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'हर जगह जंतर-मंतर बन जाएगा...' सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार को दी खुली चुनौती, कह दी ये बड़ी बात!

दिल्ली में जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित धरने को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है. मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर होने वाले इस प्रदर्शन से पहले दिल्ली और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है.

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Akhilesh Yadav
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Akhilesh Yadav On CJP Protest: दिल्ली में जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित धरने को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है. मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर होने वाले इस प्रदर्शन से पहले दिल्ली और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन अलर्ट पर है. दिल्ली से सटे नोएडा, गाजियाबाद और दूसरे बॉर्डर पर पुलिस के साथ अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है. इस बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में बयान देते हुए सरकार को चुनौती दी है. उन्होंने कहा कि अगर आंदोलनकारियों को रोका गया तो देश के अलग-अलग हिस्सों में जंतर-मंतर बन जाएगा. ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि क्या CJP के इस आंदोलन को विपक्षी दलों का व्यापक समर्थन मिलने वाला है?

प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सुरक्षा सख्त

CJP के धरने को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं. प्रदर्शन का उद्देश्य मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठाना है. हालांकि, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर इस प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है. इसके बावजूद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी है, ताकि किसी भी स्थिति से निपटा जा सके. दिल्ली में आने-जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई है और कई स्थानों पर पुलिसकर्मी तैनात हैं. दिल्ली की ओर आने वाले लोगों की जांच की जा रही है. प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पहुंच रहे युवाओं को भी रोके जाने की जानकारी सामने आई है. सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स की ओर से युवाओं को हिरासत में लिए जाने के दावे भी किए जा रहे हैं.

अखिलेश यादव ने कहा- अब दिल्ली में देश जुटेगा

CJP के आंदोलन को लेकर अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर अपना रुख साफ किया. उन्होंने लिखा, 'किसी के रोके नहीं रुकेगा. अब दिल्ली में देश जुटेगा.' अखिलेश ने कहा कि उनकी पार्टी देश की युवा ऊर्जा के साथ खड़ी है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर भाजपा सरकार यह सोच रही है कि ताकत के बल पर जनता को रोका जा सकता है तो यह उसकी और बड़ी भूल साबित होगी. अखिलेश के मुताबिक जंतर-मंतर अब केवल एक जगह का नाम नहीं रह गया है, बल्कि यह नई चेतना और जागरण का प्रतीक बन गया है. उन्होंने आगे कहा कि अगर सरकार ने आंदोलनकारियों को रोका तो देश में हर जगह जंतर-मंतर बन जाएगा. अपने बयान में उन्होंने शायराना अंदाज अपनाते हुए सरकार के सुरक्षा इंतजामों और युवाओं के हौसले का भी जिक्र किया.

आंदोलन को देशव्यापी बनाने की तैयारी में विपक्ष?

अखिलेश यादव के बयान के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या CJP के आंदोलन को लेकर विपक्षी दल आगे भी साथ खड़े रहेंगे. उन्होंने अपने संदेश में कहा कि युवाओं की ताकत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. साथ ही आंदोलन को रोकने की किसी भी कोशिश पर देश के दूसरे हिस्सों में भी विरोध प्रदर्शन होने की बात कही. उनके बयान को दिल्ली में होने वाले धरने के समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, इस जानकारी में समाजवादी पार्टी की ओर से देशव्यापी प्रदर्शन की किसी औपचारिक योजना की घोषणा का जिक्र नहीं है. फिलहाल राजनीतिक चर्चा इस बात पर केंद्रित है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बाद विपक्षी दल आगे क्या रुख अपनाते हैं और आंदोलन को किस तरह समर्थन देते हैं.

