मेरठ में वकील रवि गौतम को थप्पड़ ही थप्पड़ बरसाने के बाद चर्चा में आए… कौन हैं ‘क्लर्क’ के बेटे IPS अविनाश पांडे

यूपी तक

• 01:22 PM • 11 Jul 2026

Meerut SSP Avinash Pandey: ललिता गौतम हत्याकांड के बाद विवादों में घिरे मेरठ एसएसपी अविनाश पांडे की कार्रवाई, विपक्ष के आरोप, पुलिस का पक्ष, करियर, सख्त छवि और चर्चित फैसलों से जुड़ी पूरी कहानी विस्तार से जानिए.

SSP Avinash Pandey

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Meerut SSP Avinash Pandey: उत्तर प्रदेश के मेरठ में हुए ललिता गौतम हत्याकांड ने सूबे की सियासत में भूचाल ला दिया है. इस पूरे मामले को लेकर विपक्ष योगी सरकार और यूपी पुलिस पर लगातार हमलावर है. भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद ने मेरठ पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की, जिसके बाद टोल प्लाजा पर पुलिस से उनकी तीखी नोकझोंक हुई. सपा मुखिया अखिलेश यादव, बसपा सुप्रीमो मायावती और कांग्रेस भी लगातार यूपी पुलिस के रवैये को लेकर हमला बोल रही है. इस पूरे सियासी बवाल के केंद्र में हैं मेरठ के एसएसपी अविनाश पांडे. प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और गाड़ी में बंद लोगों खासकर एक वकील पर थप्पड़ बरसाने के आरोप के बाद सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक एसएसपी अविनाश पांडे निशाने पर हैं. पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर तो उनके खिलाफ मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराकर केस करने की तैयारी में हैं. हालांकि इन तमाम आरोपों और चौतरफा घिराव के बावजूद तेजतर्रार आईपीएस अविनाश पांडे बैकफुट पर आने के बजाय अपने उसी सख्त और अड़ियल मिजाज में खड़े दिखाई दे रहे हैं.

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एसएसपी अविनाश पांडे के तीखे तेवर

आमतौर पर मीडिया से दूरी बनाकर रखने वाले और तल्ख मिजाज माने जाने वाले एसएसपी अविनाश पांडे ने खुलकर पुलिसिया कार्रवाई का बचाव किया है. उन्होंने विरोध करने वालों और खुद को मिल रही धमकियों पर बेबाक अंदाज में कहा 'जो लोग मेरे विरोध में हैं, मैं उनसे भी अपील करना चाहूंगा कि वो दो पेड़ लगाएं और अपने गुस्से को समाज के लिए इस्तेमाल करें. किसी जाति विशेष की बात करने में या कानून व्यवस्था खराब करने वाले अपराधियों का साथ देने में अपनी ऊर्जा खर्च ना करें. जो लोग धमकी दे रहे हैं उनसे यही कहूंगा कि अगर कोई बात समझनी है तो सीधे हमसे आकर समझ लें.'

क्या था ललिता गौतम हत्याकांड? 

15 मई को टीपी नगर क्षेत्र से ललिता गौतम लापता हुई थीं जिनका शव 17 मई को रोटा क्षेत्र से बरामद हुआ. पुलिस ने 24 घंटे के भीतर मुख्य आरोपी (जो मृतका का पुराना परिचित था) को सीसीटीवी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. सबूत मिटाने और पुलिस को सूचना न देने के आरोप में आरोपी के भाई और खेत के मालिक का नाम भी मुकदमे में बढ़ाया गया.

तीन महिला अधिकारियों (सीओ सिविल लाइन, सीओ ब्रह्मपुरी और एसओ रोटा) ने पीड़ित परिवार के घर जाकर कई बार काउंसलिंग की थी जिससे परिवार संतुष्ट था. बिना अनुमति कुछ ऐसे संगठनों ने प्रदर्शन का आह्वान किया जिन पर खुद कई मुकदमे हैं. इन लोगों ने कलेक्टरेट गेट के सामने मुख्य सड़क जाम कर दी. जब महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें हटाने का प्रयास किया तो उनके साथ धक्का-मुक्की की गई जिससे एक महिला सब-इंस्पेक्टर मौके पर बेहोश हो गई. इसके बाद शहरवासियों और वकीलों की शिकायत पर पुलिस ने न्यूनतम बल का प्रयोग कर जाम हटवाया.

कौन हैं अविनाश पांडे?

एसएसपी अविनाश पांडे को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बेहद भरोसेमंद और रॉबिनहुड स्टाइल वाले अधिकारियों में गिना जाता है। बेहद साधारण परिवार से आने वाले अविनाश पांडे के पिता श्रवण पांडे कृषि विभाग में क्लर्क थे. खुद अविनाश पांडे ने आईपीएस बनने से पहले लंबा संघर्ष किया है.

वह डाक विभाग में लिपिक (क्लर्क) के पद पर सेवाएं दे चुके हैं. इसके बाद वह इनकम टैक्स विभाग में इंस्पेक्टर भी रहे. कठिन परिश्रम के बाद उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में हुआ और वह 2015 बैच के अधिकारी बने. कानपुर, बरेली, पीलीभीत, मैनपुरी और मऊ जैसे जिलों में तैनात रहकर उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई.

सख्त फैसलों के लिए जाने जाते हैं अविनाश पांडे

1.मऊ में तैनाती के दौरान मुख्तार अंसारी के रसूख और साम्राज्य को नेस्तनाबूद करने में अविनाश पांडे की बड़ी भूमिका रही. 

2.पंजाब की पुलिस चौकी पर ग्रेनेड हमला कर पीलीभीत भागे खालिस्तानी आतंकियों के एनकाउंटर के समय वह वहां तैनात थे जिसने खूब सुर्खियां बटोरी थीं. 

3.मेरठ में उन्होंने साफ रुख अपनाया था कि किसी भी कीमत पर सड़क पर नमाज नहीं होने दी जाएगी.

4.सीएए-एनआरसी बवाल (2019): जब वह मेरठ देहात के एसपी थे, तब उन्होंने बेहद तनावपूर्ण स्थिति को बखूबी संभाला था.

बता दें कि अविनाश पांडे को बेहतर पुलिसिंग के लिए उन्हें दो बार 'डीजीपी प्रशंसा चिन्ह' मिल चुका है. उन्हें 15 अगस्त 2022 को सिल्वर मेडल और 26 जनवरी 2025 को गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया था.

विभाग में खौफ और सरनेम की राजनीति

अविनाश पांडे का कड़क स्वभाव सिर्फ अपराधियों के लिए ही नहीं बल्कि लापरवाही बरतने वाले मातहतों के लिए भी सिरदर्द रहता है. एक बार उन्होंने मेरठ के महिला थाने का औचक निरीक्षण किया था और रजिस्टर गायब होने पर पूरे स्टाफ की क्लास लगाते हुए कड़ी कार्रवाई की थी. यही वजह है कि उनके गुस्से से खुद उनके विभाग के कई सिपाही और दरोगा भी परेशान रहते हैं.

फिलहाल, इस पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में दो फाड़ नजर आ रहे हैं. समर्थक जहां उनके सख्त मिजाज और अपराध मुक्त नीति की तारीफ कर रहे हैं, वहीं विपक्ष उन पर तानाशाही और जातिवाद का ठप्पा लगा रहा है. समर्थकों का तो यहां तक कहना है कि कुछ लोगों को उनके काम या शैली से नहीं बल्कि उनके सरनेम (पांडे) से ज्यादा दिक्कत हो रही है. बहरहाल मेरठ का यह सियासी और प्रशासनिक पारा फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है.