UP News: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश में कृषि और जल संरक्षण को नई दिशा देने के लिए एक बड़ी पहल करने जा रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग गोरखपुर और संतकबीर नगर जिलों में 'माइक्रो इरिगेशन' (सूक्ष्म सिंचाई) की 6 पायलट परियोजनाओं पर काम कर रहा है. केंद्र सरकार की 'मॉडर्नाइजेशन ऑफ कमांड एरिया डेवलपमेंट एंड वाटर मैनेजमेंट' (MCADWM) परियोजना के तहत इन प्रोजेक्ट्स को अमली जामा पहनाया जा रहा है.
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क्या है यह तकनीक और कैसे होगा फायदा?
इन परियोजनाओं में PPIN (प्रेशराइज्ड पाइप्ड इरिगेशन नेटवर्क) तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पानी को सीधे जलस्रोत (नदियों/जलाशयों) से पाइप के जरिए किसानों के खेतों तक पहुंचाएगी. इससे परंपरागत सिंचाई के मुकाबले पानी की बर्बादी न्यूनतम होगी. जल उपयोग की दक्षता में लगभग 75 प्रतिशत तक की वृद्धि होगी. किसानों को डीजल या बिजली पर कम खर्च करना होगा और कम पानी में अधिक फसल पैदा होगी.
किन इलाकों को मिलेगा लाभ?
सिंचाई विभाग द्वारा तैयार की जा रही इन 6 परियोजनाओं का कुल कमांड एरिया 2149 हेक्टेयर है. इसके तहत निम्नलिखित क्लस्टर शामिल हैं-
गोरखपुर जिला: बांसगांव, मलांव, मझगवां, राजधनी, बरगदवां और जंगल गौरी-1. ये परियोजनाएं राप्ती नदी और रामगढ़ ताल क्षेत्र में विकसित की जा रही हैं.
संतकबीर नगर जिला: प्रजापतिपुर क्लस्टर, जो कुवानो नदी क्षेत्र में स्थित है.
फरवरी 2026 तक शुरू होगा संचालन
इनमें से चार परियोजनाओं की विस्तृत रिपोर्ट (DDR) तैयार हो चुकी है, जबकि शेष दो पर काम चल रहा है. लक्ष्य यह है कि फरवरी 2026 के अंत तक सभी क्लस्टरों में सिंचाई का काम शुरू हो जाए. इससे रबी और खरीफ, दोनों ही फसलों के समय किसानों को भरपूर और सस्ता पानी मिल सकेगा.
'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' का लक्ष्य
इन परियोजनाओं के संचालन और रखरखाव के लिए हर क्लस्टर में 'वाटर यूजर सोसाइटी' का गठन किया जाएगा. यानी किसान स्वयं इस नेटवर्क की देखरेख करेंगे. सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' (हर बूंद से अधिक फसल) की अवधारणा को सच करना है. सिंचाई नेटवर्क बिछाने के साथ-साथ सरकार किसानों को आधुनिक सिंचाई यंत्र जैसे ड्रिप इरिगेशन (टपक सिंचाई) और स्प्रिंकलर (फव्वारा सिंचाई) के लिए भी वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करेगी. इन छह पायलट प्रोजेक्ट्स की सफलता के बाद उत्तर प्रदेश सरकार इस मॉडल को पूरे प्रदेश के अन्य जनपदों में भी लागू करेगी. यह कदम न केवल गिरते भूजल स्तर को रोकने में मददगार साबित होगा, बल्कि उत्तर प्रदेश को सतत कृषि के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाएगा.
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