Neha Rai Success Story: गाजीपुर की रहने वाली नेहा राय ने बिना किसी कोचिंग के उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPCS) परीक्षा में ऑल इंडिया नहीं, बल्कि राज्य स्तर पर शानदार सफलता हासिल की है. उनकी रैंक 20 आई है और उनका चयन नायब तहसीलदार के पद पर हुआ है.
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खास बात ये है कि लगभग उसी समय उनका चयन बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) में भी हो गया, जहां उनकी रैंक 16 आई है और उन्हें एसडीएम के पद पर सरकारी नौकरी मिली है.
नेहा की कहानी सिर्फ एक सरकारी नौकरी पाने की नहीं है. यह उस छात्रा की कहानी है जिसने 12वीं तक साइंस पढ़ी, इंजीनियर बनने का सोचा, लेकिन आगे चलकर अपना रास्ता बदल दिया. फिर पीएचडी, रिसर्च और सिविल सर्विस की तैयारी को साथ लेकर चलीं और आखिरकार मंजिल हासिल कर ली. यूपी Tak पर आयशा शेख़ से बातचीत के दौरान नेहा राय ने अपने संघर्ष, रणनीति, परिवार, पढ़ाई और सफलता के बारे में काफी कुछ बताया है.
PCM से पॉलिटिकल साइंस तक, ऐसे बदली दिशा
नेहा राय उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले की रहने वाली हैं. उनकी शुरुआती पढ़ाई सेंट जॉन्स स्कूल, गाजीपुर से हुई. 12वीं तक उन्होंने PCM (फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स) पढ़ी थी. उस समय उनका लक्ष्य इंजीनियरिंग की तरफ जाना था.
हालांकि, उनके बड़े कजिन भाई अमीश राय का उनकी जिंदगी पर बड़ा असर पड़ा. उन्होंने 12वीं के बाद स्ट्रीम बदलकर बीएचयू में ह्यूमैनिटीज में दाखिला लिया था. उसी से प्रेरित होकर नेहा ने भी बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया.
इसके बाद उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से इंटरनेशनल रिलेशंस में मास्टर्स किया. यहीं उन्हें महसूस हुआ कि कॉर्पोरेट सेक्टर उनके लिए नहीं है. उन्हें एकेडमिक्स और रिसर्च ज्यादा पसंद आने लगी.
कोविड में टूटा प्लान, फिर पीएचडी बनी ताकत
मास्टर्स के बाद नेहा ने तय किया कि वह पहले सिविल सर्विस की तैयारी करेंगी. इसलिए उन्होंने पीएचडी में दाखिला नहीं लिया और एक साल सिर्फ तैयारी को देने का फैसला किया, लेकिन तभी कोविड-19 महामारी आ गई.
दिल्ली में अकेले रहकर तैयारी करना उनके लिए काफी मुश्किल हो गया. उन्होंने बताया कि उस दौरान मानसिक रूप से काफी दबाव महसूस हुआ, जिसके बाद वह वापस घर लौट आईं.
घर आने के बाद उन्होंने बीएचयू में पीएचडी में दाखिला लिया. इसी दौरान उन्होंने जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) भी क्वालिफाई कर ली. इससे उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता मिली और वह रिसर्च के साथ-साथ सिविल सर्विस की तैयारी भी जारी रख सकीं. उनके गाइड डॉ. अभय कुमार ने भी दोनों काम साथ करने के लिए उनका लगातार हौसला बढ़ाया.
तीन बार असफल रहीं, चौथी कोशिश में मिली सफलता
- नेहा ने UPPCS की परीक्षा 2021, 2022 और 2023 में भी दी थी, लेकिन प्रीलिम्स पार नहीं कर सकीं.
- उन्होंने बताया कि 2024 में उन्होंने पूरी तरह फोकस के साथ तैयारी की. खासकर घटनाचक्र से पिछले 20 वर्षों के प्रश्नपत्र हल किए, जिससे प्रीलिम्स की तैयारी मजबूत हुई और आखिरकार उनका चयन हो गया.
