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क्या चरथावल में फिर चलेगा पंकज मलिक का जादू? समझिए जयंत-अखिलेश विवाद के बीच पश्चिमी यूपी के सियासी समीकरण

मुजफ्फरनगर की चरथावल सीट पर 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज है. सपा विधायक पंकज मलिक की पकड़, बीजेपी की रणनीति, जाट-मुस्लिम समीकरण और जयंत-अखिलेश विवाद के बीच चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प होने के संकेत मिल रहे हैं.

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Charthawal Assembly Election 2027
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Charthawal Vidhan Sabha 2027: मुजफ्फरनगर सांसद हरेंद्र मलिक के बेटे और समाजवादी पार्टी से चरथावत (चरथावल) विधानसभा के विधायक पंकज मलिक की राजनीतिक जमीन को लेकर चर्चाएं गर्म हैं. एक तरफ जहां आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बीच 'चवन्नी' वाले बयान को लेकर जुबानी जंग छिड़ी और इसे जाट अस्मिता से जोड़ा गया. वहीं दूसरी तरफ सवाल उठ रहा है कि क्या जाट प्रभाव वाली इस सीट पर पंकज मलिक वापसी कर पाएंगे? बीएसपी के गढ़ से बीजेपी और फिर सपा के पाले में आई चरथावल सीट का सियासी गणित और 2027 के चुनावी समीकरण क्या इशारा कर रहे हैं, आइए विस्तार से जानते हैं.

चरथावल सीट का इतिहास

चरथावल सीट का चुनावी इतिहास देखें तो यह क्षेत्र किसी एक दल के वर्चस्व में नहीं रहा है.

2002 और 2007: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की उमा और अनिल कुमार ने जीत दर्ज की.

2012 और 2017: बीएसपी और फिर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से विजय कुमार कश्यप विधायक बने.

2022: कांग्रेस छोड़कर सपा में आए पंकज मलिक ने इस सीट पर जीत दर्ज की.

सड़क से सदन तक उठाई जनता की आवाज - पंकज मलिक

सपा विधायक पंकज मलिक का कहना है कि विपक्ष में रहने के बावजूद उन्होंने क्षेत्र के विकास में कोई कमी नहीं छोड़ी.

पंकज मलिक का दावा है कि एक विपक्षी विधायक के तौर पर उन्होंने क्षेत्र में अभूतपूर्व काम कराया है और बचे हुए गांवों में भी विकास कार्य प्रस्तावित हैं. उनका कहना है कि सपा कार्यकर्ता संविधान में विश्वास रखते हैं और जनता के हक, रोजगार, युवाओं और महिलाओं के सम्मान की लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक लड़ते हैं.

2027 में प्रचंड बहुमत से जीतेंगे- बीजेपी

बीजेपी जिलाध्यक्ष के अनुसार, 2022 में मतदाताओं का निर्णय सिर माथे पर था, लेकिन 2027 के लिए संगठन पूरी तरह तैयार है. मंडल, शक्ति केंद्र और बूथ कमेटियां 2017 से योगी सरकार द्वारा किए गए विकास कार्यों को लेकर घर-घर जा रही हैं. स्थानीय चर्चाओं के मुताबिक, पूर्व मंत्री दिवंगत विजय कश्यप की पत्नी सपना कश्यप को बीजेपी मैदान में उतार सकती है जिससे पार्टी को सहानुभूति का फायदा भी मिल सकता है.

किस वर्ग का कितना दबदबा?

चरथावल विधानसभा में लगभग 3 लाख से अधिक मतदाताओं का गणित बेहद दिलचस्प है.

मुस्लिम मतदाता: 1,25,000 (सबसे बड़ा वर्ग)

दलित मतदाता: 60,000

जाट मतदाता: 40,000

कश्यप मतदाता: 30,000

क्षत्रिय: 25,000 

त्यागी: 15,000 

सैनी: 10,000 

ब्राह्मण: 10,000

मलिक परिवार का जाट मतदाताओं पर खासा प्रभाव माना जाता है. जब इस वोट बैंक के साथ मुस्लिम और दलित मतदाताओं का कॉम्बिनेशन बनता है तो 2022 की तरह पंकज मलिक के लिए राह आसान हो जाती है (उन्हें 90,000 से अधिक वोट मिले थे).

क्या जयंत-अखिलेश विवाद से बदलेगा समीकरण?

जयंत चौधरी द्वारा जाट अस्मिता के मुद्दे को उठाने के बाद सवाल है कि क्या जाट वोट बैंक पंकज मलिक से छिटकेगा? ग्राउंड रिपोर्ट और स्थानीय पत्रकारों के अनुसार चरथावल में फिलहाल वर्तमान विधायक पंकज मलिक की पकड़ काफी मजबूत है. यदि बीजेपी को यहां सेंध लगानी है तो उसे किसी बड़े 'हैवीवेट' चेहरे को मैदान में उतारना होगा. कुल मिलाकर पंकज मलिक की जमीन मजबूत नजर आ रही है. लेकिन 2027 के चुनाव में जीत इस बात पर निर्भर करेगी कि वे जातीय और राजनीतिक समीकरणों को कैसे साध पाते हैं.

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