और राम मंदिर की कीर्ति को धूमिल करने का कोई भी प्रयास सफल नहीं होगा और रामलला का मंदिर पूरे विश्व में एक आदर्श मंदिर बनकर उभरेगा.