UP और MP को मिली नए हाईवे की सौगात, अब 2 घंटे का खतरनाक रास्ता महज 40 मिनट में होगा पूरा; इन जिलों की चमकी किस्मत

आयशा शेख़

05 Jun 2026 (अपडेटेड: 05 Jun 2026, 07:56 PM)

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाले NH-934 के मोहारी-सतई घाट मार्ग को आधुनिक फोर-लेन हाईवे में विकसित कर रहा है. करीब 39 किमी लंबे इस प्रोजेक्ट से यात्रा समय 2 घंटे से घटकर 40 मिनट रह जाएगा.

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UP-MP को मिली नए हाईवे की सौगात

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UP Highway: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाले NH-934 के मोहारी-सतई घाट खंड को आधुनिक 39 किलोमीटर लंबे फोर-लेन राष्ट्रीय राजमार्ग में बदल रहा है. यह मार्ग भोपाल-कानपुर कॉरिडोर का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो एमपी के सागर और छतरपुर को यूपी के कबराई से जोड़ता है.

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समय की भारी बचत

पहले इस 40 किलोमीटर के दुर्गम रास्ते को पार करने में डेढ़ से 2 घंटे का समय लग जाता था. इस आधुनिक हाईवे के बनने के बाद यह दूरी महज 40 मिनट में पूरी हो जाएगी.

यह हाईवे बुंदेलखंड की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा और दोनों राज्यों (मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश) के बीच आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा. NHAI का लक्ष्य है कि पूरा भोपाल-कानपुर कॉरिडोर जल्द पूरा हो जाए. बुंदेलखंड के लोग अब बेहतर सड़क, कम समय और सुरक्षित यात्रा का फायदा उठा सकेंगे.

इंफ्रास्ट्रक्चर की पूरी डिटेल

करीब 38 से 39 किलोमीटर लंबे मुख्य मार्ग को फोर-लेन में बदला गया है. स्थानीय यातायात के लिए लगभग 26 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड का निर्माण होगा. 17 किलोमीटर पुरानी (मौजूदा) सड़क को मजबूत बनाया जा रहा है. ट्रक ले-बाय (Truck Lay-by), 19 बस शेल्टर और सुरक्षित आवागमन के लिए 22 जंक्शन विकसित किए जा रहे हैं.

आधुनिक इंजीनियरिंग का कमाल

पहाड़ों के बीच इस चुनौती भरे रास्ते को सुगम बनाने के लिए अत्याधुनिक इंजीनियरिंग का इस्तेमाल किया गया है. इसमें 3 मेजर ब्रिज, 11 माइनर ब्रिज, 8 व्हीकुलर अंडरपास, 4 लाइट व्हीकुलर अंडरपास और 1 ओवरपास का निर्माण शामिल है.

वन्यजीवों का खास ख्याल

चूंकि यह हाईवे गहरे जंगलों से होकर गुजरता है, इसलिए वन विभाग की मांग पर वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए 7 एनिमल अंडरपास बनाए गए हैं. इससे जंगल के जानवर बिना किसी खतरे के सड़क के आर-पार जा सकेंगे.

पर्यावरण के अनुकूल और पैसों की बचत 

रिटेनिंग वॉल बनाने के लिए महंगे स्टील और आरसीसी (RCC) की जगह स्थानीय पत्थरों (केबिन वॉल) का इस्तेमाल किया गया है, जिससे कीमती धातुओं की बचत हुई.

सड़क निर्माण में 'जियो ग्रिड' तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे कोलतार (बिटुमिन) और गिट्टी की मोटाई कम रखनी पड़ी और प्रोजेक्ट की लागत में बड़ी सेविंग हुई.

स्थानीय लोगों को क्या होगा फायदा?

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच माल को लाना-ले जाना आसान होगा. सप्लाई चेन मजबूत होगी और व्यापार बढ़ेगा. देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए विश्व प्रसिद्ध खजुराहो और पन्ना नेशनल पार्क तक पहुंचना अब बेहद आसान हो जाएगा, जिससे स्थानीय रोजगार बढ़ेगा.

शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए अब बड़े शहरों तक पहुंच आसान होगी, जिससे बुंदेलखंड के लोगों का जीवन स्तर सुधरेगा.