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कौन थे वो कम्युनिस्ट नेता जो अखिलेश यादव के बने पहले पोलिटिकल गुरु? 1996 से 1998 के बीच सपा चीफ ने जो दीक्षा ली उसका अब कोई तोड़ नहीं!

Charcha Mein: अखिलेश यादव के जन्मदिन पर जानिए उनके राजनीतिक सफर की अनसुनी कहानी. हरकिशन सिंह सुरजीत से मिली सीख, पारिवारिक संघर्ष, मुख्यमंत्री बनने का सफर, चुनावी उतार-चढ़ाव और 2024 की ऐतिहासिक वापसी ने कैसे बनाया उन्हें विपक्ष का बड़ा चेहरा.

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Akhilesh Yadav Special Story
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Akhilesh Yadav: यूं ही नहीं कोई अखिलेश यादव हो जाता है. एक ऐसा नेता जिसे कभी विरोधियों ने राजनीति का नौसिखिया कहा, टीपू कहकर तंज कसे. लेकिन आज वही नेता भारतीय राजनीति में समूचे विपक्ष की बैकबोन बनकर उभरा है. 38 साल की उम्र में उत्तर प्रदेश का सबसे युवा मुख्यमंत्री बनने वाले अखिलेश यादव ने विरासत तो संभाली लेकिन उसके साथ बगावत भी झेली. उन्होंने परिवार भी बचाया और बिखरती पार्टी को भी संभाला। हार के गहरे गर्त को भी देखा और ऐसी ऐतिहासिक वापसी की कि आज देश की राजनीति का रुख बदल गया. शांत, पढ़े-लिखे और टेक्नोलॉजी पसंद युवा नेता जो अक्सर पत्रकारों को भी AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं. 1 जुलाई को अखिलेश यादव का था. समर्थकों से लेकर विरोधियों तक ने अखिलेश यादव को बधाई दी. आइए जानते हैं अखिलेश यादव के उस सफर की कहानी, जिसने उन्हें एक साधारण राजनेता से भारतीय राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा बना दिया.