Ballia News: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से सामने आई एक घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. गायघाट गांव के रहने वाले दलित व्यक्ति कामजी गोंड की मौत के बाद उनके परिवार ने पुलिस पर थाने में पिटाई का आरोप लगाया है. परिजनों का दावा है कि पूछताछ के लिए ले जाने के बाद पुलिसकर्मियों ने मारपीट की, जिससे उनकी हालत बिगड़ गई और इलाज के दौरान मौत हो गई. वहीं पुलिस ने इन आरोपों से इनकार करते हुए निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए दो पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है और एक उपनिरीक्षक, एक सिपाही, ग्राम प्रधान समेत छह लोगों के खिलाफ हत्या सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है.
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क्या है पूरा मामला?
मामला बलिया जिले के रेवती थाना क्षेत्र के गायघाट गांव का है. परिजनों के अनुसार, 7 जुलाई को गांव के कुछ बच्चों के बीच कहासुनी हुई थी. अगले दिन पुलिस कामजी गोंड को पूछताछ के लिए थाने ले गई.
परिवार का आरोप है कि थाने में कामजी गोंड के साथ मारपीट की गई. इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई. परिजनों का कहना है कि पुलिस ने उन्हें गांव के प्रधान लालू सिंह के सुपुर्द कर दिया, जिन्होंने उन्हें एक मठिया के पास छोड़ दिया. बाद में गांव के बच्चों ने उन्हें घायल अवस्था में देखा और परिवार को सूचना दी.
इलाज के दौरान हुई मौत
परिजन कामजी गोंड को पहले रेवती, फिर बलिया जिला अस्पताल ले गए. हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उन्हें वारासी णके बीएचयू ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. मौत की खबर गांव पहुंचते ही लोगों में भारी आक्रोश फैल गया.
शव रखकर किया सड़क जाम
कामजी गोंड का शव गांव पहुंचने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिजन सड़क पर उतर आए. लोगों ने बलिया-रेवती मार्ग पर शव रखकर जाम लगा दिया और पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों के खिलाफ हत्या की कार्रवाई और सख्त सजा की मांग की. देर रात तक प्रदर्शन जारी रहा, जिससे इलाके में तनाव की स्थिति बनी रही.
परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
मृतक के बेटे ने आरोप लगाया कि पुलिस उनके पिता को घर से पूछताछ के नाम पर ले गई थी. उनका कहना है कि थाने में मारपीट की गई और बाद में गंभीर हालत में छोड़ दिया गया. परिवार ने आरोप लगाया कि गांव के प्रधान और पुलिसकर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध है. परिजनों का यह भी दावा है कि उन्हें धमकियां दी गईं और पूरे मामले को दबाने की कोशिश की गई.
पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
पीड़ित परिवार की तहरीर के आधार पर पुलिस ने रेवती थाने के एक उपनिरीक्षक, एक सिपाही, ग्राम प्रधान लालू सिंह समेत छह लोगों के खिलाफ हत्या सहित अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज की है. आजमगढ़ रेंज के डीआईजी ने बताया कि प्रथम दृष्टया लापरवाही सामने आने पर संबंधित उपनिरीक्षक और एक कांस्टेबल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. साथ ही पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच कराने की सिफारिश भी की गई है.
पुलिस का क्या कहना है?
पुलिस के अनुसार, 7 जुलाई को दो युवकों के बीच विवाद की सूचना मिलने पर पूछताछ के लिए संबंधित पक्षों को बुलाया गया था. कामजी गोंड से बातचीत के बाद उन्हें गांव के लोगों की सुपुर्दगी में भेज दिया गया था. पुलिस का कहना है कि बाद में उनकी तबीयत बिगड़ने और मौत की सूचना मिली. परिजनों की शिकायत पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच की जा रही है.
अब जांच पर टिकी हैं सभी की निगाहें
इस मामले ने पुलिस हिरासत में सुरक्षा, जवाबदेही और कानून व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. एक ओर परिवार पुलिस पिटाई को मौत की वजह बता रहा है, तो दूसरी ओर पुलिस निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दे रही है. अब यह साफ होगा कि कामजी गोंड की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसका जवाब पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल साक्ष्य और जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही सामने आएगा.
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