CJP के साथ खड़ी दिखी थी सपा

CJP के आंदोलन को लेकर समाजवादी पार्टी का समर्थन पहले भी सामने आ चुका है. जानकारी के मुताबिक, जुलाई में पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के साथ हुए प्रदर्शन के दौरान सपा के कई सांसद आंदोलनकारियों के साथ खड़े नजर आए थे. उस समय मानसून सत्र की शुरुआत के दिन 20 जुलाई को पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति भी बनी थी. इस दौरान डिंपल यादव समेत समाजवादी पार्टी के अन्य सांसद प्रदर्शनकारियों की मदद करते दिखाई दिए थे. अखिलेश यादव ने सदन में भी इस मुद्दे को उठाया था. इसके अलावा डिंपल यादव के सोनम वांगचुक से मिलने जाने का भी जिक्र सामने आया था. अब मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP के नए प्रदर्शन के बीच एक बार फिर सपा के समर्थन की चर्चा हो रही है.

अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग पर लगाए आरोप

दिल्ली में प्रदर्शन से पहले बलिया में भी अखिलेश यादव ने CJP के आंदोलन को लेकर अपनी बात रखी थी. उन्होंने कहा कि जो लोग लोकतंत्र को बचाने और चुनाव आयोग के कथित भेदभावपूर्ण रवैये को उजागर करने के लिए सड़कों पर हैं, समाजवादी पार्टी उनका समर्थन करती है. अखिलेश ने दावा किया कि उनकी पार्टी ने वर्ष 2022 में ही चुनाव आयोग के भेदभाव को लेकर सवाल उठाए थे. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की ओर से लगातार भेदभाव किया गया और वोट काटने का काम हुआ. अखिलेश के मुताबिक, समाजवादी पार्टी ने सबसे ज्यादा हलफनामों के साथ शिकायतें की हैं. उन्होंने दशरथ और नंदलाल निषाद से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया और आरोप लगाया कि वोट कटवाने के लिए फॉर्म भरे गए तथा फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया गया. उन्होंने सवाल उठाया कि इन मामलों में चुनाव आयोग कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा है.

दिल्ली मेट्रो के 57 स्टेशनों को बंद किए जाने की बात

प्रदर्शन से पहले दिल्ली की यातायात व्यवस्था को लेकर भी कई तरह की जानकारियां सामने आई हैं. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, दिल्ली मेट्रो के 57 स्टेशनों को बंद किए जाने की बात कही गई है. इसके अलावा दिल्ली की ओर आने-जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग किए जाने की जानकारी भी दी गई है. कई स्थानों पर पुलिसकर्मी लोगों से पूछताछ और जांच करते नजर आ रहे हैं. प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पहुंच रहे युवाओं को रोके जाने की खबरों के बीच सोशल मीडिया पर हिरासत में लिए जाने के दावे भी चर्चा में हैं. हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि इस जानकारी में नहीं दी गई है. ऐसे में प्रदर्शन से जुड़ी स्थिति पर सभी की नजरें बनी हुई हैं. दिल्ली पुलिस ने अनुमति नहीं दिए जाने के पीछे नियमों का हवाला दिया है.

चिल्ला और गाजीपुर बॉर्डर पर पुलिस के साथ BSF तैनात

दिल्ली से सटे इलाकों में भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है. नोएडा के चिल्ला बॉर्डर पर नोएडा पुलिस के जवान तैनात हैं. यहां दिल्ली पुलिस के साथ सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों की मौजूदगी भी बताई गई है. वहीं, गाजीपुर बॉर्डर पर गाजियाबाद पुलिस के जवानों को तैनात किया गया है. टिकरी और अप्सरा बॉर्डर समेत दूसरे रास्तों पर भी सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है. पुलिस और अर्धसैनिक बलों की मौजूदगी के बीच बॉर्डर से गुजरने वाले लोगों की जांच की जा रही है. देर रात से ही कई स्थानों पर सुरक्षा बल सक्रिय बताए गए हैं. प्रशासन की कोशिश है कि प्रदर्शन के लिए पहुंचने वाली भीड़ को नियंत्रित रखा जाए और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने न पाए.