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मायावती ने जाहिर की ये आशंका और भतीजी दीपिका आनंद के लिए भी बंद किए बसपा के दरवाजे, अब किसे किया जाएगा आगे?

बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने अपने भाई आनंद कुमार के परिवार को लेकर एक बार फिर बड़ा फैसला किया है. कुछ दिन पहले तक जिस दीपिका आनंद को लेकर बसपा में राजनीतिक जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही थी, अब मायावती ने उन्हें भी पार्टी की जिम्मेदारियों से दूर रखने का फैसला किया है.

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Deepika Anand and Mayawati
Deepika Anand and Mayawati (File Photo)
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Mayawati BSP Decision News: बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने अपने भाई आनंद कुमार के परिवार को लेकर एक बार फिर बड़ा फैसला किया है. कुछ दिन पहले तक जिस दीपिका आनंद को लेकर बसपा में राजनीतिक जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही थी, अब मायावती ने उन्हें भी पार्टी की जिम्मेदारियों से दूर रखने का फैसला किया है. अपने सोशल मीडिया पोस्ट में मायावती ने परिवार को लेकर काफी कुछ कहा है.

मायावती ने अपने पोस्ट में कहा कि आकाश आनंद को पार्टी से अलग करने के बाद उनके सामने यह सवाल था कि आनंद कुमार के परिवार में से किसे आगे किया जाए और किसे नहीं. उन्होंने कहा कि काफी गंभीरता से विचार करने के बाद उन्होंने फैसला लिया है कि परिवार के किसी ऐसे सदस्य को आगे किया जाए, जो आकाश के नक्शेकदम पर न चले.

मायावती ने दीपिका आनंद का नाम लेते हुए कहा कि उनकी शादी के बाद अगर उनका मामला भी आकाश आनंद की तरह निकला तो यह पार्टी हित में सही नहीं होगा. इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए उन्होंने कहा कि आकाश आनंद और उनकी बहन को पार्टी की किसी भी छोटी-बड़ी जिम्मेदारी से पूरी तरह दूर रखा जाएगा और इस फैसले में अब कोई बदलाव नहीं होगा.
 

यह फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे पहले मायावती ने आनंद कुमार की बेटी दीपिका आनंद को लेकर अलग रुख अपनाया था. 12 सितंबर के बयान में उन्होंने कहा था कि यदि आनंद कुमार को संगठनात्मक काम में मदद की जरूरत हो तो वह अपनी बेटी दीपिका की सहायता ले सकते हैं. उस समय दीपिका को पार्टी में भविष्य की भूमिका मिलने की संभावना के तौर पर देखा गया था.

अब मायावती के ताजा बयान से दीपिका को लेकर भी स्थिति बदल गई है. उन्होंने कहा कि आनंद कुमार के परिवार में से केवल ईशान आनंद को सम्मानजनक जिम्मेदारी देकर आगे किया जाएगा, लेकिन अगर ईशान ने भी कोई गंभीर पार्टी विरोधी कृत्य किया तो उन्हें भी बाहर कर दिया जाएगा. इसके बाद आनंद कुमार के परिवार के किसी भी सदस्य को पार्टी में जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी.

मायावती ने अपने फैसले को कांशीराम और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के उदाहरण से जोड़ते हुए कहा कि पार्टी और मूवमेंट के हित में वह अपने भाई-बहनों और रिश्तेदारों के खिलाफ भी कदम उठा सकती हैं. उन्होंने डॉ. आंबेडकर के 1956 में अपने बेटे यशवंत आंबेडकर को लिखे पत्र का हवाला देते हुए सार्वजनिक संपत्ति और संगठन में अनियमितता के खिलाफ सख्त रुख का उदाहरण दिया.

मायावती के इस बयान के बाद अब बसपा में परिवार की भूमिका को लेकर तस्वीर एक बार फिर बदल गई है. पहले आकाश आनंद को लेकर बड़ा बदलाव हुआ, फिर ईशान आनंद को संगठन में जिम्मेदारी देने के बाद उससे दूर किया गया और अब दीपिका आनंद को लेकर भी मायावती ने स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें पार्टी की जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी. 23 सितंबर को होने वाली बसपा की ऑल इंडिया बैठक में इस फैसले और पार्टी संगठन को लेकर आगे की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है.