'मुझ पर 50-60 करोड़ का कर्जा...' प्रयागराज में कोचिंग सील होने के बाद यूपी Tak पर रो पड़े विवेक सर, बयां किया जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द

प्रयागराज में एग्जामपुर कोचिंग सील होने के बाद विवेक सर का 'यूपी तक' पर भावुक इंटरव्यू. विवेक सर ने खोला राज- बताया कि उन पर 50-60 करोड़ का कर्जा था, जिसके लिए फौजी पिता ने जमीन बेची. 12 जून को लखनऊ सत्याग्रह का किया ऐलान.

Vivek Sir

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गौरव कुमार पांडेय

05 Jun 2026 (अपडेटेड: 05 Jun 2026, 04:07 PM)

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उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में विकास प्राधिकरण (PDA) और अग्निशमन विभाग द्वारा एग्जामपुर (Exampur) समेत तीन बड़े कोचिंग संस्थानों को सील किए जाने के बाद मचे सियासी घमासान के बीच, एग्जामपुर के संस्थापक विवेक सर का एक बड़ा और बेहद भावुक इंटरव्यू सामने आया है. यूपी Tak से खास बातचीत में विवेक सर ने प्रशासनिक कार्रवाई से लेकर अपनी जिंदगी के उन गहरे पन्नों को खोला है, जिसके बारे में आज तक किसी को भनक भी नहीं थी. विवेक सर ने रोते हुए खुलासा किया कि वे इस समय 50 से 60 करोड़ रुपये के भारी कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं और इस मुश्किल घड़ी में उनके फौजी पिता ने अपनी जमीन तक बेच दी.

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सुबह 6:30 बजे अचानक पहुंचे अधिकारी, बिना किसी नोटिस के लगाई सील

यूपी Tak से बातचीत में विवेक सर ने बताया कि जिस दिन (31 मई) यह कार्रवाई हुई, वे अपने कमरे पर थे. उन्होंने कहा, "सुबह करीब 6:30 बजे मुझे फोन आया कि कोचिंग पर भारी प्रशासनिक अमला आया है और सील लगाई जा रही है. 8 बजे से बच्चों का टेस्ट होना था, अधिकारियों ने जानबूझकर ऐसा समय चुना ताकि बिल्डिंग खाली रहे और बच्चे वहां न हों."

विवेक सर ने प्रशासनिक दावों को बताया झूठ 

प्रशासन द्वारा बेसमेंट में शयन कक्ष होने और 11 मई को नोटिस देने के दावों पर विवेक सर ने कहा, "यह सरासर झूठ है. हमारे पास सीसीटीवी कैमरे हैं, 31 तारीख से पहले हमें कोई नोटिस नहीं मिला. हमने 3 जून को डीएम, पीडीए और फायर विभाग को अपना जवाब भेज दिया है."
 
विवेक सर ने स्पष्ट किया कि यह एक रेंटेड कमर्शियल बिल्डिंग है, जिसका नक्शा पास है और बकायदा कमर्शियल टैक्स जाता है. बिल्डिंग में 100-150 फायर एक्सटिंगशर लगे हैं. उन्होंने कहा कि अगर जनरेटर या किसी अन्य चीज का मानक गलत था, तो उन्हें 15-20 दिन का समय दिया जाना चाहिए था, वे उसे ठीक करवा लेते.

'कैंडल मार्च में बच्चों का साथ देने का मिला यह बदला'

जब विवेक सर से पूछा गया कि प्रशासन ने ऐसा क्यों किया, तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा, "इसकी वजह साफ है. 29 तारीख को बच्चों ने अपनी मांगों को लेकर एक शांतिपूर्ण कैंडल मार्च निकाला था. वह मेरी कॉल भी नहीं थी, मैं तो बस बच्चों को नैतिक समर्थन देने गया था. बच्चे ट्विटर कैंपेन और ज्ञापन दे-देकर परेशान हो चुके थे. यह कार्रवाई उसी का बदला है कि 'तुम कोचिंग वाले हो, तो बच्चों का सपोर्ट नहीं कर सकते, वरना तुम्हारा काम-धंधा बंद कर दिया जाएगा'."

विवेक सर ने कहा कि इस कार्रवाई से उनकी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों क्लासेस पूरी तरह बाधित हो गई हैं. 8, 9 और 10 जून को यूपी पुलिस सिपाही भर्ती की परीक्षा है और ऐन वक्त पर कोचिंग सील होने से बच्चों की सीक्वेंस में चल रही तैयारी पूरी तरह बर्बाद हो गई है. उन्होंने यह भी बताया कि डर के मारे अब कोई उन्हें क्लास रिकॉर्ड करने के लिए स्टूडियो तक किराए पर नहीं दे रहा है.

