Who is Champat Rai: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में 8 लोगों की गिरफ्तारी के बाद सियासत गरमा गई है. इस बड़े विवाद के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ नेता चंपत राय इस समय विपक्षी दलों के निशाने पर हैं और चर्चा के केंद्र में हैं. ऐसे में आइए हम आपको चंपत राय की पूरी कहानी बताने के साथ-साथ उनकी श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव बनने से इस्तीफे तक की पूरी जानकारी तफ्सील से बताते हैं.
ADVERTISEMENT
कौन हैं चंपत राय?
चंपत राय का जन्म 1946 में उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में हुआ था. शुरुआती जीवन में वे शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े थे और बिजनौर के ही आरएसएम डिग्री कॉलेज में केमिस्ट्री के प्रोफेसर थे. वे बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से प्रभावित थे. साल 1975 में देश में लगे आपातकाल के दौरान संघ से जुड़े होने के कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा था.
राम मंदिर आंदोलन का बने 'मुख्य चेहरा'
1980 के दशक में चंपत राय पूरी तरह राम मंदिर आंदोलन से जुड़ गए. वे आंदोलन के सबसे बड़े चेहरों में से एक अशोक सिंघल के बेहद करीबी सहयोगी माने गए. 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में हुई कारसेवा में भी उनकी सक्रिय भूमिका थी. आंदोलन के प्रति उनके समर्पण को देखते हुए वीएचपी (VHP) ने उन्हें संगठन में कई बड़ी जिम्मेदारियां दीं.
1996: केंद्रीय सचिव बनाए गए.
2002: अंतरराष्ट्रीय संयुक्त महासचिव का पद मिला.
वर्तमान: वे वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं.
चंपत राय को क्यों कहा जाता है अयोध्या का इनसाइक्लोपीडिया?
चंपत राय को अयोध्या के इतिहास, विवाद और अदालती मामले की इतनी बारीक समझ है कि उन्हें आंदोलन का 'इनसाइक्लोपीडिया' कहा जाने लगा. जब राम जन्मभूमि का मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा था तब हिंदू पक्ष के वकीलों को अचूक ऐतिहासिक दस्तावेज, नक्शे और साक्ष्य जुटाकर देने में चंपत राय की भूमिका सबसे अहम थी. इसी अनुभव के कारण साल 2020 में उन्हें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का महासचिव बनाया गया और वे मंदिर निर्माण की हर गतिविधि को करीब से देख रहे थे.
अविवाहित रहे चंपत राय
चंपत राय ने अपना पूरा जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, वीएचपी और राम मंदिर के काम के लिए समर्पित कर दिया. संगठन के काम में पूरी तरह रमे रहने के कारण उन्होंने विवाह नहीं किया. संगठनात्मक कार्यों और व्यस्तताओं के बीच लिखने-पढ़ने के शौकीन चंपत राय ने जैन दर्शन पर भी कई पुस्तकें लिखी हैं.
राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने चंपत राय का खुलकर बचाव किया है. उन्होंने कहा कि दशकों से आंदोलन में लगे चंपत राय की ईमानदारी पर सवाल नहीं उठाया जा सकता. हालांकि उन्होंने अन्य आरोपियों पर कोई टिप्पणी नहीं की.
फिलहाल 8 लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर में चंपत राय का नाम बतौर आरोपी शामिल नहीं है. विशेष जांच दल यानी SIT की शुरुआती रिपोर्ट में भी उनके खिलाफ किसी आपराधिक कार्रवाई का आधार नहीं मिला है. लेकिन पुलिस अधिकारियों के मुताबिक मामले की जांच अभी जारी है.
ADVERTISEMENT










