राम मंदिर ट्रस्ट का पूरा सिस्टम समझिए, कौन चुनता है अध्यक्ष और कैसे हट सकता है ट्रस्टी

आशीष श्रीवास्तव

• 04:02 PM • 08 Jul 2026

Ram Mandir Trust Deed Explained: राम मंदिर ट्रस्ट डीड के सामने आए दस्तावेजों में अध्यक्ष की नियुक्ति, ट्रस्टियों के अधिकार, हटाने की प्रक्रिया और ट्रस्ट के उद्देश्यों से जुड़े अहम नियम जानिए.

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Ram Mandir Trust Deed Explained: राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर इन दिनों कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं. इसी बीच ट्रस्ट डीड के कुछ पन्ने सामने आए हैं, जिनमें ट्रस्ट के संचालन, पदाधिकारियों की नियुक्ति, ट्रस्टियों के अधिकार, उन्हें हटाने की प्रक्रिया और ट्रस्ट के उद्देश्यों से जुड़े कई अहम नियम लिखे हैं. दस्तावेज के अनुसार ट्रस्ट के भीतर हर पद और हर फैसले के लिए पहले से स्पष्ट व्यवस्था बनाई गई है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इन दस्तावेजों में क्या लिखा है.

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ट्रस्ट का अध्यक्ष कैसे चुना जाता है?

दस्तावेज के मुताबिक ट्रस्ट का अध्यक्ष (President-Managing Trustee) ट्रस्ट के ट्रस्टियों में से ही चुना जाएगा. अध्यक्ष ट्रस्ट की बैठकों की अध्यक्षता करेगा और जहां भी वह मौजूद रहेगा, बैठक का संचालन उसी के हाथ में होगा.

महासचिव और कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी

ट्रस्ट के ट्रस्टी अपने बीच से एक महासचिव (General Secretary) नियुक्त करेंगे. महासचिव की जिम्मेदारी बैठक बुलाने, कार्यवाही का रिकॉर्ड रखने और ट्रस्ट के दस्तावेजों का रखरखाव करने की होगी.

इसी तरह ट्रस्ट अपने बीच से एक कोषाध्यक्ष (Treasurer) भी नियुक्त करेगा. कोषाध्यक्ष ट्रस्ट के पैसों का हिसाब-किताब रखेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि खर्च तय बजट और ट्रस्ट के निर्णयों के अनुसार ही हो.

जरूरत पड़ने पर ट्रस्ट अन्य पदाधिकारी भी नियुक्त कर सकता है.

ट्रस्ट का उद्देश्य क्या है?

ट्रस्ट डीड में लिखा है कि ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य अयोध्या में भगवान श्रीराम के जन्मस्थान पर भव्य राम मंदिर का निर्माण और उसका रखरखाव करना है.

इसके अलावा श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग, धर्मशाला, संग्रहालय, गौशाला, रसोई, प्रदर्शनी, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य सुविधाएं विकसित करना भी ट्रस्ट के उद्देश्यों में शामिल है.

दस्तावेज में यह भी लिखा गया है कि ट्रस्ट दान, उपहार या अन्य माध्यमों से चल-अचल संपत्ति प्राप्त कर सकता है और कानून के अनुसार उसका प्रबंधन कर सकता है.

ट्रस्ट अपने नियम बदल सकता है

दस्तावेज के अनुसार ट्रस्ट का बोर्ड समय-समय पर ट्रस्ट डीड के कुछ प्रावधानों में संशोधन कर सकता है. हालांकि यह बदलाव ट्रस्ट के मूल उद्देश्य, सुप्रीम कोर्ट के फैसले और लागू कानूनों के खिलाफ नहीं हो सकते.

क्या ट्रस्टी हटाए जा सकते हैं?

दस्तावेज में ट्रस्टियों को हटाने की प्रक्रिया भी तय की गई है.

  • शुरुआती ट्रस्टी जीवनभर अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे.
  • कोई ट्रस्टी इस्तीफा देना चाहे तो उसे एक महीने पहले लिखित सूचना देनी होगी.
  • अगर कोई ट्रस्टी ट्रस्ट के हितों के खिलाफ काम करता है तो उसे दो-तिहाई बहुमत से हटाया जा सकता है.
  • लेकिन किसी भी ट्रस्टी को हटाने से पहले उसे कारण बताओ नोटिस देना होगा और अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर भी दिया जाएगा.

ट्रस्ट के फैसले कैसे होंगे?

दस्तावेज के मुताबिक ट्रस्ट के कई फैसले बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की बैठक में लिए जाएंगे. अध्यक्ष, महासचिव और कोषाध्यक्ष समेत अन्य पदाधिकारी भी ट्रस्टियों में से ही चुने जाएंगे और उन्हें बोर्ड की ओर से अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी सौंपी जा सकती हैं.

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