स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर को लेकर पूरे देश में बवाल है. विपक्षी पार्टी का आरोप है कि केंद्रीय चुनाव आयोग सत्ताधारी पार्टी बीजेपी के साथ मिलकर वोट काटने का काम कर रही है. वहीं एसआईआर को जमीन पर उतारने वाले बूथ लेवल ऑफिसर यानी बीएलओ लगातार काम के दबाव का आरोप लगा रहे हैं. लेकिन इस बीच शनिवार को बीएलओ और उनके सुपरवाइजर के मानदेय को बढ़ाने जानकारी सामने आई. न्यूज एजेंसी ने चुनाव आयोग का एक लेटर एक्स पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी. लेकिन इस फैसले की डेट को लेकर सोशल मीडिया पर हल्ला मच गया. इस लेटर पर 2 अगस्त 2025 की डेट लिखी हुई है. इसे सर्च करने पर भारत सरकार के प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो ऑफ इंडिया (PIB) की 2 अगस्त की न्यूज रिलीज मिली है. इसमें चुनाव आयोग के इस फैसले की जानकारी दी गई है. अब जब यूपी समेत देशभर से SIR को लेकर BLO के दबाव में होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो इस लेटर की टाइमिंग की चर्चा हो रही है.
ADVERTISEMENT
बता दें कि बीते कुछ दिनों पहले फतेहपुर में सुधीर कोरी नाम के एक BLO ने अपनी जान दे दी थी. सुधीर कोरी की मौत के बाद उनके परिवार ने कई गंभीर आरोप लगाए थे. सपा चीफ अखिलेश यादव भी आरोप लगा रहे हैं कि भाजपा सरकार BLO पर गलत काम करने का दबाव डाल रही है, इसलिए वो जान दे रहे हैं.
अब 6000 नहीं 12000 मिलेगा बीएलओ को मानदेय
न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक चुनाव आयोग ने बूथ लेवल ऑफिसर्स का मानदेय ₹6000 से बढ़ाकर ₹12,000 कर दिया है. बीएलओ सुपरवाइजर का मानदेय ₹12,000 से बढ़ाकर ₹18,000 कर दिया है. इसके अलावा वोटर लिस्ट में सुधार और संशोधन का काम करने वाले BLO को मिलने वाला इंसेंटिव भी बढ़ा दिया गया है. अब उन्हें 1,000 रुपये की जगह 1,800 रुपये मिलेंगे. लेकिन इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर एक दूसरी चर्चा भी हो रही है वो है इसकी तारीख को लेकर. दरअसल जो पत्र चुनाव आयोग की तरफ से जारी किया गया है उसमें तारीख 2 अगस्त 2025 की है. इसे पुराना फैसला बताया जा रहा है. ऐसे में अब इसे लेकर लोग सवाल खड़े कर रहे है कि इतने दिनों के बाद इसकी घोषणा क्यों की जा रही है.
BLO की हो रही ये परेशानी
बूथ लेवल ऑफिसर यानी कि बीएलओस एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर बहुत परेशान नजर आ रहे हैं. उनका कहना है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर के चक्कर में उनका खाना पीना घर बच्चे सब छूटे जा रहा है. इस प्रोग्राम के दौरान कुछ बीएलओस की मौत भी हुई है जिस पर परिवार वालों ने काम का प्रेशर अधिक होने का आरोप लगाया है. कुछ ऐसी घटनाएं यूपी में भी हुई हैं . फतेहपुर में एसआईआर के दौरान शादी में छुट्टी ना मिलने को लेकर दलित लेखपाल सुधीर कोरी ने अपनी जान दी जिसके बाद उनके घर विपक्षी नेता अखिलेश यादव पहुंचे थे.
ऐसे में एक तरफ जहां BLO के उपर काम को लेकर बनाए जा रहे दबाव को लेकर अफरातफरी मची हुई है. तो वहीं दूसरी ओर अधिकारी बीएलओस और सुपरवाइजर को अलग-अलग किस्म से लुभा रहे हैं. समय से काम पूरा करने वालों को बकायदा डीएम सम्मानित कर रहे हैं तो कहीं जंगल सफारी के पैकेज का ऑफर दिया जा रहा है.
ये भी पढ़ें: सपा की इस बागी विधायक के घर पहुंचे अखिलेश यादव, सोशल मीडिया पर वायरल इस तस्वीर की क्या है इनसाइड स्टोरी
ADVERTISEMENT









