UP News: अभी हालिया दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एआई समिट के दौरान यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन के मामले में शामिल उत्तरप्रदेश के अमेठी के सौरभ सिंह की तलाश तेज हो गई है. एसटीएफ, दिल्ली पुलिस और जनपद पुलिस की संयुक्त टीम ने अमेठी पहुंचकर सौरभ सिंह के घर दबिश दी. परिवार के मुताबिक, सौरभ सिंह 14 तारीख को घर से लखनऊ जाने की बात कहकर निकला थी, जिसके बाद से उसका कोई स्पष्ट पता नहीं चल सका है. परिजनों ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से न्याय की मांग को लेकर गुहार लगाई है.
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सौरभ सिंह के बारे में जानिए
जिले के मुंशीगंज थाना के सेवई हेमगढ़ का रहने वाला सौरभ सिंह NSUI में उपाध्यक्ष के पद पर है और कांग्रेस पार्टी का सक्रिय कार्यकर्ता है. बीते दिनों सौरभ ने अपनी टीम के साथ AI समिट के दौरान टीशर्ट निकालकर प्रदर्शन किया था. घटना के बाद सौरभ के साथी गिरफ्तार हो गए थे. लेकिन वह मौके से फरार हो गया था. बताया जा रहा है कि पुलिस टीम ने सौरभ के घर पर पहुंचकर परिजनों से उसके बारे में जानकारी ली और उसे बुलाने के लिए दबाव बनाया. परिजनों के अनुसार, सौरभ के पिता और चाचा को पूछताछ के लिए साथ ले जाया गया था, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया.
ये है सौरभ के परिवार का आरोप
सौरभ के परिवार का आरोप है कि लगातार पुलिस के घर आने से उन्हें मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे वे अपना सामान्य काम भी नहीं कर पा रहे हैं. परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि एक रात पुलिस टीम पीछे के दरवाजे से घर में दाखिल हुई और तलाशी ली. हालांकि तलाशी के दौरान पुलिस को कुछ भी बरामद नहीं हुआ और टीम खाली हाथ लौट गई.
परिवार के मुताबिक, सौरभ सिंह 14 तारीख को घर से लखनऊ जाने की बात कहकर निकला थी जिसके बाद से उसका कोई स्पष्ट पता नहीं चल सका है. परिजनों ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से न्याय की मांग को लेकर गुहार लगाई है.
सौरभ की दादी ने ये बताया
सौरभ की दादी उर्मिला ने बताया कि 'हम परसो रात बाहर लेटे थे. पुलिस आई. गेट खोलने के लिए कई बार मारा नहीं खुला, जिसके बाद पीछे से पुलिस घुस गई. जांचने लगी. मेरे दोनों लड़के को लेकर चली गई. लेकिन हम लोगों सौरभ के बारे में कोई जानकारी नहीं है.'
वहीं, यूथ कांग्रेस के जिलाध्यक्ष्य शुभम सिंह ने बताया कि हमारे संगठन के कार्यकर्ता के घर पर लगातार एसटीएफ, पुलिस जाकर दबाव बना रही है जो बिल्कुल गलत है. ये पूरी तरह से तानाशाही है. प्रदेश सरकार से निवेदन कर रहा हूं ऐसा न किया जाए. घटना के सिलसिले में यूपी Tak को फोन पर सीओ अखिलेश वर्मा ने बताया उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं है.
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