यूपी के इन 6 जिलों को मिलेगा गंगा और घाघरा नदी का पानी, सरकार ने सरफेस वॉटर ग्रिड परियोजना को दी मंजूरी

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13 Jul 2026 (अपडेटेड: 13 Jul 2026, 02:54 PM)

Surface Water Grid Project: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य राजधानी क्षेत्र (SCR) के लिए सरफेस वाटर ग्रिड परियोजना को मंजूरी दे दी है. सरकार ने यह कदम भविष्य में बढ़ने वाली जरूरतों को देखकर उठाया है. इस परियोजना के तहत भविष्य में SCR क्षेत्र के 6 जिलों तक पानी पहुंचाया जाएगा.

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Surface Water Grid Project: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य राजधानी क्षेत्र (SCR) के लिए सरफेस वॉटर ग्रिड परियोजना को मंजूरी दे दी है. सरकार ने यह कदम भविष्य में बढ़ने वाली जरूरतों को देखकर उठाया है. इस योजना के तहत गंगा और घाघरा नदी का पानी पाइपलाइन के जरिए लखनऊ, उन्नाव, बाराबंकी, रायबरेली, सीतापुर और हरदोई तक पहुंचाया जाएगा.

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इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य SCR क्षेत्र में बढ़ने वाली पानी की आपूर्ति को सिर्फ भूजल से निर्भरता को कम करना है. इसके लिए सरकार जल स्रोतों के अन्य माध्यम से टिकाऊ पेयजल की व्यवस्था को विकसित कर रही है. जिसके तहत सरकार गंगा और घाघरा नदी पर वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने वाली है. इस कदम से SCR क्षेत्र के छह जिलों के लोगों को भविष्य में पानी की कोई कमी नहीं होगी.

भूजल पर निर्भरता कम होगी

यूपी राज्य राजधानी क्षेत्र में लगातार आबादी और नए उद्योग बढ़ रहे हैं. एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य जमीन के पानी (भूजल) पर निर्भरता को कम करना है. अभी इस क्षेत्र में लगभग 80 प्रतिशत पानी जमीन के नीचे से ही लिया जाता है. भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए अब नदियों के पानी से एक अच्छी और टिकाऊ पेयजल व्यवस्था बनाई जाएगी.

पहले चरण में बिछेगी पाइपलाइन

इस परियोजना के पहले चरण में बाराबंकी, लखनऊ और उन्नाव को जोड़ने के लिए लगभग 120 से 130 किलोमीटर लंबी बड़ी पाइपलाइन बिछाई जाएगी. बाराबंकी में घाघरा नदी और उन्नाव में गंगा नदी से पानी लिया जाएगा. पहले चरण में 1500 एमएलडी क्षमता के बड़े वाटर इंटेक और वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएंगे. इसके साथ ही कई जगहों पर 200, 300 और 500 एमएलडी क्षमता के आधुनिक संयंत्र भी लगाए जाएंगे. जिससे नदी के पानी को पूरी तरह शुद्ध करके शहरों, कस्बों और गांवों तक भेजा जाएगा.

दूसरे चरण में बनेगा क्षेत्रीय जल रिंग नेटवर्क

योजना के दूसरे चरण में छह जिलों को जोड़ने वाला एक बड़ा क्षेत्रीय सर्कुलर ग्रिड बनाया जाएगा. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इसमें पानी सप्लाई के लिए बैकअप की सुविधा मिलेगी. अगर किसी एक मार्ग में कोई तकनीकी खराबी आती है या पानी रुकता है, तो दूसरे रास्ते से पानी की सप्लाई लगातार चालू रखी जा सकेगी.

भविष्य की जरूरतों का रखा ध्यान

जानकारी के मुताबिक साल 2026 में पूरे SCR क्षेत्र की कुल पानी की मांग 2663 एमएलडी आंकी गई है, जिसमें से ज्यादातर पानी अभी जमीन से मिल रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से हो रहे विकास, बढ़ता आबादी और नए निर्माण के कारण 2051 तक यह मांग 4100 एमएलडी तक पहुंच सकती है. इसी बात को ध्यान में रखते हुए, इस परियोजना की क्षमता को भविष्य में 1500 एमएलडी से बढ़ाकर 2700 एमएलडी तक करने की तैयारी की गई है.

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