Ram Mandir Update: अयोध्या के राम मंदिर से सामने आए चढ़ावा चोरी के मामले ने हर किसी को हैरान कर दिया है. इस मामले पर जहां एक तरफ सियासत गरमाई हुई है, वहीं दूसरी तरफ जांच में चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की तहरीर पर दर्ज हुई एफआईआर के बाद पुलिस ने 8 लोगों को गिरफ्तार किया है. लेकिन इस पूरी जांच का सबसे बड़ा और सनसनीखेज मोड़ तब आया जब 27 अप्रैल से 5 जून के बीच की सीसीटीवी फुटेज खंगाली गई. इस सवा महीने के भीतर नोटों की गिनती के दौरान एक-दो बार नहीं बल्कि पूरे 70 बार चोरी की वारदात को अंजाम दिया गया. यानी रोजाना औसतन 2 से 3 बार मंदिर के चढ़ावे पर हाथ साफ किया जा रहा था. यह कोई अकेला शख्स नहीं कर रहा था बल्कि ट्रस्ट और बैंक कर्मियों के सहयोग से चल रहा एक पूरा संगठित सिंडिकेट था.
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ऐसे हुआ चोरी का भंडाफोड़
मई के महीने में जब ट्रस्ट द्वारा भक्तों की संख्या और औसतन चढ़ावे का आकलन किया गया तो पाया कि करीब 7 से 8 लाख रुपये गायब हैं. कुछ ही हफ्तों के भीतर 500-500 रुपये के नोटों की गड्डियों में लगातार कमी देखी जा रही थी. शक गहराने पर नोट गिनने वाले कक्ष (काउंटिंग रूम) में कुछ हिडन कैमरे लगवाए गए. जब इन कैमरों की एक हफ्ते की फुटेज देखी गई, तो चोरी का पूरा खेल बेनकाब हो गया.
यह सिंडिकेट बेहद शातिराना तरीके से चोरी को अंजाम दे रहा था. नोट गिनने वाले कर्मचारी जानबूझकर कमरे में लगे मुख्य सीसीटीवी कैमरे के सामने खड़े हो जाते थे ताकि उनकी हरकतें रिकॉर्ड न हों. इसी बीच उनका दूसरा साथी नोटों की गड्डी से रुपए निकालकर अपने कपड़ों में छिपा लेता था. गड्डी बनाते समय उसमें जानबूझकर कुछ नोट अतिरिक्त (एक्स्ट्रा) रख दिए जाते थे. जब वह गड्डी काउंटिंग रूम से बाहर भेजी जाती, तो बाद में सेटिंग के तहत उन अतिरिक्त नोटों को अलग से निकाल लिया जाता था.
आउटसोर्सिंग का खेल और 'टिन्नू यादव' की हनक
राम मंदिर में नोटों की गिनती के लिए शिफ्टों में 40 कर्मचारी लगाए गए थे (एक शिफ्ट में 20 कर्मचारी). इनमें से कुछ बैंक की तरफ से थे और कुछ को आउटसोर्सिंग के जरिए ट्रस्ट ने रखा था. यहीं पर एंट्री होती है रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव की. टिन्नू यादव की सिफारिश पर ट्रस्ट आंख मूंदकर लोगों को नोट गिनती के काम पर रख लेता था.
टिन्नू ने अपने सगे भतीजे मनीष यादव को भी इसी काम में लगवाया जिसे दान पात्रों से नकली नोट छांटने और गिनने की जिम्मेदारी मिली थी. मनीष पिछले डेढ़ साल से यहां काम कर रहा था. टिन्नू यादव का रसूख ऐसा था कि वह हाथ में वायरलेस सेट लेकर घूमता था और सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी भी उसकी हनक से खौफ खाते थे. उसके पास काउंटिंग रूम की चाबियां रहती थीं और वह चंपत राय के करीबियों में शामिल था.
गिरफ्तार हुए 8 आरोपियों की कुंडली और उनका रोल
इस पूरे खेल में शामिल जिन 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है उनमें से मुख्य किरदारों की भूमिका इस प्रकार थी.
सुभाष चंद्र श्रीवास्तव: एसबीआई (SBI) से रिटायर्ड बैंक कर्मी. यह राम मंदिर में नोट गिनने की पूरी प्रक्रिया के इंचार्ज और कैश काउंटिंग स्टाफ के प्रभारी थे. इन्हीं की निगरानी में सारा स्टाफ काम करता था.
रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव: ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का करीबी और मंदिर का व्यवस्थापक. श्रद्धालुओं को दर्शन कराने से लेकर दान पात्रों की देखरेख और उन्हें बेसमेंट तक पहुंचाने का जिम्मा इसी के पास था. इसकी बुलेट सीधे मंदिर के अंदर तक जाती थी. इसे इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड माना जा रहा है.
मनीष यादव: टिन्नू यादव का सगा भतीजा और इस खेल में उसका बायां हाथ. डेढ़ साल से नोट गिनने का काम कर रहा था. गिरफ्तारी के बाद इसके पास से भारी कैश बरामद हुआ है.
अनुकल्प मिश्रा: पिछले 2 साल से चढ़ावा गिनने के काम में तैनात था. इस पर चढ़ावे के वाउचर में हेरफेर करने का आरोप है.
लवकुश मिश्रा: अनुकल्प मिश्रा का साला. पुलिस ने जब इसे डिटेन किया तो इसके घर से ₹1 लाख कैश बरामद हुआ.
अविनाश शुक्ला व करुणेश पांडे: अविनाश का काम दान पात्रों से पैसे निकालकर गणना कक्ष तक ले जाना था. यह भी चोरी की इस पूरी चेन का हिस्सा था.
मामले पर सियासत और ट्रस्ट का रुख
राम मंदिर जैसे पवित्र स्थान पर इस तरह के संगठित अपराध के सामने आने के बाद विपक्ष लगातार ट्रस्ट और उसके पदाधिकारियों के क्राइटेरिया पर सवाल उठा रहा है. सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेजी से फैली कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. हालांकि ट्रस्ट के गोपाल राव ने सामने आकर इस खबर का पूरी तरह से खंडन किया है.
आरएसएस (RSS), विश्व हिंदू परिषद (VHP) और सरकार की तरफ से साफ संकेत दिए गए हैं कि इस मामले में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा और आने वाले दिनों में ट्रस्ट के कुछ बड़े पदाधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है. फिलहाल पुलिस इन सभी आठों आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस सिंडिकेट की जड़ें और कहां-कहां तक फैली हुई हैं.
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