इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के शामली जिले के दवा कारोबारी आयुष मलिक के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने स्पष्ट रूप से माना कि 31 वर्षीय आयुष मलिक ने बिना किसी दबाव के अपनी स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन कर इस्लाम कबूल किया था. मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति संदीप जैन की पीठ ने आयुष मलिक की ओर से दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus Petition) का निपटारा करते हुए उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता बहाल कर दी. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आयुष मलिक बालिग हैं और अपने जीवन से जुड़े फैसले लेने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं.
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जस्टिस संदीप जैन की सिंगल बेंच के समक्ष पेश हुए आयुष मलिक ने अपने बयान में कहा कि उसने बिना किसी दबाव, भय या जबरदस्ती के अपनी इच्छा से धर्मांतरण किया है. आयुष ने यह भी बताया कि उसने अपनी मर्जी से चांदनी कुरैशी से निकाह किया है.
पिता ने दर्ज कराई थी एफआईआर
मामले की शुरुआत आयुष के पिता देवराज मलिक की ओर से छह जून को शामली शहर कोतवाली में दर्ज कराई गई एफआईआर से हुई थी. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि जिम ट्रेनर चांदनी कुरैशी ने आयुष को प्रेम जाल में फंसाकर उसका धर्मांतरण कराया और इसके पीछे संपत्ति हड़पने का उद्देश्य था.
पुलिस ने देवराज मलिक की शिकायत के आधार पर चांदनी कुरैशी, उसके पिता इस्लाम कुरैशी, तीन मौलवियों समेत कुल आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था. सात जून को पुलिस ने चांदनी कुरैशी और उसके पिता इस्लाम कुरैशी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. इसके बाद 24 जुलाई को शामली के कैराना स्थित जिला न्यायालय से दोनों को जमानत मिल गई थी.
दोस्त ने दाखिल की थी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका
इसी दौरान आयुष के दोस्त सुल्तान कारी की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की गई. याचिका में आरोप लगाया गया कि आयुष को उसके पिता देवराज मलिक ने अवैध रूप से हिरासत में रखा है. याचिका में यह भी आरोप लगाया गया था कि जिला प्रशासन की मदद से आयुष की व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्रभावित की जा रही है.
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने नौ सितंबर के आदेश में आयुष मलिक और उसके पिता देवराज मलिक को अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया था. आदेश के अनुपालन में आयुष को कोर्ट में पेश किया गया.
बयान के बाद मिली व्यक्तिगत स्वतंत्रता
अदालत में आयुष ने स्पष्ट रूप से कहा कि उसने अपनी इच्छा से धर्मांतरण किया है और चांदनी कुरैशी से निकाह भी उसकी अपनी मर्जी से हुआ है. उसके बयान के बाद हाईकोर्ट ने उसकी स्वतंत्र इच्छा को ध्यान में रखते हुए उसे अपनी मर्जी से रहने तथा धर्म चुनने की अनुमति दे दी.इस मामले की सुनवाई जस्टिस संदीप जैन की सिंगल बेंच में हुई.
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