Yogi Adityanath news: उत्तर प्रदेश विधानसभा ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 8.08 लाख करोड़ रुपये का बजट पारित कर दिया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे यूपी के विकास और जनकल्याण को समर्पित बजट बताया. उन्होंने कहा कि राज्य में पिछले आठ साल में कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया, फिर भी यूपी लगातार राजस्व अधिशेष बना हुआ है.
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बजट का आकार और खास बातें
- वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने 20 फरवरी को यह बजट पेश किया था.
- बजट का आकार 2016-17 के मुकाबले ढाई गुना बढ़ा है.
- 2024-25 के बजट से 9.8% अधिक का बजट रखा गया है.
- यूपी का बजट देश के किसी भी राज्य के मुकाबले सबसे बड़ा है.
- पिछले पांच साल से यूपी राजस्व अधिशेष राज्य है.
बजट से किसे होगा फायदा?
CM योगी ने कहा कि यह बजट गरीब, किसान, महिला और युवा उत्थान के लिए समर्पित है. उन्होंने बताया कि यूपी में कर अपवंचन रोका गया है, ‘रेवेन्यू लीकेज’ खत्म हुआ है और डिजिटल प्रणाली से पारदर्शिता बढ़ी है. इसी का नतीजा है कि प्रदेश में डीजल और पेट्रोल की कीमतें देश में सबसे कम होने के बावजूद आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है.
बजट का थीम और उद्देश्य
योगी सरकार हर साल एक थीम के साथ बजट पेश करती है:
- 2017-18: किसानों के लिए
- 2018-19: इन्फ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक विकास
- 2019-20: महिला सशक्तिकरण
- 2020-21: युवा और बुनियादी ढांचा
- 2021-22: स्वावलंबन से सशक्तिकरण
- 2022-23: अंत्योदय से आत्मनिर्भरता
- 2023-24: तेज, समावेशी और समग्र विकास
- 2024-25: प्रभु श्रीराम को समर्पित
CM योगी ने कहा कि "वंचित को वरीयता" इस बजट का केंद्रीय विचार है. इससे गरीबों का उत्थान, किसानों की बेहतरी, व्यापारियों के लिए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और महिलाओं के लिए आर्थिक मजबूती का रास्ता खुलेगा.
संस्कृति से होगा आर्थिक विकास
योगी ने कहा कि संस्कृति भी आर्थिक तरक्की में अहम भूमिका निभा सकती है. उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर, वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम और प्रयागराज महाकुंभ का उदाहरण देते हुए कहा कि इनसे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिला है और प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है.
नया टैक्स नहीं, फिर भी बढ़ती अर्थव्यवस्था
मुख्यमंत्री ने कहा कि "बीते 8 साल में हमने कोई नया टैक्स नहीं लगाया". बावजूद इसके यूपी आज राजस्व अधिशेष राज्य बना हुआ है. उन्होंने तुलसीदास की चौपाई "बरसत हरसत सब लखे, करसत लखे न कोय, तुलसी प्रजा सुभाग से, भूप भानु सो होय" का जिक्र करते हुए कहा कि श्री राम जी भरत से कहते हैं कि हमें प्रजा से कर ऐसे लेना चाहिए, जैसे सूर्य लेता है. यानी सरकार को कर ऐसे लेना चाहिए कि जनता को उसका बोझ महसूस न हो.
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