जिस फॉर्म 7 का नाम लेकर अखिलेश ने BJP पर वोट कटवाने का आरोप लगाया उसके बारे में एक-एक बात जान लीजिए

UP News: सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने फॉर्म 7 के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए बताया कि उनके समर्थकों के वोटर सूची से हटाए जा रहे हैं. फॉर्म 7 का उद्देश्य मतदाता सूची साफ रखना है, लेकिन इसके गलत इस्तेमाल से लोकतंत्र को खतरा हो सकता है.

UP News: उत्तर प्रदेश की राजनीति इन दिनों हाई वोल्टेज ड्रामा की तरफ बढ़ रही है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार बीजेपी सरकार पर चुनावी गड़बड़ी और मतदाता सूची में हेरफेर का आरोप लगा रहे हैं. सोशल मीडिया पर वीडियो इंटरव्यू, लेटर और प्रेस ब्रीफिंग के जरिए उन्होंने दावा किया कि उनके समर्थकों के वोट कट रहे हैं और यह मामला केवल व्यक्तिगत शिकायत नहीं बल्कि लोकतंत्र की बुनियादी प्रक्रियाओं पर सवाल खड़ा करता है. 3 फरवरी को उन्होंने इस मसले पर विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की जिसमें उन्होंने बार-बार फॉर्म 7 का जिक्र किया और इसे लेकर गंभीर सवाल उठाए. अब सवाल यही है कि आखिर फॉर्म 7 है क्या है और इसका उद्देश्य क्या है.  क्या वाकई इससे वोट कट सकते हैं, या यह सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा है.

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फॉर्म 7 क्या है?

दरअसल, फॉर्म 7 भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी एक आधिकारिक फॉर्म है. इसे मतदाता सूची से किसी व्यक्ति का नाम हटाने या उस पर आपत्ति दर्ज करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. यह फॉर्म रेप्रेजेंटशन ऑफ द पीपल एक्ट,1950 और रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960 (Rule 26) के तहत आता है. बता दें कि फॉर्म 7 का मुख्य उद्देश्य है मतदाता सूची को साफ और सटीक रखना है. इसके जरिए यह सुनिश्चित किया जाता है कि मृतक, डुप्लीकेट या अयोग्य मतदाता की प्रविष्टि मतदाता सूची में न रहे.

फॉर्म 7 किन परिस्थितियों में भरा जा सकता है?

फॉर्म 7 केवल वैध कारणों पर ही भरा जा सकता है. जैसे किसी मतदाता का निधन होना, पते में बदलाव के कारण अब वह वर्तमान क्षेत्र का मतदाता न होना, या किसी व्यक्ति का नाम मतदाता   सूची में दो या अधिक जगहों पर दर्ज होना यानी डुप्लीकेट एंट्री. इसके अलावा, अन्य वैध कारण जैसे नाम गलत तरीके से दर्ज होना या व्यक्ति अब मतदान के लिए पात्र न होना (जैसे विदेशी नागरिक) भी फॉर्म 7 भरने के लिए मान्य हैं. यह फॉर्म किसी भी उस विधानसभा क्षेत्र के मतदाता    द्वारा भरा जा सकता है, न कि केवल प्रभावित व्यक्ति द्वारा. इसका मतलब है कि किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर भी आपत्ति दर्ज की जा सकती है लेकिन इसके लिए वैध कारण और प्रमण जरूरी हैं.

फॉर्म 7 की प्रक्रिया और जांच

अमेठी के उपजिलाअधिकारी आशीष सिंह के अनुसार, फॉर्म 7 की हर आवेदन की जांच की जाती है और केवल तभी किसी का नाम मतदाता सूची से हटाया जाता है. फर्जी वाड़े और गलत जानकारी देने से बचने के लिए भी सख्त प्रावधान हैं. अगर कोई फर्जी जानकारी देने का प्रयास करता है तो Section 31 RPA 1950 के तहत जुर्माना या जेल की सजा हो सकती है.

अगर किसी व्यक्ति का नाम गलती से हट रहा है तो वह फॉर्म 7 के खिलाफ आपत्ति दर्ज कर सकता है या फॉर्म 8 के माध्यम से सुधार करवा सकता है. बता दें कि मऊ के ADM सत्यप्रिया सिंह ने सोशल मीडिया पर विस्तार से जानकारी साझा कर लोगों को जागरूक किया है.

फॉर्म 7 और लोकतंत्र में खतरा

बता दें कि फॉर्म 7 एक जरूरी उपकरण है, जिससे मतदाता सूची साफ और सही बनी रहती है. लेकिन इसका दुरुपयोग लोकतंत्र के लिए खतरा बन सकता है.सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का आरोप है कि उनके विधायकों के क्षेत्रो में फॉर्म 7 का दरुपयोग किया जा रहा है. आरोप है कि बड़े पैमाने पर प्री-प्रिंटेड फॉर्म फर्जी हस्ताक्षरों के साथ जमा किए जा रहे हैं, खासकर SC/ST/अल्पसंख्यक और विपक्षी समर्थकों के नाम हटाने के लिए. 

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