- UPPCS का रिजल्ट पहले आया, इसलिए उन्होंने नायब तहसीलदार के पद पर जॉइन भी कर लिया. करीब एक महीने बाद BPSC का रिजल्ट आया, जिसमें भी उनका चयन हो गया.
बिना कोचिंग ऐसे की तैयारी
नेहा ने किसी भी ऑफलाइन या ऑनलाइन कोचिंग का सहारा नहीं लिया. उन्होंने बेसिक किताबों और यूट्यूब की मदद से अपनी तैयारी पूरी की.
पॉलिटी के लिए उन्होंने लक्ष्मीकांत, मॉडर्न हिस्ट्री के लिए स्पेक्ट्रम, 11वीं-12वीं की NCERT, साइंस के लिए लुसेंट और एनवायरनमेंट के लिए शंकर IAS की किताब पढ़ी.
जियोग्राफी के लिए उन्होंने यूट्यूब पर मैपिंग, भारत की नदियों और नेशनल पार्क जैसे टॉपिक्स को एनिमेटेड वीडियो के जरिए समझा. इसके अलावा वह रोज 'द हिंदू' अखबार पढ़ती थीं. यूपी और बिहार से जुड़े करेंट अफेयर्स के लिए एडिटेरिया और दृष्टि जैसी मैगजीन का इस्तेमाल किया.
मैथ्स-रीजनिंग में क्या किया?
नेहा का मैथ्स बैकग्राउंड पहले से मजबूत था क्योंकि उन्होंने 12वीं तक मैथ्स पढ़ी थी. उन्होंने बताया कि UPPCS में मैथ्स और रीजनिंग बहुत कठिन नहीं होती. इसलिए उन्होंने सिर्फ 4-5 साल के पिछले प्रश्नपत्र हल किए, जो उनके लिए काफी रहे.
मेंस में AI से बनाए नोट्स
मेंस परीक्षा की तैयारी के दौरान उन्होंने सबसे पहले सिलेबस और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का विश्लेषण किया.
उन्होंने बताया कि नोट्स तैयार करने में एआई की मदद ली. साथ ही विजन IAS के फ्री नोट्स का इस्तेमाल किया. चूंकि वह रिसर्च स्कॉलर हैं, इसलिए आंसर राइटिंग की आदत पहले से थी, जिसका उन्हें काफी फायदा मिला.
इंटरव्यू में क्या पूछा गया?
बिहार PCS इंटरव्यू में बोर्ड ने उनकी जेएनयू की पढ़ाई, पीएचडी रिसर्च, पॉलिटिकल थ्योरी और रिट्स (Writs) से जुड़े सवाल पूछे. इसके अलावा उनसे यह भी पूछा गया कि भारत को 'डायबिटीज कैपिटल' क्यों कहा जाता है.
वहीं UPPCS इंटरव्यू में उनसे भारत की विदेश नीति, जाति व्यवस्था, बनारस की भौगोलिक स्थिति और नेपाल बॉर्डर की सुरक्षा से जुड़े सवाल पूछे गए.
परिवार ने दिया साथ
नेहा के पिता गाजीपुर में खेती-बाड़ी से जुड़े हैं. उनकी मां का 2008 में कैंसर के कारण निधन हो गया था. उनके दो छोटे भाई हैं. एक बीएचयू से एमबीए कर रहा है, जबकि दूसरा रायपुर में जर्नलिज्म की पढ़ाई कर रहा है. नेहा अपने कजिन भाई अमीश राय को अपनी सफलता का बड़ा श्रेय देती हैं. उनका कहना है कि उन्हीं की वजह से उन्होंने अपनी पढ़ाई की दिशा बदली और जेएनयू तक पहुंचीं.
'प्लान बी' हमेशा मजबूत रखें
नेहा कहती हैं कि उन्होंने खुद को कभी सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं रखा. उन्होंने पीएचडी को अपना मजबूत प्लान बी बनाया. इससे उन पर मानसिक दबाव कम रहा और वह लगातार तैयारी करती रहीं.
उनका मानना है कि सिविल सर्विस की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों को सिर्फ लंबी पढ़ाई नहीं, बल्कि सही रणनीति, बेसिक किताबों, पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र और नियमित अभ्यास पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए.
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