Tinnu Yadav Exclusive: अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे और आभूषणों की कथित चोरी के मामले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई हुई है. SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर अयोध्या पुलिस ने 8 नामजद और कई अज्ञात आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज हो चुकी है.
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इस हाई-प्रोफाइल मामले में सबसे बड़ा नाम राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के ड्राइवर रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव का है. FIR दर्ज होने के तुरंत बाद यूपी Tak की टीम ने जब टिन्नू यादव से फोन पर एक्सक्लूसिव बातचीत की तो उसने इस पर बेहद चौंकाने वाली प्रतिक्रिया दी. आइए जानते हैं टिन्नू यादव ने क्या कहा और इस केस में कौन से बड़े नामों पर सियासत गरमा गई है.
FIR पर क्या बोला मुख्य संदिग्ध टिन्नू यादव?
चढ़ावा चोरी मामले में शुरुआत से ही टिन्नू यादव की भूमिका सबसे संदिग्ध मानी जा रही थी. एफआईआर दर्ज होने की खबर मिलते ही जब मीडिया टीम ने उससे फोन पर संपर्क किया तो बातचीत कुछ इस तरह रही.
सवाल: एफआईआर दर्ज हुई है, उसमें रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव आपका नाम है. आपका क्या कहना है? आपके खिलाफ एफआईआर हो गई है.
टिन्नू यादव: "अभी ऐसी कोई हमको जानकारी नहीं है और हमें कुछ नहीं कहना."
सवाल: हमें यूपी पुलिस के सूत्रों के हवाले से पक्की जानकारी आई है...
टिन्नू यादव: "सूत्रों के... बस ठीक है. हमें जानकारी नहीं है भैया, ठीक है. जी नमस्कार."
फोन पर खुद को अनजान बताने वाले टिन्नू यादव समेत सभी 8 नामजद आरोपियों को पुलिस ने अब सलाखों के पीछे भेज दिया है.
कौन है टिन्नू यादव और क्यों उठ रहे हैं सवाल?
राम मंदिर में टिन्नू यादव का रसूख किसी बड़े अधिकारी से कम नहीं था. उसकी चर्चा के पीछे कई बड़ी वजहें हैं. टिन्नू यादव राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का ड्राइवर है और उसे मंदिर का व्यवस्थापक भी बताया जा रहा है. वह इकलौता ऐसा शख्स था जो मंदिर के संवेदनशील हिस्सों में भी बेरोक-टोक आ-जा सकता था. यहां तक कि मंदिर परिसर के अंदर सिर्फ उसकी बुलेट खड़ी होती थी. जांच के दायरे में आने के बाद सामने आया कि एक ड्राइवर होने के बावजूद टिन्नू यादव के पास कई गाड़ियां, कई होटल और कई बेनामी प्रॉपर्टीज हैं.
गिरफ्तार हुए सभी 8 आरोपियों के नाम
लवकुश मिश्रा
अनुकल्प मिश्रा
रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव
रमाशंकर मिश्रा
मनीष यादव
करुणेश पांडे
अविनाश शुक्ला
सुभाष चंद्र
'बड़ी मछली' को बचाने का आरोप, यूपी में सियासी बवंडर
इस कार्रवाई के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत सातवें आसमान पर पहुंच गई है. विपक्ष और कई हिंदू संगठनों ने आरोप लगाया है कि कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है और 'बड़ी मछलियों' को बचाने के लिए छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है.
जांच के दायरे से बाहर रहे ये बड़े नाम
विपक्ष का सवाल है कि एसआईटी की रिपोर्ट में ट्रस्ट के सबसे रसूखदार पदाधिकारियों के नाम गायब क्यों हैं? इस मामले में लगातार तीन बड़े नामों पर कार्रवाई की मांग की जा रही है.
चंपत राय (महासचिव, राम जन्मभूमि ट्रस्ट)
गोपाल राव (ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य)
अनिल मिश्रा (ट्रस्ट के सदस्य)
विपक्ष का सीधा आरोप है कि बड़े पदों पर बैठे लोगों को बचाकर सिर्फ निचले स्तर के स्टाफ पर गाज गिराई गई है. बहरहाल सभी 8 आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब एसआईटी इस मामले में आगे की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है.
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