CJI Surya Kant Statement: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हंगामा करने और मुख्य न्यायाधीश (CJI) के लिए कथित तौर पर अपशब्द कहने वाले प्रबल प्रताप यादव के मामले पर अब पहली बार चीफ जस्टिस सूर्यकांत की प्रतिक्रिया सामने आई है. उन्होंने इस घटना पर संयमित टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं से संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा प्रभावित होती है. उन्होंने लोगों से संस्थाओं का सम्मान बनाए रखने की अपील की. इस बीच, सुप्रीम कोर्ट में हुई घटना को लेकर कानूनी और सामाजिक स्तर पर चर्चा जारी है.
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क्या बोले चीफ जस्टिस सूर्यकांत?
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, 'ऐसे कई बच्चे कई बार कर देते हैं. मैं उस पर कोई ऐसा नहीं करना चाहता हूं. मैं सिर्फ एक ही बात सभी को बोलना चाहूंगा कि संवैधानिक संस्थाओं की मर्यादा और उनका मान-सम्मान रखना हम सबका दायित्व है और हम सबको उसे निभाना चाहिए.' उनका यह बयान उस घटना के बाद आया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के दौरान प्रबल प्रताप यादव ने कथित तौर पर हंगामा किया था.
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ था?
यह घटना उस समय हुई, जब सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक की पीठ एक मामले की सुनवाई कर रही थी. इसी दौरान काला कोट पहनकर पहुंचे प्रबल प्रताप यादव ने जजों को 'मिस्टर ज्यूडिशियल सर्वेंट' कहकर संबोधित किया. बताया गया कि उसने अदालत से कहा कि वह लखनऊ के विकासनगर एसीपी के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज करने का आदेश दे. जब पीठ ने पूछा कि क्या वह अदालत को आदेश दे रहा है, तो उसने जवाब दिया कि बाकी सारी बातें उसके दस्तावेजों में लिखी हैं. इसके बाद उसने अपने साथ लाए करीब 185 पन्नों के दस्तावेज कोर्ट रूम में उछाल दिए और कथित तौर पर CJI के लिए अपशब्द कहे. इसके बाद मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने उसे कोर्ट रूम से बाहर ले जाकर रोक लिया.
कौन है प्रबल प्रताप यादव?
जानकारी के अनुसार, इस घटना को अंजाम देने वाले व्यक्ति का नाम प्रबल प्रताप यादव है. वह उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के भरथना का रहने वाला बताया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक वह पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर था और लखनऊ के विकासनगर स्थित एक कंपनी में काम करता था. घटना के बाद उसका नाम सोशल मीडिया और कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है.
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