लेटेस्ट न्यूज़

महोबा की सदर सीट बसपा से छीनकर क्या 2027 में भी जीत पाएगी बीजेपी?

महोबा विधानसभा सीट पर 2027 चुनाव से पहले सियासी समीकरणों, जातीय गणित और विकास कार्यों को लेकर चर्चा तेज है. बीजेपी विधायक राकेश गोस्वामी के दावों, सपा के आरोपों और पेयजल, बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर जानिए महोबा का पूरा चुनावी हाल.

ADVERTISEMENT

CM Yogi and Mayawati
CM Yogi and Mayawati
social share
Google CTA

बुंदेलखंड की वीरभूमि महोबा चंदेल राजाओं की ऐतिहासिक विरासत, आल्हा-उदल की अमर गाथाओं और प्राचीन सरोवरों के लिए पहचानी जाने वाली यह सीट कभी बहुजन समाज पार्टी (BSP) का मजबूत गढ़ हुआ करती थी. समय के साथ यहां की राजनीतिक हवा बदली और वर्तमान में इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का कब्जा है. यूपी Tak के खास शो 'यूपी किसका' में महोबा विधानसभा सीट के सियासी समीकरणों, विकास कार्यों और 2027 के चुनावी माहौल की गहन पड़ताल सामने आई है.

महोबा का राजनीतिक इतिहास और पिछले चुनावी नतीजे

महोबा सदर सीट के चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो यहां अलग-अलग समय पर विभिन्न दलों को जनता का समर्थन मिलता रहा है. साल 2007 के बाद इस सीट का परिसीमन हुआ था, जिसके बाद के आंकड़े इस प्रकार हैं.

2007: बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर राकेश कुमार विजयी हुए.

2012: बसपा के ही राजनारायण उर्फ रज्जू ने यहां जीत दर्ज की.

2017: राजनीतिक बदलाव के साथ बीजेपी के राकेश कुमार गोस्वामी ने बाजी मारी.

2022: बीजेपी विधायक राकेश गोस्वामी ने 94,490 वोट हासिल कर दोबारा शानदार जीत दर्ज की. इस चुनाव में समाजवादी पार्टी के मनोज तिवारी दूसरे और बसपा के संजय कुमार साहू 38,296 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे थे. खास बात यह है कि 2022 के चुनाव में भी बसपा लगभग 18% वोट पाने में कामयाब रही थी.

जातीय समीकरण और मतदाता गणित

महोबा विधानसभा क्षेत्र में कुल मतदाताओं की संख्या करीब 3 लाख है. यहां का चुनावी समीकरण यहां की जातियों और समुदायों पर बहुत हद तक निर्भर करता है.

दलित मतदाता: इनकी संख्या लगभग 60,000 है, जो निर्णायक भूमिका निभाते हैं.

सवर्ण और अन्य जातियां: ठाकुर और ब्राह्मण समाज के मतदाता करीब 18,000-18,000 बताए जाते हैं.

पिछड़े और अन्य वर्ग: साहू, कुशवाहा, लोधी, यादव, मुस्लिम और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के मतदाता भी चुनावी हार-जीत में अहम प्रभाव रखते हैं.

वर्तमान विधायक के विकास दावे बनाम विपक्ष के आरोप

विधायक के दावे: वर्तमान बीजेपी विधायक राकेश गोस्वामी का कहना है कि उन्होंने क्षेत्र में स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम किए हैं. उन्होंने ट्रामा सेंटर, 200 बेड के नए अस्पताल, जिला अस्पताल के बेड 70 से बढ़ाकर 150 करने, डिग्री कॉलेज में एमए की कक्षाएं शुरू कराने और कई अधूरे पड़े इंटर कॉलेजों का संचालन कराने का दावा किया है. इसके अलावा परमानंद से झलकारी बाई और हमीरपुर चुंगी से लेकर विभिन्न मार्गों पर फोर-लेन सड़कों के निर्माण को अपनी बड़ी उपलब्धि बताया है.

समाजवादी पार्टी का पलटवार: दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी ने सत्ता पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं. सपा नेताओं का दावा है कि 2022 और 2024 के चुनावों में बेईमानी और प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग किया गया. सपा का कहना है कि अब जनता का 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग पूरी तरह जाग चुका है और आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में बदलाव तय है.

जमीनी मुद्दे और 2027 का संभावित मुकाबला

स्थानीय पत्रकारों और जानकारों के अनुसार, महोबा की अर्थव्यवस्था में पत्थर खनन (क्रशर उद्योग) की बड़ी भूमिका है जिससे अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों को रोजगार मिलता है. हालांकि आज भी कई इलाकों में पेयजल की गंभीर समस्या, बेरोजगारी और पलायन बड़े मुद्दे बने हुए हैं.

विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव भले ही पारंपरिक रूप से जाति और धर्म के इर्द-गिर्द सिमटता नजर आता हो लेकिन युवाओं की एक बड़ी संख्या अब रोजगार और बेहतर कानून-व्यवस्था जैसे विकास के मुद्दों पर बात कर रही है. फिलहाल 2027 के रण में सीधी टक्कर बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच दिख रही है. लेकिन राजनीतिक दलों द्वारा आधिकारिक प्रत्याशी घोषित होने के बाद ही असली तस्वीर साफ हो सकेगी.

 ये भी पढ़ें: क्या सिराथू छोड़कर प्रयागराज की शहर उत्तरी से चुनाव लड़ेंगे केशव मौर्य?