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मुजफ्फरनगर की पुरकाजी सीट पर RLD के अनिल कुमार या बीजेपी के ऊंटवाल, किसे मिलेगा टिकट?

मुजफ्फरनगर की पुरकाजी सीट पर मंत्री अनिल कुमार और पूर्व विधायक प्रमोद उटवाल के बीच टिकट की दावेदारी चर्चा में है. RLD-BJP गठबंधन, सपा-कांग्रेस और अन्य दलों की रणनीति से 2027 का चुनावी मुकाबला दिलचस्प हो सकता है.

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Purkaji seat of Muzaffarnagar
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उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले की हॉट और सुरक्षित मानी जाने वाली पुरकाजी विधानसभा सीट पर 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ही सियासी पारा हाई हो गया है. राष्ट्रीय लोक दल (RLD) कोटे से योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और पुरकाजी से विधायक अनिल कुमार के सामने इस बार टिकट को लेकर बड़ा पेंच फंसता नजर आ रहा है. एक तरफ जहां गठबंधन बदलने के बाद आरएलडी और बीजेपी के बीच सीट के बंटवारे पर कयासों का दौर जारी है. वहीं दूसरी तरफ पूर्व भाजपा विधायक प्रमोद उटवाल भी अपनी दावेदारी पूरी मजबूती से ठोक रहे हैं. इसके अलावा विपक्षी खेमे (सपा-कांग्रेस) और छोटे दलों की सक्रियता ने इस सीट को चुनाव से पहले ही सबसे दिलचस्प बना दिया है.

बसपा से आरएलडी और फिर मंत्री बनने तक का सफर

पुरकाजी विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास काफी रोमांचक रहा है.

अनिल कुमार का सियासी सफर: कभी बहुजन समाज पार्टी (BSP) से विधायक रहे अनिल कुमार बाद में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन के तहत राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के सिंबल पर चुनावी मैदान में उतरे.

2022 का मुकाबला: 2022 के विधानसभा चुनाव में आरएलडी-सपा गठबंधन के टिकट पर लड़ते हुए अनिल कुमार ने बीजेपी प्रत्याशी प्रमोद उटवाल को बेहद कांटे के मुकाबले में मात दी थी. इस दौरान गठबंधन के कारण क्षेत्र में वोटों का समीकरण उनके पक्ष में रहा था.

मंत्री पद का सफर: राजनीतिक समीकरण बदलने के बाद जब जयंत चौधरी एनडीए गठबंधन में शामिल हुए तो आरएलडी कोटे से दलित समुदाय के कद्दावर चेहरे अनिल कुमार को योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री बना दिया गया.

बीजेपी बनाम आरएलडी: पुरकाजी सीट पर टिकट का पेच

2027 के चुनाव को लेकर पुरकाजी सीट पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह सीट किस दल के खाते में जाएगी.

आरएलडी का दावा: यदि एनडीए गठबंधन के तहत यह सीट आरएलडी के कोटे में बरकरार रहती है तो वर्तमान विधायक और मंत्री अनिल कुमार का टिकट तय माना जा रहा है.

बीजेपी के दावेदार: वहीं, अगर यह सीट भारतीय जनता पार्टी के पाले में जाती है, तो पूर्व विधायक प्रमोद उटवाल सबसे मजबूत दावेदार के रूप में ताल ठोक रहे हैं जो पहले भी यहां से प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. इसके अलावा पार्टी में अन्य स्थानीय चेहरों को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं.

सपा-कांग्रेस गठबंधन और अन्य दलों की घेराबंदी

पुरकाजी सीट पर विपक्षी दलों की रणनीतियों ने मुकाबले को त्रिकोणीय या बहुकोणीय बना दिया है.

सपा-कांग्रेस खेमा: आरएलडी के एनडीए में जाने के बाद अब यह सीट समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन के दायरे में आती है. सपा से दीप्ति पाल और उमा किरण के नाम चर्चा में हैं जबकि कांग्रेस की ओर से दीपक कुमार भी अपनी दावेदारी मजबूती से पेश कर रहे हैं.

अन्य दलों की एंट्री: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की ओर से कविता देवी को उम्मीदवार बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है. इसके साथ ही आजाद समाज पार्टी (चंद्रशेखर आजाद की पार्टी) और असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM के मैदान में उतरने के कयासों ने सियासी पारा और बढ़ा दिया है.

मुस्लिम और दलित वोटर: पुरकाजी में करीब 1.20 लाख मुस्लिम मतदाता हैं. ऐसे में AIMIM और आजाद समाज पार्टी के चुनाव लड़ने से सपा-कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगने का खतरा है जिसका सीधा असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है.

बहरहाल पुरकाजी सीट पर मंत्री अनिल कुमार की राजनीतिक साख दांव पर है और यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि 2027 के रण में एनडीए और विपक्षी दल इस सीट की बाजी किसके हाथ में सौंपते हैं.

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