उत्तर प्रदेश के किसानों और पशुपालकों को आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए लखनऊ में हुई कैबिनेट बैठक में सरकार ने 'मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन और पशुधन बीमा योजना' को मंजूरी दे दी है. इस योजना का सीधा मकसद ग्रामीण इलाकों में डेयरी चलाने वाले और छोटे किसानों को एक मजबूत सुरक्षा कवच देना है.
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पशुधन और डेयरी विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया कि इस योजना के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 60 करोड़ रुपये का बजट पास किया गया है, जिससे राज्य के करीब 2,28,350 दुधारू और अन्य पशुओं का बीमा किया जाएगा. इस योजना की सबसे हैरान करने वाली बात इसका प्रीमियम है, जहां पशुपालकों को अपनी जेब से नाममात्र का पैसा देना होगा.
सरकार कितना बोझ खुद उठा रही है और क्लेम के पैसे सीधे आपके खाते में कैसे आएंगे?आइए समझते हैं इस नई योजना की पूरी एबीसीडी, जो यूपी के ग्रामीण जनजीवन को पूरी तरह बदलने वाली है.
प्रीमियम का 85% खर्च उठाएगी सरकार
अक्सर किसान पैसों की कमी के चलते अपने मवेशियों का बीमा नहीं करा पाते थे, लेकिन योगी सरकार ने इस मुश्किल को आसान कर दिया है. अब बीमा के प्रीमियम का 85 फीसदी हिस्सा सरकार खुद भरेगी. इसमें 51 प्रतिशत केंद्र सरकार और 34 प्रतिशत राज्य सरकार का हिस्सा होगा. पशुपालक को अपनी जेब से सिर्फ 15 प्रतिशत प्रीमियम देना होगा. यह ऐसी राहत है जिसकी उम्मीद यूपी का किसान लंबे समय से कर रहा था.
पशु की मौत या अपाहिज होने पर मिलेगा बड़ा क्लेम
योजना छोटे, सीमांत और भूमिहीन किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. यदि किसी महामारी, प्राकृतिक आपदा या हादसे में पशु की मौत हो जाती है, तो बीमा का पूरा पैसा मिलेगा.
यही नहीं, अगर कोई पशु किसी वजह से हमेशा के लिए अपाहिज हो जाता है और काम करने के लायक नहीं रहता, तब भी बीमा कंपनी कुल बीमा राशि का 75 फीसदी तक भुगतान करेगी. सबसे अच्छी बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया गया है और क्लेम की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी.
पशुपालकों की लाचारी को समझते हुए मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा,
"ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन आजीविका का एक बहुत बड़ा जरिया है. अगर किसी भी कारण से किसी जानवर की मौत हो जाती है या वह काम के लिए स्थायी रूप से अनुपयुक्त हो जाता है, तो इसका पशुपालक की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ता है. उन्हें ऐसे संकटों से बचाने के लिए ही सरकार यह नई योजना लाई है."
एक महीने के भीतर होगा भुगतान
अक्सर सरकारी योजनाओं में क्लेम के लिए महीनों चक्कर काटने पड़ते हैं, लेकिन सरकार ने इस पर सख्त रुख अपनाया है. कैबिनेट के प्रस्ताव के अनुसार, बीमा कंपनी को हर हाल में एक महीने के भीतर क्लेम का भुगतान करना होगा.
इसके साथ ही, मंत्री ने आवारा पशुओं को लेकर भी एक बड़ा आंकड़ा साझा किया. उन्होंने बताया कि राज्य के 7,500 गौ संरक्षण केंद्रों में लगभग 13.50 लाख गायों को आश्रय दिया गया है, और सरकार उनके रखरखाव पर हर दिन 8 करोड़ रुपये खर्च कर रही है. सरकार का नया फैसला यकीनन यूपी के पशुपालकों को एक बड़ी मानसिक और आर्थिक शांति देगा.
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