चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे से लौट पाएगा श्रद्धालुओं का टूटा विश्वास? आखिर क्यों उठ रहे हैं सवाल?

राम मंदिर चढ़ावा विवाद में चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद भी श्रद्धालुओं के भरोसे पर सवाल बरकरार हैं. अयोध्या में जारी जांच के बीच ट्रस्ट की साख और पारदर्शिता पर चर्चा तेज हो गई है.

चंपत राय और अनिल मिश्रा

चंपत राय और अनिल मिश्रा (फोटो: एआई जेनेरेटेड)

कुमार अभिषेक

28 Jun 2026 (अपडेटेड: 28 Jun 2026, 07:56 AM)

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Champat Rai and Anil Mishra Resignation: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे में कथित चोरी और गड़बड़ी का मामला अब केवल एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है. विशेष जांच दल (SIT) की शुरुआती रिपोर्ट आने के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है. इससे पहले समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा सोशल मीडिया पर उठाए गए सवालों के बाद यह मामला लगातार चर्चा में रहा. अब सवाल सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी का नहीं, बल्कि उस भरोसे का भी है जो देश-विदेश के श्रद्धालुओं ने राम मंदिर और ट्रस्ट पर जताया था.

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प्राण प्रतिष्ठा से लेकर चढ़ावा विवाद तक का सफर

22 जनवरी 2024 को अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का ऐतिहासिक आयोजन हुआ था. देशभर से संत, श्रद्धालु, कारसेवक और विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियां इस पल की साक्षी बनी थीं. अगले दिन जब मंदिर आम श्रद्धालुओं के लिए खोला गया तो दर्शन के लिए रिकॉर्ड संख्या में लोग पहुंचे. वर्षों का सपना पूरा होने की खुशी हर चेहरे पर दिखाई दे रही थी. लेकिन लगभग ढाई साल बाद तस्वीर बदल गई. 26 जून 2026 को सौंपी गई एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में चढ़ावे की चोरी के मामले सामने आए. रिपोर्ट के अनुसार, केवल 45 दिनों में चढ़ावे की चोरी के 70 मामले सीसीटीवी में दर्ज हुए. पुलिस ने ट्रस्ट के तहत चढ़ावा गिनने और बैंक तक पहुंचाने का काम करने वाले आठ लोगों को गिरफ्तार किया और 79 लाख रुपये की बरामदगी की जानकारी भी दी.

अखिलेश यादव की पोस्ट के बाद तेज हुई बहस

बीते 7 जून को समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने राम मंदिर में कथित चंदा चोरी को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठाए, जिसके बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया. इसके बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और व्यवस्था पर लगातार सवाल उठने लगे. चंपत राय और अनिल मिश्रा सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में रहे. इस पूरे घटनाक्रम ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की साख पर भी असर डाला. वहीं श्रद्धालुओं के बीच यह चर्चा भी तेज हो गई कि मंदिर में आने वाले चढ़ावे की निगरानी और पारदर्शिता को लेकर भविष्य में क्या कदम उठाए जाएंगे.

दानपात्र को लेकर बढ़ा संदेह

अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या में कोई कमी नहीं आई है, लेकिन चढ़ावे को लेकर लोगों के मन में सवाल जरूर बढ़े हैं. बताया जा रहा है कि कुछ श्रद्धालु अब दानपात्र को पहले जैसी सहजता से नहीं देख रहे हैं. रामलला के टेंट में विराजमान रहने के समय भी श्रद्धालु ₹2, ₹5, ₹10 और ₹50 तक का दान श्रद्धा से करते थे और उस समय चोरी का कोई आरोप सामने नहीं आया था. वर्तमान में मंदिर बनने के बाद प्रतिदिन दानपात्रों में लाखों रुपये आते हैं, जबकि चेक, क्यूआर कोड और अन्य माध्यमों से मिलने वाला दान इससे अलग है. यही वजह है कि चढ़ावे से जुड़े इस विवाद ने लोगों की भावनाओं को गहराई से प्रभावित किया है.

इस्तीफे के बाद भी भरोसा बहाल करना सबसे बड़ी चुनौती

एसआईटी जांच के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन आम श्रद्धालुओं के मन में उठे सवाल अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं. अब लोगों की नजर जांच की अंतिम रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर है. श्रद्धालुओं की अपेक्षा है कि मंदिर में मिले प्रत्येक दान का पारदर्शी हिसाब सामने आए और यदि जांच में किसी स्तर पर जिम्मेदारी तय होती है तो उसके अनुसार कार्रवाई भी हो. राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है, इसलिए इस पूरे मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही ही वह आधार होगी, जिससे श्रद्धालुओं का विश्वास दोबारा मजबूत किया जा सकेगा.