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फूलपुर विधानसभा समीकरण 2027: क्या सपा बिगाड़ेगी भाजपा का खेल? जानिए जातीय गणित और जमीनी हकीकत

Phoolpur Vidhansabha Seat: फूलपुर विधानसभा सीट पर 2027 के लिए सियासी पारा चढ़ने लगा है. जहां भाजपा विकास का दावा कर रही है, वहीं सपा जातीय समीकरणों के सहारे वापसी की जुगत में है. देखिए क्या कहता है यहां का गणित.

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प्रयागराज की फूलपुर विधानसभा सीट का राजनीतिक और जातीय समीकरण काफी दिलचस्प है. साल 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अभी से बिसात बिछनी शुरू हो गई है. यहाँ ओबीसी (OBC) मतदाता हमेशा से ही निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं. आपको बता दें कि फूलपुर विधानसभा सीट साल 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई. शुरुआत में यहां कांग्रेस और सपा का दबदबा था, लेकिन साल 2017 से भाजपा ने यहां अपनी मजबूत पकड़ बना ली है. प्रवीण सिंह पटेल ने यहां से 2017 और 2022 में जीत दर्ज की. 2024 में उनके सांसद बनने के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा के दीपक पटेल ने जीत हासिल की. 

जातीय गणित (कुल मतदाता: लगभग 4.70 लाख)

फूलपुर में जातीय समीकरण ही खेल बनाता और बिगाड़ता है: 

  • कुर्मी/पटेल: 70,000 से अधिक (निर्णायक भूमिका)
  • यादव: 70,000 से अधिक
  • दलित: 80,000
  • मुस्लिम: 50,000
  • ब्राह्मण: 50,000
  • मौर्या/पाल/कुशवाहा: लगभग 70,000 (35,000 + 35,000)
  • ठाकुर/क्षत्रिय: 20,000

2027 के लिए दावे और चुनौतियां

भाजपा का पक्ष: विधायक दीपक पटेल का कहना है कि डबल इंजन सरकार के विकास कार्यों और बेहतर कानून व्यवस्था (गुंडा राज खत्म करने) के दम पर वे 2027 में फिर जीतेंगे. 
सपा का पक्ष: समाजवादी पार्टी का दावा है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा प्रत्याशी को फूलपुर विधानसभा क्षेत्र में पीछे छोड़ दिया था, जिससे स्पष्ट है कि जनता अब बदलाव चाहती है. वे विकास और रोजगार के मुद्दों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं. 

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पत्रकारों का विश्लेषण

वरिष्ठ पत्रकारों के अनुसार, भाजपा की जीत का मुख्य कारण पटेल, ब्राह्मण और अन्य पिछड़ी जातियों का एक साथ आना (जुगलबंदी) रहा है. वहीं मुस्लिम मतदाता सपा और कभी-कभी बसपा के बीच बंट जाते हैं.