'मुझ पर था 50-60 करोड़ का कर्जा'

इंटरव्यू के दौरान विवेक सर बेहद भावुक हो गए और रोते हुए अपनी आर्थिक स्थिति का वो सच बताया जो उन्होंने आज तक छुपा कर रखा था. उन्होंने कहा, "मैं पिछले 3 साल से किसी को नहीं बताया, लेकिन मुझ पर और मेरे पार्टनर पर 50 से 60 करोड़ रुपये का कर्जा था. तीन-चार साल पहले हमें भारी नुकसान हुआ और एक बड़ी कंपनी से हमारी डील टूट गई, जिससे आधा कर्ज एक बार में आ गया."

'हर महीने 60-70 लाख की जाती है किस्त' 

विवेक सर ने कहा, "हम लोग कोई करोड़पति नहीं हैं, दिहाड़ी मजदूर की तरह सुबह से शाम तक मेहनत करते हैं. इस कर्ज को उतारने के लिए हमें हर महीने 60 से 70 लाख रुपये चुकाने पड़ते हैं. यानी हर दिन का 2 से 3 लाख रुपये तो सिर्फ कर्ज देने के लिए कमाना पड़ता है. इसी वजह से कई बार टीम की सैलरी भी डेढ़-दो महीने लेट हो जाती है, लेकिन मेरी टीम बहुत सपोर्टिव है."

'क्रिमिनल लोगों से लिया था पैसा' 

उन्होंने बताया कि कुछ पैसा बैंकों का था और कुछ ऐसे क्रिमिनल टाइप लोगों का था जो 'एक के दस' वाले होते हैं और सीधा बंदूक तान देते हैं. हालांकि, विवेक सर ने बताया कि वे हार नहीं माने हैं और मेहनत करके अब तक लगभग 60% कर्ज उतार चुके हैं. साल 2029 के दिसंबर तक वे पूरी तरह फ्री हो जाएंगे.

'पूर्व फौजी पिता ने बेची जमीन, मां के जेवर रखे गिरवी'

अपनी पारिवारिक स्थिति और माता-पिता के दर्द को बयां करते हुए विवेक सर के आंसू छलक पड़े. उन्होंने बताया, "मैं यूपी एसआई का टॉप रैंकर था, दरोगा की नौकरी मिल रही थी, लेकिन मैंने पढ़ाना चुना. मेरे पिता पूर्व फौजी हैं, वे सख्त हैं. जब उन्होंने मेरा रोते हुए वीडियो देखा तो तुरंत फोन आया कि 'यह सब छोड़ो और घर आ जाओ, नौकरी क्यों छोड़ी थी, कोई किसी के साथ नहीं आता.' मोहल्ले-पड़ोस के लोग भी बातें बनाते हैं."

जमीन बेचने का है दर्द 

उन्होंने भावुक होकर कहा, "जब हम पर बहुत ज्यादा लोड पड़ गया, तो मेरे और मेरे पार्टनर के पिताजी ने अपनी दादा-लालाई जमीनें तक बेच दीं. मां के जेवर गिरवी रखकर हमने लोगों के पैसे चुकाए. मेरे फौजी पिता के लिए जमीन मां समान थी, उन्होंने कहा कि जमीन फिर खरीद लेंगे, तू परेशान मत हो, अच्छा काम कर. मुझे लगता था कि पिता मुझसे नफरत करते हैं, लेकिन उन्होंने ऐसा फैसला लिया जो 100 में से 10% पिता ही ले पाते हैं."

'200-250 कर्मचारियों की चिंता' 

विवेक सर ने कहा कि माता-पिता कहते हैं कि घर आकर खेतीबाड़ी कर लो, लेकिन मैं इन 200-250 कर्मचारियों को कैसे छोड़ दूं, ये कहां जाएंगे?

विपक्ष के समर्थन पर जताया आभार, 12 जून को 'लखनऊ सत्याग्रह' का ऐलान

इस विवाद के बाद अखिलेश यादव, संजय सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे नेताओं द्वारा वीडियो शेयर किए जाने और समर्थन देने पर विवेक सर ने कहा, "जब पक्ष सुन नहीं रहा तो विपक्ष ही सुनेगा. मैं उन सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने इस कठिन समय में हमारा साथ दिया."

अंत में विवेक सर ने सरकार से अपील करते हुए कहा, "हम कोई आतंकवादी या पॉलिटिकल लोग नहीं हैं. हम ₹99 और ₹200 में गरीब बच्चों को पढ़ाते हैं. हम पर इतनी सख्ती मत बरतिए, हमें काम करने का मौका दीजिए." उन्होंने ऐलान किया कि सभी अध्यापकों ने मिलकर यह तय किया है कि वे 12 जून को लखनऊ के इको गार्डन पहुंचेंगे और उत्तर प्रदेश में भर्ती की अनियमितताओं (जैसे स्कोर कार्ड जारी करना, नॉर्मलाइजेशन को ठीक करना और भर्तियां समय पर निकालना) को लेकर पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से माननीय मुख्यमंत्री जी तक अपनी मांगें पहुंचाएंगे.

यहां देखें पूरा इंटरव्यू