UP में बुल्डोजर की कार्रवाई पर SC ने रोक लगाने से किया इनकार, 10 अगस्त को अगली सुनवाई

उत्तर प्रदेश में बुल्डोजर की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग वाली जमीयत उलेमा ए हिंद की याचिका पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई…

संजय शर्मा

• 08:35 AM • 13 Jul 2022

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उत्तर प्रदेश में बुल्डोजर की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग वाली जमीयत उलेमा ए हिंद की याचिका पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद आदालत ने इसपर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि अधिकारियों को कार्रवाई करने से रोकने के लिए सर्वव्यापी आदेश पारित नहीं कर सकता. इससे स्थानीय निकायों यानी नगर निकायों के अधिकारों में कटौती हो जाएगी. अदालत मामले में अगली सुनवाई 10 अगस्त को करेगी.

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बुधवार को जमीयत उलेमा ए हिंद की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच में सुनवाई हुई. वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे प्रयागराज और कानपुर प्रशासन की तरफ से पेश हुए. एसजी तुषार मेहता यूपी सरकार की तरफ से पेश हुए. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील दुष्यंत दवे ने मांग करते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए. सर्वोच्च अदालत ने राज्यों में विध्वंस रोकने के लिए अंतरिम निर्देश पारित करने से इनकार कर दिया.

आपको बता दें कि यूपी सरकार के जवाब में कहा गया उत्तर प्रदेश में कानून के मुताबिक कार्रवाई की गई है. जिन लोगों ने अवैध अतिक्रमण किया है, सरकार ने उन्हीं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की है. वहीं, यूपी सरकार ने इस बात से इनकार किया है कि सहारनपुर में अवैध अतिक्रमण हटाने के दौरान किसी नाबालिग बच्चे को हिरासत में लिया गया था.

सरकार के मुताबिक, प्रयागराज के अवैध अतिक्रमण का मामला हाईकोर्ट में लंबित है, इसे सुप्रीम कोर्ट में लाने की जरूरत नहीं है. जवाब में आगे कहा गया कि कानपुर के ध्वस्तीकरण मामले की याचिका में खुद ही मान लिया गया है कि निर्माण अवैध था. सरकार ने कहा है कि जमीयत कोर्ट को गुमराह करना चाह रही है, लिहाजा इस याचिका को सुनवाई योग्य न मानते हुए खारिज किया जाए.

पिक एंड चूज पॉलिसी अपनाई जा रही- दवे

याचिकाकर्ता के वकील दुष्यंत दवे ने अदालत में कहा कि पिक एंड चूज पॉलिसी अपनाई जा रही है. एक समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है. एसजी तुषार मेहता ने आपत्ति जाहिर की और कहा कि सभी भारतीय समुदाय हैं. आप इस तरह के बहस नहीं कर सकते. दवे ने कहा कि आप देखें कि दिल्ली में सभी फार्म हाउस लगभग अवैध हैं, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है. दवे ने कहा कि आप रोक का आदेश दें. कोर्ट ने कहा की इस तरह का आदेश कैसे दे सकते हैं?

जमीयत ने अपनी अर्जी में क्या कहा था?

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने अपनी अर्जी में कहा था कि उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना यूपी सरकार कोई करवाई न करे. जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई है कि कोर्ट राज्य सरकारों को निर्देश दे कि बिना प्रक्रिया के मनमाने ढंग से ध्वस्तीकरण बंद करे. जिन अधिकारियों ने अवैध निर्माण के नाम पर बुल्डोजर चलाए हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई कर दंडित किया जाए. इन अधिकारियों ने कानून के राज के खिलाफ जाकर मनमानी की है. उत्तर प्रदेश सरकार के बनाए म्युनिसिपल लॉ की अवहेलना की है.

अगली सुनवाई 10 अगस्त को

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो 10 अगस्त को मामले की सुनवाई करेंगे. 8 अगस्त तक सभी पक्ष अपना जवाब दाखिल कर सकते हैं. कोर्ट ने मध्यप्रदेश और गुजरात सरकार को भी नोटिस जारी किया.