UP News: उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है. औद्योगिक क्षेत्रों में पारदर्शिता, गुणवत्ता और निगरानी को मजबूत करने के लिए अब ड्रोन तकनीक का सहारा लिया जाएगा, जिससे विकास कार्यों पर पैनी नजर रखी जा सकेगी. यूपी राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) की 50वीं बोर्ड बैठक में ऐसे कई अहम फैसले लिए गए, जो प्रदेश के औद्योगिक ढांचे को नई मजबूती देने वाले माने जा रहे हैं. इस बैठक में न सिर्फ ड्रोन आधारित मॉनिटरिंग और ई-ऑक्शन जैसे आधुनिक कदमों को मंजूरी मिली, बल्कि भूमि बैंक विस्तार, तेज इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और निवेशकों को बेहतर सुविधाएं देने पर भी जोर दिया गया. इन फैसलों को प्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ाने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
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लोक भवन में सम्पन्न हुई यूपीसीडा की 50वीं बोर्ड बैठक
लखनऊ में 1 अप्रैल को लोक भवन में उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) की 50वीं बोर्ड बैठक आयोजित की गई. यह बैठक अपर मुख्य सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आलोक कुमार की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के अनुरूप आयोजित इस बैठक में औद्योगिक विकास, आधारभूत संरचना सुदृढ़ीकरण और निवेश प्रोत्साहन से जुड़े कुल 34 प्रस्तावों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया और कई प्रमुख प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की गई.
गुणवत्ता और पारदर्शिता के लिए ड्रोन आधारित मॉनिटरिंग लागू
बैठक में विकास एवं अनुरक्षण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए तृतीय पक्ष निरीक्षण (TPIA) एजेंसी के चयन को मंजूरी दी गई. इसके साथ ही औद्योगिक क्षेत्रों में पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ड्रोन आधारित मॉनिटरिंग प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया गया. इस प्रणाली के माध्यम से सिविल, विद्युत और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े कार्यों की नियमित निगरानी की जाएगी, जिससे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता को बेहतर बनाया जा सकेगा.
कई औद्योगिक क्षेत्रों के मानचित्रों को मिली स्वीकृति
बैठक में कम्पिल कताई मिल, मऊ आइमा, बहादुरगंज, सलेमपुर और बाराबंकी के औद्योगिक क्षेत्रों के मानचित्रों को स्वीकृति प्रदान की गई. वहीं बलिया, हाथरस, फतेहपुर, बाराबंकी और चित्रकूट के औद्योगिक क्षेत्रों के प्रस्तावों पर विचार करते हुए संशोधन के निर्देश दिए गए और संशोधित तलपट (लेआउट) मानचित्र को मंजूरी दी गई.
भूमि बैंक सुदृढ़ करने और आवंटन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने पर जोर
भूमि बैंक को मजबूत बनाने के लिए नीतिगत संशोधन के निर्देश दिए गए. इसके साथ ही भूमि आवंटन की प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए संशोधित योजना तैयार करने और प्राप्त आवेदनों पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया.
एक महत्वपूर्ण निर्णय के तहत यह तय किया गया कि आवंटन योग्य भूमि का 75 प्रतिशत आवंटन पूर्ण होने के बाद शेष 25 प्रतिशत भूमि का आवंटन ई-ऑक्शन के माध्यम से किया जाएगा. इस व्यवस्था से पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. साथ ही यह भी निर्देश दिया गया कि चल रही परियोजनाओं में विकास कार्य जारी रखते हुए समानांतर रूप से आवंटन प्रक्रिया संचालित की जाए, ताकि निवेश की गति को तेज किया जा सके.
सहारनपुर और बदायूं में औद्योगिक विस्तार को मिलेगी रफ्तार
सहारनपुर और बदायूं में प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के संदर्भ में निर्देश दिए गए कि अधिग्रहण से पहले सड़क संपर्क और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं को दुरुस्त किया जाए. इससे औद्योगिक इकाइयों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकेगी और औद्योगिक विस्तार को गति मिलेगी.
एक वर्ष में तेज इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का लक्ष्य
बैठक में यह भी निर्देशित किया गया कि अवस्थापना विकास के लिए शासन द्वारा उपलब्ध कराए गए वित्तपोषण का प्रभावी उपयोग करते हुए एक वर्ष के भीतर बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विकास सुनिश्चित किया जाए. साथ ही निवेशकों की समस्याओं के समाधान के लिए विशेष कैंप आयोजित कर एक माह के भीतर उनका निस्तारण करने के निर्देश दिए गए.
विश्वस्तरीय औद्योगिक ईकोसिस्टम बनाने पर जोर
अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार ने कहा कि यूपीसीडा का लक्ष्य केवल औद्योगिक भूखंडों का आवंटन करना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में एक विश्वस्तरीय औद्योगिक ईकोसिस्टम का निर्माण करना है, जहां तकनीक, पारदर्शिता और दक्षता के आधार पर उद्यमियों को बेहतर वातावरण मिल सके. उन्होंने कहा कि ड्रोन आधारित निगरानी, डिजिटल सेवाएं और पारदर्शी आवंटन प्रक्रिया जैसे निर्णय प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगे.
बैठक के अंत में अध्यक्ष ने निर्देश दिए कि सहारनपुर और बदायूं जैसे क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण के दौरान कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि औद्योगिक विकास को दीर्घकालिक मजबूती मिल सके.
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