यूपी में ग्रीन हाइड्रोजन स्टार्टअप्स को 5 सालों तक 25 लाख रुपये सालाना की फंडिंग, इस दिशा में टेक्नोलॉजी लीडर बनेगा प्रदेश

UP Green Hydrogen Policy: उत्तर प्रदेश को देश का ग्रीन एनर्जी हब बनाने के लिए योगी सरकार ने अपने मेगा प्लान का ऐलान कर दिया है. नई नीति के तहत प्रदेश में 100 करोड़ रुपये की लागत से दो अत्याधुनिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे जो क्लीन फ्यूल तकनीक पर रिसर्च करेंगे.

CM Yogi

यूपी तक

20 Jan 2026 (अपडेटेड: 20 Jan 2026, 12:39 PM)

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UP Green Hydrogen Policy: उत्तर प्रदेश को देश का 'ग्रीन एनर्जी हब' बनाने की दिशा में योगी सरकार ने एक और क्रांतिकारी कदम उठाया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी के तहत शोध, नवाचार और स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के लिए अपने मेगा प्लान का खुलासा कर दिया है. सरकार न केवल ग्रीन हाइड्रोजन स्टार्टअप्स को भारी वित्तीय सहायता देगी, बल्कि प्रदेश में दो अत्याधुनिक 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' भी स्थापित करेगी. 

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स्टार्टअप्स के लिए 1.25 करोड़ रुपये का फंड

प्रदेश के युवाओं और उद्यमियों को ग्रीन एनर्जी सेक्टर से जोड़ने के लिए सरकार ने बड़ा प्रोत्साहन पैकेज तैयार किया है. ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में काम करने वाले स्टार्टअप्स को सरकार अगले 5 वर्षों तक हर साल 25 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करेगी. इस फंडिंग का लाभ लेने के लिए स्टार्टअप का किसी मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थान के इनक्यूबेटर से जुड़ा होना अनिवार्य है. इस कदम से शोध आधारित उद्यमिता (Research-based Entrepreneurship) को बढ़ावा मिलेगा और उद्योग जगत को नई स्वदेशी तकनीकें मिलेंगी.

100 करोड़ रुपये की लागत से बनेंगे दो 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस'

यूपी को ग्रीन हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी में देश का नेतृत्वकर्ता बनाने के लिए राज्य सरकार दो 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' (CoE) स्थापित करने जा रही है. ये सेंटर देश के टॉप शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से चलाए जाएंगे. प्रत्येक सेंटर को हाई-एंड रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए 50 करोड़ रुपये तक की 100% सरकारी सहायता मिलेगी. इन सेंटर्स का मुख्य काम ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, भंडारण (Storage), परिवहन और उपयोग की लागत को कम करना होगा. साथ ही, यहां होने वाली रिसर्च सीधे इंडस्ट्री की मांग के अनुसार होगी.

नेट जीरो लक्ष्य और गोरखपुर प्लांट की सफलता

भारत ने वर्ष 2070 तक 'नेट जीरो' (Net Zero) उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है, जिसमें उत्तर प्रदेश की भूमिका सबसे अहम होने वाली है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में गोरखपुर में प्रदेश के पहले ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट का उद्घाटन किया है. इस प्लांट से सालाना 500 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है. नई नीति और स्टार्टअप इकोसिस्टम से प्रदेश में बड़े पैमाने पर 'ग्रीन जॉब्स' (Green Jobs) पैदा होंगी, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे.  

नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन में यूपी की बढ़त

केंद्र सरकार के 'नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन' के साथ तालमेल बिठाते हुए यूपी अब टेक्नोलॉजी मैन्युफैक्चरिंग सेंटर बनने की ओर अग्रसर है. सरकार की रणनीति स्पष्ट है. सस्ती और स्वदेशी तकनीक विकसित करना ताकि राज्य न केवल ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बने, बल्कि भविष्य के क्लीन फ्यूल का निर्यात केंद्र भी बन सके.

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